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    तो क्या बदल जाएगा सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का नाम? DMRC की आपत्ति, दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा हलफनामा

    Updated: Thu, 19 Feb 2026 07:32 PM (IST)

    DMRC ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे ₹40-45 लाख का अतिरिक्त वित्ती ...और पढ़ें

    DMRC ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलने के पक्ष में नहीं है। फाइल फोटो

    DMRC ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलने के पक्ष में नहीं है। फाइल फोटो

    HighLights

    1. DMRC ने सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलने से इनकार किया।

    2. वित्तीय बोझ और अन्य स्टेशनों पर याचिकाओं का हवाला दिया।

    3. हाई कोर्ट ने DMRC को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलकर "सर्वोच्च न्यायालय" करने की मांग पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने कोर्ट को बताया कि वह इस बदलाव के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर एक्स्ट्रा फाइनेंशियल बोझ पड़ेगा।

    चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने DMRC ने दलील दी कि सिर्फ एक स्टेशन पर साइनेज बदलने में लगभग 40 से 45 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा, स्टेशन साइनेज, रोड मैप, मोबाइल ऐप और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म में भी बदलाव करने होंगे।

    DMRC के वकील ने दलील दी कि एक स्टेशन का नाम बदलने से दूसरे स्टेशनों के नामों को लेकर भी ऐसी ही पिटीशन फाइल हो सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर एडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल असर पड़ सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि संभावित लिटिगेशन का डर किसी मांग का विरोध करने का आधार नहीं हो सकता और DMRC को एक डिटेल्ड एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया।

    अप्रैल में होगी मामले की अगली सुनवाई 

    मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। कोर्ट याचिकाकर्ता उमेश शर्मा की दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि हिंदी साइनेज पर "सुप्रीम कोर्ट" की जगह "सर्वोच्च न्यायालय" लिखा जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशन का हिंदी नाम "केंद्रीय सचिवालय" लिखा जाता है, और इसलिए, यहां भी हिंदी नाम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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    याचिका में ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट और नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि केंद्र सरकार से जुड़े साइनेज, नेमप्लेट और डॉक्यूमेंट्स अंग्रेजी और हिंदी दोनों में देवनागरी स्क्रिप्ट में होने चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर ही हिंदी नाम "भारत का सर्वोच्च न्यायालय" लिखा है।

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