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    ईशा फाउंडेशन केस में दिल्ली HC से नक्कीरन पब्लिकेशन्स को झटका, यूट्यूब से हटेंगे मानहानि वाले 49 वीडियो

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 10:00 AM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन द्वारा नक्कीरन पब्लिकेशन्स के खिलाफ दायर मानहानि मुकदमे में अहम आदेश दिया है। पीठ ने गूगल एलएलसी को ईशा फा ...और पढ़ें

    सद्गुरु को मानहानि केस में मिली राहत। फोटो: आर्काइव

    सद्गुरु को मानहानि केस में मिली राहत। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. दिल्ली हाई कोर्ट ने मानहानि मुकदमे में आदेश दिया

    2. गूगल को ईशा फाउंडेशन के वीडियो हटाने का निर्देश

    3. नक्कीरन पब्लिकेशन्स के 49 वीडियो हटाए जाएंगे

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के एक साप्ताहिक तमिल पत्रिका नक्कीरन पब्लिकेशन्स के खिलाफ सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में पर अहम आदेश पारित किया है।

    किन वीडियो को हटाने का दिया आदेश?

    न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने ईशा फाउंडेशन से जुड़े 44 शार्ट वीडियो और पांच अंग्रेजी भाषा के वीडियो को हटाने का आदेश दिया है। पीठ ने गूगल एलएलसी को वीडियो हटाने का आदेश दिया।

    पीठ ने कहा कि उसके अंतरिम आदेश में पहले से शामिल वीडियो के अलावा, अतिरिक्त लिंक भी हटाए जाने चाहिए। पीठ ने अपने पहले के आदेश को पूरी तरह से लागू करने के लिए संशोधन को जरूरी माना, क्योंकि अतिरिक्त वीडियो उस सामग्री का हिस्सा थे जिस पर निषेधाज्ञा की कार्यवाही में पहले ही विचार किया गया था।

    पहले के आदेश में क्या कहा गया था?

    19 मार्च के अपने आदेश में पीठ ने तमिल साप्ताहिक पत्रिका और उसके संपादक को फाउंडेशन के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री बनाने, प्रकाशित करने, अपलोड करने या फैलाने से रोक दिया था।

    साथ ही ईशा फाउंडेशन द्वारा पहचाने गए यूट्यूब वीडियो और लेखों को हटाने का निर्देश दिया था। अपने नए आवेदन में, फाउंडेशन ने तर्क दिया कि हालांकि पहले के आदेश में निषेधाज्ञा आवेदन में उल्लिखित लिंक का जिक्र था, लेकिन उसमें गलती से 39 वीडियो और पांच अंग्रेजी भाषा के वीडियो छूट गए थे।

    याचिका पर अदालत ने क्या कहा?

    वहीं, याचिका का विरोध करते हुए, तमिल साप्ताहिक पत्रिका और उसके संपादक ने तर्क दिया कि यह आवेदन असल में एक समीक्षा याचिका है और इसमें अतिरिक्त सामग्री जोड़कर अंतरिम निषेधाज्ञा के दायरे को बढ़ाने की मांग की गई थी।

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    हालांकि, पीठ ने कहा कि अदालत की राय में यह स्पष्ट है कि 39 शार्ट वीडियो और पांच अंग्रेजी वीडियो के लिए अलग से सुनवाई की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे पूर्व याचिका का हिस्सा हैं।

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