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    'प्लीज हमें बचा लो...', ऊपरी मंजिलों से लोग रोते हुए चिल्ला रहे थे, प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया भयावह मंजर

    Updated: Thu, 04 Jun 2026 01:58 AM (GMT+05:30)

    मालवीय नगर अग्निकांड के प्रत्यक्षदर्शियों ने भयावह मंजर बयां किया, जहां लोग ऊपरी मंजिलों से मदद के लिए चिल्ला रहे थे और जान बचाने के लिए कूद रहे थे। स ...और पढ़ें

    मालवीय नगर अग्निकांड के प्रत्यक्षदर्शियों ने भयावह मंजर बयां किया।

    मालवीय नगर अग्निकांड के प्रत्यक्षदर्शियों ने भयावह मंजर बयां किया।

    HighLights

    1. ऊपरी मंजिलों से लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे।

    2. जान बचाने के लिए कई लोग ऊपर से कूदे।

    3. दमकल कर्मियों के पहुंचने में हुई देरी।

    शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। सुबह गेस्ट हाउस से पहले धुआं निकलता दिखा। इस तरफ आकर देखा तो लोग दूसरी-तीसरी मंजिल की खिड़कियों से 'प्लीज हमें बचा लो', 'बचाओ-बचाओ', 'हेल्प-हेल्प'... की आवाजें लगा रहे थे। मौके पर मौजूद लोगों ने आस-पास से गद्दे लाकर बिल्डिंग के नीचे बिछाए।

    जान बचाने के लिए कई लोग ऊपरी मंजिल से नीचे कूद गए, जिन्हें काफी चोट लगी है। देखते ही देखते आग की लपटें ऊपर तक पहुंच गई और लोग निकल ही नहीं पाए। यह हाल बयां किया मालवीय नगर में हुए अग्निकांड के प्रत्यक्षदर्शियों ने। उनका कहना है कि आग में फंसे लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।

    प्रत्यक्षदर्शियों की बात

    मैं पार्क में टहल रहा था तभी धुंआ निकलता दिखा। मौके पर पहुंचकर देखा तो लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। एक विदेशी नागरिक फर्स्ट फ्लोर से कूदने के चक्कर में लटक गया था। उसे बचाने के लिए तुरंत नीचे गद्दे बिछाए। मैं भागकर मैक्स अस्पताल भी गया और गार्ड से एंबुलेंस भेजने को कहा। उन्होंने इमरजेंसी में जाने को कह दिया तो मैं वापस लौटा आया। तब तक चार से पांच लोग ऊपरी मंजिल से कूदकर घायल हो चुके थे। सड़क से गुजर रही एक एंबुलेंस रोककर सभी को अस्पताल पहुंचाया। - अश्विन

    मैं कार क्लीनिंग का काम करता हूं और हादसे के वक्त सड़क के दूसरी ओर था। धुंआ देखकर दौड़ा इस तरफ दौड़ा और देखा कि दूसरी और तीसरी मंजिल से लोग मदद के लिए आवाजें लगा रहे थे। भागकर गद्दे और बिस्तर लाकर नीचे बिछाए। धुआं और आग इतनी तेजी से ऊपर तक बढ़ते गए कि कुछ समझ ही नहीं आया। कुछ लोगों ने नीचे कूदकर जान बचाई। फायर ब्रिगेड एक घंटे बाद आई। समय पर मदद मिलती तो काफी जान बचाई जा सकती थी। - मदन सिंह रावत

    मैं एक कंपनी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर हूं। सड़क के दूसरी तरफ गाड़ी ही रोकी ही थी कि काफी ज्यादा धुंआ निकलता देखा। चंद मिनटों में ही आग ऊपर तक फैल गई थी। लोग हर मंजिल से मदद के लिए चिल्ला रहे थे, रो रहे थे। पुलिस और फायर ब्रिगेड को फोन कर हादसे की सूचना दी। फायर ब्रिगेड वालों ने सबसे पहले बेसमेंट से छह-सात लोगों को निकाला था। जो लोग ऊपर से कूदकर घायल हुए थे उन्हें हमने एंबुलेंस तक पहुंचाया। - मोहम्मद वसीम

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