प्रदूषण पर प्रहार: मध्य दिल्ली की सड़कों पर लगे 'स्मार्ट स्मॉग पोल', रोशनी के साथ देंगे प्रदूषण का रियल टाइम डाटा
मध्य दिल्ली में स्मार्ट स्मॉग पोल रोशनी के साथ हवा की गुणवत्ता बता रहे हैं और प्रदूषण कम कर रहे हैं। आईआईटी दिल्ली इन सौर ऊर्जा संचालित पोल का मूल्यां ...और पढ़ें

मध्य दिल्ली में स्मार्ट पोल रोशनी के साथ बता रहे हवा की गुणवत्ता।
HighLights
पोल सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं, बिजली की खपत नहीं।
मिस्ट स्प्रेयर हवा से PM2.5, PM10 कणों को हटाते हैं।
हर पांच मिनट में हवा की गुणवत्ता का लाइव डेटा।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। मध्य दिल्ली की सड़कों पर इन दिनों दिख रहे हाई-टेक 'स्मार्ट स्मॉग पोल' हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं। स्ट्रीट लाइट के तौर पर रात को ये पोल रोशनी देते हैं तो दिन- रात आसपास की हवा में पीएम 2.5 एवं पीएम 10 जैसे प्रदूषक तत्वों की जानकारी भी देते हैं। दरअसल ये पोल दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित किए गए 'इनोवेशन चैलेंज' की देन हैं।
सरकार की इस पहल के तहत देश भर से मिली ढेरों प्रविष्टियों में से चयनित यह अनूठी तकनीक भी शामिल है। शुरुआती तौर पर बेहद व्यावहारिक व कारगर दिखने के बाद सरकार ने इसका ट्रायल शुरू कराया है। अब आइआइटी दिल्ली की विशेषज्ञ टीम इस माडल का विस्तृत विश्लेषण कर रही है, जिसके बाद इसे पूरी दिल्ली में लागू करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
स्मार्ट पोल की खासियतें
सौर ऊर्जा से संचालन : यह पोल पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होता है, जिससे इसके संचालन में बिजली की कोई खपत नहीं होती और यह पर्यावरण के अनुकूल काम करता है।
प्रदूषण पर सीधा प्रहार : इसमें लगे मिस्ट स्प्रेयर हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 के सूक्ष्म कणों पर पानी की बारीक धुंध छोड़ते हैं, जिससे ये भारी होकर जमीन पर बैठ जाते हैं और हवा साफ होती है।
हर पांच मिनट में लाइव डेटा अपडेट : पोल में लगा डिजिटल मानिटर हर पांच मिनट में आसपास के पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को आटोमैटिकली अपडेट करता है।
24 घंटे का रिपोर्ट कार्ड : डिस्प्ले स्क्रीन पर यह रियल-टाइम डेटा भी दिखता है कि बीते 24 घंटों के भीतर इस सिस्टम ने कुल कितनी हवा को साफ किया है।
आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट पर टिका पूरे शहर का प्लान
फिलहाल महीने भर की अवधि के लिए आइआइटी दिल्ली की टीम इस पायलट प्रोजेक्ट का गहन मूल्यांकन कर रही है। विशेषज्ञों की टीम यह देख रही है कि खुले वातावरण में मिस्ट छिड़काव से वास्तव में एक्यूआइ और धूल कणों में कितनी कमी आती है।
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यदि इस एक महीने के दौरान आईआईटी दिल्ली की समीक्षा रिपोर्ट सकारात्मक रहती है और यह मॉडल प्रदूषण नियंत्रण में प्रभावी साबित होता है, तो दिल्ली सरकार इस तकनीक को राजधानी के अन्य सभी प्रमुख और हाटस्पाट इलाकों में बड़े पैमाने पर तैनात करने की योजना बनाएगी।