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    हर साल बारिश में डूबती दिल्ली को कैसे मिलेगी स्थायी राहत? CEEW ने बताया 3 सूत्रीय मास्टर प्लान

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 05:37 AM (GMT+05:30)

    थिंक टैंक सीईईडब्ल्यू ने दिल्ली में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव से निपटने के लिए तीन सूत्रीय कार्ययोजना का प्रस्ताव दिया है। इसमें 30 साल का ड्रे ...और पढ़ें

    30 वर्षों के ड्रेनेज सिस्टम का ऑडिट करना होगा।

    30 वर्षों के ड्रेनेज सिस्टम का ऑडिट करना होगा।

    HighLights

    1. 30 वर्षों के ड्रेनेज सिस्टम का ऑडिट करना होगा।

    2. शहर के उच्च जोखिम वाले हॉटस्पॉट की पहचान करना।

    3. मानसून के लिए अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक योजना।

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में मानसून के दौरान 24 घंटों में होने वाली 100 मिमी से अधिक वर्षा और उससे पैदा होने वाली जलभराव की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए रणनीतिक बदलाव की सख्त आवश्यकता है। थिंक टैंक काउंसिल आन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के एक नए अध्ययन के अनुसार दिल्ली को आपातकालीन राहत से आगे बढ़कर ''जलवायु जोखिम आधारित नियोजन'' की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। तीन सूत्रीय कार्ययोजना को अपनाना होगा।

    अत्यधिक वर्षा के कारण होने वाले जलभराव यानी शहरी बाढ़ से निपटने का तीन सूत्रीय मास्टर प्लान

    • 30 वर्षों का ड्रेनेज ऑडिट : सबसे पहले यह जांचना होगा कि क्या दिल्ली का मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम पिछले 30 वर्षों की सबसे भीषण वर्षा के पानी को निकालने में सक्षम है या नहीं।
    • उच्च जोखिम वाले हॉटस्पॉट की पहचान : शहर के उन इलाकों और संवेदनशील केंद्रों को चिन्हित करना होगा, जहां थोड़ी सी तेज वर्षा भी भारी तबाही और जलभराव का कारण बनती है।
    • चरणबद्ध एक्शन प्लान : मानसून से पहले, मानसून के दौरान और मानसून के बाद के लिए अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक प्राथमिकताओं की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जाए।

    कचरा प्रबंधन और भूमि उपयोग नीतियों का तालमेल भी आवश्यक

    सीईईडब्ल्यू के फेलो डॉ नितिन बस्सी के मुताबिक, इस नियोजन को केवल नालों की सफाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और भू उपयोग में बदलाव वाली नीतियों के साथ जोड़ना होगा, ताकि नालों में कचरा नहीं फंसे और प्राकृतिक जल निकायों (खादर क्षेत्रों) पर अतिक्रमण रोका जा सके।

    ठाणे और नवसारी मॉडल से सीख सकती है दिल्ली

    सीईईडब्ल्यू द्वारा महाराष्ट्र के ठाणे और गुजरात के नवसारी शहरों के लिए तैयार की गई ''फ्लड रिस्क मिटिगेशन एक्शन प्लान'' दिल्ली के लिए एक बेहतरीन उदाहरण साबित हो सकता है। इस मॉडल को अपनाकर दिल्ली ना केवल प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और आपात- कालीन राहत को बेहतर बना सकती है, बल्कि ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर (जल निकायों और हरियाली) का संरक्षण कर स्थानीय वासियों को जलभराव से स्थायी राहत दे सकती है। मालूम हो कि उक्त प्लान में इन्हीं सब बिंदुओं को शामिल किया गया था।

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