चिप्स, पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक की बढ़ती लत से बच्चों की सेहत पर संकट, डॉक्टरों ने बताया क्या हो सकता है असर?
बच्चों में जंक फूड की आदतें भविष्य में मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाती हैं। विशेषज्ञों ने घर के पौष्टिक भोजन और शिश ...और पढ़ें

बच्चों में जंक फूड की आदतें भविष्य में मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाती हैं।
HighLights
बचपन में जंक फूड से मोटापा, मधुमेह, हाई बीपी का खतरा बढ़ता है।
विशेषज्ञों ने पौष्टिक घर के खाने और शिशुओं के स्तनपान पर जोर दिया।
स्वामी दयानंद अस्पताल में विश्व स्तनपान सप्ताह पर जागरूकता कार्यक्रम हुआ।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। बच्चों की थाली से पौष्टिक घर का खाना हटाकर बिस्कुट, चिप्स, नमकीन, बर्गर, पिज्जा, मोमोज और कोल्ड ड्रिंक को जगह देना उनकी सेहत पर लंबे समय तक असर डाल सकता है। डाक्टरों के अनुसार, बचपन में विकसित होने वाली गलत खानपान की आदतें आगे चलकर मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
स्वामी दयानंद अस्पताल में विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बच्चों को घर का पौष्टिक भोजन देने और शिशुओं के लिए स्तनपान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इंडियन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) की ईस्ट दिल्ली शाखा के अध्यक्ष डा. पुनीत शर्मा ने बताया कि ओपीडी में पेट दर्द, कब्ज, दांतों में सड़न और पेशाब संबंधी समस्याओं की शिकायत लेकर बच्चे पहुंच रहे हैं। कई बच्चों के भोजन में पैकेट वाले खाद्य पदार्थ नियमित रूप से शामिल हैं, जबकि फल, सब्जियां और घर का खाना कम हो गया है। उन्होंने बच्चों को पारंपरिक भारतीय और पौष्टिक भोजन देने की सलाह दी।
आईएपी दिल्ली के अध्यक्ष डा. अजय गुप्ता ने कहा कि शिशुओं को अनावश्यक रूप से फार्मूला दूध पर निर्भर करने के बजाय स्तनपान को प्राथमिकता देनी चाहिए। डॉ. यांगला ने बताया कि जन्म के बाद छह माह तक केवल मां का दूध शिशु के लिए पर्याप्त पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है।
अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य स्तनपान और बच्चों के स्वस्थ पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इसमें आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों ने लोगों को जागरूक किया। इस दौरान नुक्कड़ नाटक भी हुआ।