यौन उत्पीड़न पर दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक्शन, जांच के बाद राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर को अनिवार्य रिटायमेंट
डीयू ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में राजनीति विज्ञान विभाग के एक शिक्षक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है। यह कार्रवाई आंतरिक शिकायत समिति की जांच रिपोर् ...और पढ़ें

यौन उत्पीड़न के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक्शन। फोटो: आर्काइव
HighLights
डीयू ने यौन उत्पीड़न मामले में प्रोफेसर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी
आंतरिक शिकायत समिति की जांच रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
विश्वविद्यालय कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। डीयू ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राजनीति विज्ञान विभाग के एक शिक्षक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है।
यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति की जांच रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों के आधार पर की गई। गुरुवार को आयोजित कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में समिति की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद यह निर्णय लागू कर दिया गया।
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, संबंधित शिक्षक के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत लगभग एक वर्ष पहले दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद आंतरिक शिकायत समिति ने मामले की विस्तृत जांच की।
जांच पूरी होने पर समिति ने संबंधित शिक्षक के खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सिफारिश की, जिसे ईसी के सदस्य मित्थुराज और अमन कुमार ने स्वीकार कर लिया।
यौन उत्पीड़न के मामलों पर डीयू की क्या है नीति?
अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। इसी नीति के तहत किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न के मामले में तय प्रक्रिया के अनुसार निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
विश्वविद्यालय का स्पष्ट मानना है कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।
वहीं इसी तरह का एक मामला सत्यवती कॉलेज में भी सामने आया था जहां छात्रा ने एक प्रोफेसर पर चुपके से फोटो खींचने का आरोप लगाया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में उसकी शून्य सहिष्णुता की नीति है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कठोर कदम उठाए जाते रहेंगे।
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण संबंधी कानून तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रावधानों के तहत आंतरिक शिकायत समिति को शिकायतों की जांच करने और सक्षम प्राधिकारी को कार्रवाई की सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त है।