दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर वेरिएबल स्पीड लिमिट ट्रायल टला, जानें कब से लागू होगी नई व्यवस्था
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर परिवर्तनीय गति सीमा का ट्रायल फिलहाल टल गया है, क्योंकि इस योजना पर अभी और अध्ययन किया ...और पढ़ें
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दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर वेरिएबल स्पीड लिमिट प्लान का ट्रायल फिलहाल टल गया है।
HighLights
डीएमई पर परिवर्तनीय गति सीमा का ट्रायल स्थगित।
योजना पर आईआईटी रुड़की और सीआरआरआई कर रहे अध्ययन।
अक्षरधाम से सराय काले खां के बीच बदलेगी गति सीमा।
सौरभ पांडेय, पूर्वी दिल्ली। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर वेरिएबल स्पीड लिमिट (परिवर्तनीय गति सीमा) प्लान का ट्रायल फिलहाल टल गया है। ट्रायल के लिए लगाए गए सभी डिस्प्ले स्पीड बोर्ड को बंद कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्लान पर अभी और स्टडी की जा रही है। अभी ट्रायल शुरू होने में लगभग एक माह का और समय लगेगा। इसके बाद दिन में तीन बार अक्षरधाम से सराय काले खां के बीच वाहनों की स्पीड बदलेगी। ओवरस्पीड करने पर वाहनचालकों का चालान किया जाएगा।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए 15 अगस्त से परिवर्तनीय गति सीमा की व्यवस्था लागू की जानी थी। लेकिन अभी इसे टाल दिया गया है। पहले चरण में यह व्यवस्था एक्सप्रेसवे की दिल्ली सीमा में अक्षरधाम से सराय काले खां के बीच लागू की जानी है। यह प्रयोग इस लिए किया जा रहा है कि अक्षरधाम से आगे एकसाथ वाहनों का जाम न लगे। स्पीड कंट्रोल कर आइटीओ व सराय काले खां समेत अन्य स्थानों पर पहुंचने वाले वाहनों की संख्या कम की जाएगी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की इस परियोजना पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) मिलकर काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य सड़क पर भीड़ कम करना, दुर्घटनाओं में कमी लाना और यातायात को अधिक व्यवस्थित बनाना है। खासतौर पर डीएमई से मध्य दिल्ली में बड़ी संख्या में वाहन एक साथ पहुंचते हैं। उम्मीद है कि स्पीड कम होगी तो वाहन धीरे-धीरे पहुंचेंगे और जाम कम हो सकेगा।
योजना पर उठ रहे थे सवाल, अभी जारी है स्टडी
विशेषज्ञों की मानें तो एक्सप्रेसवे का मकसद ही एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले वाहनों को कम से कम समय में पहुंचाना होता है। इसके चलते डीएमई पर परिवर्तनीय गति सीमा के प्लान सवाल भी उठाए जा रहे थे। दरअसल, मेरठ से गाजियाबाद तक सौ किमी प्रतिघंटा की स्पीड से वाहन आते हैं और उसके बाद दिल्ली पहुंचते ही गति सीमा 70 किमी की हो जाती है।
ऐसे में अगर यह गतिसीमा 55 और 65 होगी तो दिल्ली में प्रवेश लेते ही वाहन और धीमे हो जाएंगे और यूपी-दिल्ली बार्डर से ही जाम के हालात बनेंगे। इसके साथ अभी जो एक घंटे में मेरठ से दिल्ली और दिल्ली से मेरठ का जो दावा है उसका समय भी बढ़ेगा। यही कारण है कि सीआआरआइ ने इस स्टडी को लागू करने से पहले और समय दिया है और गति सीमा को बदला भी जा सकता है।
अभी इस तरह रहेगी वाहनों की गति सीमा
इस व्यवस्था के तहत रात 12 बजे से सुबह सात बजे तक कारों की अधिकतम गति 65 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की 50 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक, जब ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक रहता है, कारों की गति सीमा 55 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की 45 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
वहीं शाम पांच बजे से रात 12 बजे तक कारें अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहन 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चल सकेंगे। वर्तमान में यहां वाहनों की गति सीमा 70 किमी प्रतिघंटा है।
प्लान को लेकर अभी कुछ और स्टडीज बाकी हैं। इन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के साथ संयुक्त निरीक्षण कर परिवर्तनीय गति सीमा को लागू किया जाएगा। फिलहाल इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले बोर्ड को बंद करवा दिया है। - डॉ. सी रवि शेखर, डायरेक्टर, सीआरआरआई
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