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फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से दाखिले का खेल, दिल्ली पुलिस ने यूपी में CMO ऑफिस के कर्मचारियों समेत 9 को दबोचा

Published: Thu, 08 Oct 2026 09:47 PM (IST)

दिल्ली पुलिस ने शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने वालों को दबोचा। फोटो: सांकेतिक

फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने वालों को दबोचा। फोटो: सांकेतिक

HighLights

  1. फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र गिरोह का दिल्ली पुलिस ने किया भंडाफोड़

  2. यूपी के सीएमओ कार्यालयों के कर्मचारी सहित नौ आरोपी गिरफ्तार

  3. 27 फर्जी प्रमाणपत्र, लैपटॉप, कार और नकदी बरामद की गई

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिव्यांग कोटे से शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला दिलाने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का उत्तर जिले की स्पेशल स्टाफ ने भंडाफोड़ किया है।

यह गिरोह फर्जी आधार पते तैयार कराने से लेकर विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID) पोर्टल पर आवेदन अपलोड कराने और सरकारी अस्पतालों से दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी कराने तक का पूरा नेटवर्क चला रहा था।

पुलिस ने इस मामले में अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें उत्तर प्रदेश के अलग-अलग सीएमओ कार्यालयों में तैनात कर्मचारी और दिव्यांगता बोर्ड का सदस्य भी शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 27 फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र, 11 मोबाइल, लैपटॉप, मैकबुक, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने वाला कंप्यूटर, 75 हजार रुपये और एक मर्सिडीज कार बरामद की है।

उत्तरी जिले की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, 31 अगस्त को टीम ने मास्टमाइंड ललित को नार्थ कैंपस से गिरफ्तार किया, जो अभी फरीदाबाद में रह रहा था।

उसके पास से बदायूं, बरेली और सिद्धार्थ नगर के सरकारी अस्पतालों द्वारा जारी किए गए 16 दिव्यांगता सर्टिफिकेट बरामद हुए।

इन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल दिव्यांग कैटेगरी के तहत बीटेक और दूसरे अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने के लिए किया जा रहा था। मोरिस नगर थाने में पुलिस ने केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू की।

AI टूल से छात्रों के आधार कार्ड में बदलते थे पते

पूछताछ में ललित ने बताया कि उसने नोएडा के शैक्षिक सलाहकार रोशन मिश्रा और कई अन्य सलाहकारों के साथ मिलकर, फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने में मदद करने के मकसद से छात्रों का निजी डेटा हासिल किया था।

वह AI टूल्स का इस्तेमाल करके छात्रों के आधार कार्ड में उनके पते बदलकर सिद्धार्थ नगर, बदायूं, बरेली, गोरखपुर जैसे जिलों के पते कर दिए जाते थे, और इसके बाद UDID पोर्टल पर एप्लीकेशन अपलोड करते थे।

सीएमओ ऑफिस का कर्मचारी भी खेल शामिल

जांच में पता चला कि ललित के संपर्क में बरेली के सीएमओ ऑफिस के कान्ट्रैक्ट कर्मचारी कुलदीप, बदायूं का शेर सिंह सोलंकी, बरेली दिव्यांगता बोर्ड के सदस्य डॉ. लक्ष्मी कांत सक्सेना और सिद्धार्थनगर के वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जेपी शुक्ला समेत कई लोग थे।

आरोप है कि ये लोग सरकारी अस्पतालों और सीएमओ कार्यालयों की व्यवस्था का इस्तेमाल कर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और प्रमाणपत्र तैयार कराने में मदद करते थे। प्रत्येक प्रमाणपत्र के लिए 20 से 30 हजार रुपये तक लिए जाते थे।

तकनीकी जांच और बैंक खातों में हुए लेनदेन के आधार पर पुलिस ने सिद्धार्थनगर के जेपी शुक्ला और उनके परिचित सुरेंद्र रस्तोगी को भी गिरफ्तार किया।

वहीं, सीतापुर से पकड़े गए आदेश कुमार के घर से नौ दिव्यांगता प्रमाणपत्र बरामद हुए। देवरिया सीएमओ कार्यालय में तैनात जूनियर असिस्टेंट धीरेंद्र कुमार पांडे पर भी फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने में मदद करने का आरोप है।

डॉक्टरों व कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में

पुलिस अब फरार चंदन सिंह यादव समेत गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बरामद प्रमाणपत्र किन छात्रों के नाम पर बनाए गए और उन्होंने इनका इस्तेमाल कहां किया।

संबंधित अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

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