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    हौज रानी अग्निकांड: अवैध निर्माण से लेकर वेंटिलेशन तक... मजिस्ट्रियल जांच में बड़ा खुलासा

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 09:34 PM (GMT+05:30)

    हौज रानी अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच में दिल्ली पुलिस, एमसीडी, पर्यटन विभाग और बीआरपीएल सहित चार सरकारी एजेंसियों की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। ...और पढ़ें

    हौज रानी अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच में दिल्ली पुलिस, एमसीडी, पर्यटन विभाग और बीआरपीएल सहित चार सरकारी एजेंसियों की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।

    हौज रानी अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच में दिल्ली पुलिस, एमसीडी, पर्यटन विभाग और बीआरपीएल सहित चार सरकारी एजेंसियों की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। 

    HighLights

    1. मजिस्ट्रियल जांच में चार सरकारी एजेंसियों की गंभीर लापरवाही उजागर।

    2. पुलिस, एमसीडी, पर्यटन, बीआरपीएल अवैध निर्माण रोकने में पूरी तरह विफल।

    3. भविष्य के लिए सख्त अग्नि सुरक्षा नियमों और कार्रवाई की सिफारिश।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के हौज रानी स्थित फ्लोरिश स्टे बीएंडबी में गत तीन जून को हुई भीषण आग की घटना में मारे गए 23 लोगों के मामले में हुई मजिस्ट्रियल जांच ने कई सरकारी एजेंसियों की गंभीर लापरवाही उजागर की है।

    गत दिनों मुख्य सचिव को सौंपी गई 111 पन्नों की जांच रिपोर्ट में पुलिस, नगर निगम (एमसीडी), पर्यटन विभाग और बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्षों तक नियमों की अनदेखी और प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध रूप से बनने वाली वाली इस इमारत में निर्माण जारी रहा और अंततः यह त्रासदी हुई।

    रिपाेर्ट में सामने आईं ये बड़ी खामियां

    दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, एमसीडी ने वर्ष 2019 और 2020 में अवैध निर्माण रोकने के लिए नोटिस जारी किए थे, लेकिन मालवीय नगर थाना पुलिस ने उन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं कराया। जांच में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन थाना प्रभारी ने अवैध निर्माण से जुड़ी पूर्व शिकायतों और दर्ज एफआइआर से संबंधित तथ्यों को छिपाया।

    पुलिस को भवन में अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया गया और निर्माण कार्य चलता रहा। बीट अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए संभावित मिलीभगत की आशंका जताई गई है। 2024 में बीएंडबी में सुरक्षा गार्ड और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर जैसी अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर दर्ज एफआइआर के बाद भी पुलिस ने अन्य अनियमितताओं की भी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई।

    पर्यटन विभाग की जांच पर भी सवाल

    रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दौरान यह तथ्य छिपाया गया कि भवन में बेसमेंट मौजूद था और निर्माण चार मंजिल से अधिक था। जबकि निरीक्षण दस्तावेजों में ही बेसमेंट तक जाने वाली सीढ़ियां दर्शाई गई थीं।

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    रिपोर्ट में कहा गया कि निरीक्षण समिति ने भवन को मरम्मत, स्वच्छता, सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा और वेंटिलेशन के मानकों पर सही बताते हुए चेकलिस्ट पूरी कर दी। जांच में यह भी कहा गया कि कई कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था और दम घुटने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जो निरीक्षण में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

    एमसीडी और बीआरपीएल की भूमिका

    जांच रिपोर्ट में कहा गया कि एमसीडी ने अवैध निर्माण रोकने के लिए नोटिस जारी किए, पुलिस से कार्रवाई की मांग की और बिजली कनेक्शन काटने के लिए वर्ष 2020 में बीआरपीएल को पत्र भी लिखा, लेकिन इसके बावजूद निर्माण पूरा हो गया। रिपोर्ट के अनुसार इससे स्पष्ट है कि प्रवर्तन की कार्रवाई प्रभावी नहीं रही।

    बीआरपीएल की भूमिका पर भी रिपोर्ट ने सवाल उठाए हैं। एमसीडी के बिजली काटने के अनुरोध के बजाय बीआरपीएल ने पहले प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्यक्रम की जानकारी मांगी। रिपोर्ट ने इसे एमसीडी के निर्देशों की गलत व्याख्या और जानबूझकर की गई अनदेखी बताया।

    मालिक और प्रबंधन भी जिम्मेदार

    रिपोर्ट के अनुसार भवन मूल रूप से ढाई मंजिला था, जिसे खरीदने के बाद मालिक लवकेश बजाज ने अवैध रूप से ग्राउंड प्लस चार मंजिला बना दिया। वर्ष 2023 में भूतल पर रेस्तरां शुरू किया गया और छत पर दो अतिरिक्त कमरे भी बनाए गए, जिनके लिए कोई वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी।

    जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि 3 जून की सुबह करीब 8:30 बजे रसोई में इलेक्ट्रिक एयर फ्रायर के पास आग लगी। इसके बाद एलपीजी पाइप जलने से गैस रिसाव हुआ और धुआं तेजी से पूरे भवन में फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह 8:15 से 8:45 बजे के बीच आपातकालीन कॉल की गई, जबकि दमकल की गाड़ियां लगभग 9:15 से 9:30 बजे के बीच मौके पर पहुंचीं।

    सुधार के लिए व्यापक सिफारिशें

    रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए नियमित संरचनात्मक आडिट, समय-समय पर सुरक्षा निरीक्षण, जोखिम मानचित्रण, मॉक ड्रिल, बीएंडबी और व्यावसायिक भवनों के लिए सख्त अग्नि सुरक्षा नियम लागू करने तथा संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करने की सिफारिश की गई है।

    साथ ही लापरवाही के दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को आधुनिक संसाधनों से सशक्त बनाने और गीतांजलि फायर स्टेशन पर अतिरिक्त वाटर टेंडर तैनात करने की भी अनुशंसा की गई है।

    दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भवन मालिक लवकेश बजाज, रसोइया केशव नेगी और जय मिश्रा को गिरफ्तार किया था। इनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या, मानव जीवन को खतरे में डालने वाली लापरवाही और आग से नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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