जेल से ज्यादा विदेश में बैठे गैंगस्टर एनसीआर में फैला रहे आतंक, सोशल मीडिया के जरिए चला सिंडिंकेट
दिल्ली-एनसीआर में जेल और विदेश से संचालित गैंगस्टरों का आतंक बढ़ रहा है, जिससे रंगदारी, गैंगवार और हत्याएं चिंता का ...और पढ़ें

दिल्ली-एनसीआर में जेल और विदेश से संचालित गैंगस्टरों का आतंक बढ़ रहा है।
HighLights
जेल और विदेश से संचालित हो रहे गैंगस्टरों का आतंक।
रंगदारी, गैंगवार और हत्याएं दिल्ली-एनसीआर में बढ़ीं।
इंटरनेट, सोशल मीडिया से भर्ती और अवैध हथियार सप्लाई।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। राजधानी में आए दिन देश की विभिन्न जेलों में बंद गैंग्सटरों और विदेश में बैठे गैंग्सटरों द्वारा कारोबारियों और अमीर लोगाें को धमकी देकर रंगदारी मांगने, रंगदारी न देने पर उनकी हत्या करवा देने के अलावा गैंग्सटरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई (गैंगवार) में सरेआम एक दूसरे की हत्या कर देने की बात चिंता का विषय बन गई है।
स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों, एनकाउंटर, धरपकड़ और अवैध हथियारों की तस्करी पर नकेल कसने के दावों के बावजूद राजधानी में आपराधिक वारदातें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जो गैंग्सटर जेल से बंद हैं वे जेल से गिरोह चला रहे हैं और जो विदेश में बैठे हैं वे और आसानी से एनसीआर में रंगदारी रैकेट चला रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर में गैंग्सटरों के बढ़ते आतंक ने अब लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। प्रापर्टी डीलर की हत्या में हिमांशु व नीरज फरीदपुरिया नाम के जिन दो गैंग्सटरों का नाम आया है ये दोनों के अमेरिका में बैठे हैं। गैंग्सटरों का यह दुस्साहस केवल पुलिस के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि आम नागरिकों और व्यापारियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
लचर कानून व्यवस्था के कारण ही इस साल बीते आठ माह में 374 लोगों की हत्या हो चुकी है। इनमें 20 प्रतिशत से अधिक हत्या की वारदातें गैंगवार व रंगदारी न देने पर हुई हैं। पिछले दो साल के आंड़कों को देखें तो 2024 में साल भर 504 लोगों की हत्या हुई थी, 2025 में आंकड़ा घटकर 491 हो गया था। लेकिन इस साल आठ माह में ही 374 का आंकड़ा पार देना दिल्ली के लोगों के लिए चिंता की बात बन गई है।
जेल से और विदेश से चल रहा सिंडिकेट
पुलिस अधिकारी का कहना है कि आज का अपराध पारंपरिक ढ़ाचे से अलग ''संगठित अपराध सिंडिकेट'' बन चुका है। विदेश में बैठे दविंदर सिंह बंबीहा, हिमांशु भाऊ, कपिल सांगवान (नंदू), गोलडी बराड़ समेत 25 से अधिक बड़े गैंग्सटर कनाडा, अमेरिका, दुबई, पुर्तगाल आदि में बैठकर या देश की सुरक्षित जेलों (तिहाड़, बठिंडा, मंडोली) से नेटवर्क चला रहे हैं।
इंटरनेट-आधारित कॉलिंग
वॉट्सएप, सिग्नल, टेलीग्राम जैसी एन्क्रिप्टेड एप्स और इंटरनेट कालिंग के जरिए रंगदारी और हत्या के आदेश दिए जाते हैं, जिन्हें ट्रेस करना पुलिस के लिए तकनीकी चुनौती बन जाता है।
इंटरनेट मीडिया के जरिये भर्ती
अब गैंग्सटरों के पास कोई स्थायी गुर्गे नहीं होते। इंटरनेट मीडिया (इंस्टाग्राम, फेसबुक) पर अपराध का महिमामंडन करके और जल्द पैसा कमाने का लालच देकर हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के नाबालिग व युवाओं को बरगलाया जाता है।
नाबालिग या नए लड़कों को पहले एक वारदात (फायरिंग/हत्या) का काम सौंपा जाता है, जिन्हें पुलिस तुरंत पकड़ भी ले तो गिरोह पर कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि मुख्य सरगना उनसे कभी सीधे नहीं मिलते।
अवैध हथियारों की निर्बाध सप्लाई
स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच द्वारा अक्सर हथियार तस्करों को पकड़े जाने के बावजूद हथियारों का प्रवाह रुक नहीं रहा है। दरअसल सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश के मेरठ, मध्य प्रदेश और राजस्थान के रास्ते पिस्टल अवैध कट्टे बड़ी मात्रा में दिल्ली-एनसीआर में लाए जाते हैं। अंतराष्ट्रीय स्तर के हथियार मध्य पूर्व और सीमा पार से इन गैंग्सटरों तक पहुंच रहे हैं।
रंगदारी और फाइनेंस का मजबूत तंत्र
गैंगस्टरों की असली ताकत उनकी आर्थिक फंडिंग होती है। सभी गैंग्सटर बिल्डर, प्रापर्टी डीलर, कार शोरूम मालिक, क्लब ओनर और सट्टेबाजों को डराकर करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूलते हैं। जबरन वसूली का यह पैसा तुरंत हवाला या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से विदेश में बैठे सरगना के पास पहुंचा दिया जाता है, जिससे उनके नेटवर्क को फंडिंग मिलती रहती है।
