दिल्ली में H1N1 का तांडव: मानसून में पांच गुना बढ़े मामले, बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा खतरा
दिल्ली में मानसून के दौरान एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले पिछले साल की तुलना में पांच गुना से अधिक बढ़ गए हैं, जिससे अब तक 1344 मामले सामने आए हैं। बच् ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
H1N1 मामले पिछले वर्ष से पांच गुना अधिक बढ़े।
बच्चों में संक्रमण अधिक, एक बच्ची की हुई मौत।
मानसून में बुखार, खांसी पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। राजधानी में मानसून के दौरान एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले तेजी से बढ़ गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब पांच गुना से ज्यादा मामले अब तक सामने आ चुके हैं।
पिछले वर्ष 229 मामले एच1एन1 के मामले सामने आए थे, जबकि इस वर्ष अब तक 1344 मामले सामने आ चुके हैं। लगातार वर्षा, वातावरण में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच अस्पतालों में बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस संबंधी परेशानी वाले मरीज पहुंच रहे हैं।
इनमें बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने अब तक इस सीजन एच1एन1 को लेकर स्कूल एडवाइजरी जारी नहीं की है पर शिक्षा निदेशालय स्कूलों को फ्लू के लक्षण वाले बच्चों को ठीक होने तक घर पर रखने की सलाह दे चुका है।
एच 1 एन 1 के कई गुना मामले बढ़े
सफदरजंग अस्पताल में गत जुलाई में एच1एन1 के 11 पुष्ट मामले सामने आए। अगस्त में भी नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी मामलों में वृद्धि हुई है। पीएसआरआइ में एच1एन1 के मरीजों में कई गुना वृद्धि की बात चिकित्सकों ने बताई है।
मैक्योर अस्पताल में भी इस तरह के मामले बढ़े हैं। अस्पताल के कंसल्टेंट मेडिसिन डा. प्रतीक कादियान ने बताया कि मानसून में वायरल संक्रमण बढ़ते हैं पर लगातार बुखार, बढ़ती खांसी या सांस लेने में परेशानी को सामान्य वायरल मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमारी से पीड़ित लोगों में समय पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। मानसून में डेंगू और एच1एन1 दोनों के मामले सामने आते हैं। दोनों में बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं।
इसलिए डेंगू को लेकर भ्रम में रहने की बजाय लगातार तेज बुखार या सांस संबंधी परेशानी होने पर खुद से दवा लेने के स्थान पर चिकित्सक की सलाह से जांच कराना जरूरी है।
बच्चों-बुजुर्गों में गंभीर संक्रमण का खतरा
चिकित्सकों के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे और बुजुर्ग इन्फ्लूएंजा के लिहाज से अधिक संवेदनशील होते हैं। तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या पानी-दूध पीने में दिक्कत हो तो तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए।
दिल्ली के एक निजी अस्पताल में करीब चार साल की बच्ची की एच1एन1 संक्रमण के बाद मृत्यु हुई। संक्रमण के कारण बच्ची में दिमाग की एक दुर्लभ जटिलता के संकेत मिले थे।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ी निगरानी
आरएमएल, लोकनायक सहित दिल्ली के अन्य सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी में भी बुखार, खांसी और सांस संबंधी परेशानी वाले मरीज पहुंच रहे हैं।
जीटीबी अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डा. प्रवीण ने बताया कि उनके यहां फिलहाल एच1एन1 के किसी मामले की पुष्टि नहीं हुई है। फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। एनसीडीसी के निर्देशानुसार संदिग्ध मरीजों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।
पालतू पशुओं से घबराने की जरूरत नहीं
वर्ष 2009 की महामारी के दौरान कुछ कुत्तों और बिल्लियों में एच1एन1 संक्रमण पाया गया था। हालांकि वायरस का मुख्य प्रसार इंसान से इंसान में होता है। दिल्ली में पालतू पशुओं में बड़े पैमाने पर एच1एन1 संक्रमण की कोई रिपोर्ट नहीं है। सामान्य साफ-सफाई रखना पर्याप्त सावधानी है।
कैसे फैलता है एच1एन1
एच1एन1 मच्छर से फैलने वाली बीमारी नहीं है। यह इन्फ्लूएंजा 'ए' वायरस से होने वाला सांस का संक्रमण है। यह वायरस पशुओं में भी पाया जाता है और समय-समय पर इसमें आनुवंशिक बदलाव हो सकते हैं। ऐसे बदलाव के बाद वायरस मनुष्यों को संक्रमित करने में सक्षम हो सकता है। एक बार मनुष्य में संक्रमण स्थापित होने के बाद यह संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
बचाव की सलाह
- खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक को रूमाल या मास्क से ढकें।
- हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं। हाथ धोए बिना आंख, नाक और मुंह को न छुएं।
- बुखार, खांसी या गले में खराश होने पर भीड़ और स्कूल से दूरी रखें।
- घर और कक्षा में हवा का आवागमन बनाए रखें। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में लंबे समय तक न रहें।
- संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब जाने और उसकी इस्तेमाल की हुई वस्तुओं को साझा न करें।
- बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में लक्षण दिखने पर डाक्टर से मिलें।
- तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती, सीने में दर्द या होंठ नीले पड़ने जैसे लक्षण हों तो तुरंत अस्पताल जाएं।
- एंटीबायोटिक खुद से न लें। एच1एन1 वायरल संक्रमण है। डाक्टर के कहने पर एंटी वायरल दवा ले सकते हैं।
- फ्लू से बचाव के लिए इन्फ्लूएंजा का टीका उपलब्ध है।