दिल्ली में जल संकट: यमुना में अधिक पानी छोड़ने से ही मिलेगी राहत, वजीराबाद जलाशय का जलस्तर कम
दिल्ली में पिछले पखवाड़े से अधिक समय से पेयजल संकट गहराया हुआ है, जिसका मुख्य कारण वजीराबाद जलाशय का जलस्तर ...और पढ़ें
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दिल्ली में बीते पखवाड़े से भीषण जल संकट का दौर जारी।
HighLights
दिल्ली में पखवाड़े से अधिक समय से पेयजल संकट।
वजीराबाद जलाशय का जलस्तर गिरने से संयंत्र प्रभावित।
यमुना में अधिक पानी छोड़ने से ही समस्या हल।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में पिछले एक पखवाड़े से अधिक समय से पेयजल की समस्या बनी हुई है। वजीराबाद जलाशय का जलस्तर नीचे गिरने के कारण वजरीबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। इन दोनों प्रमुख संयंत्रों से दिल्ली की जल आवश्यकता का 20 प्रतिशत से अधिक पानी मिलता है।
इनसे कम पानी मिलने के कारण उत्तरी दिल्ली, उत्तर पश्चिमी के साथ दी मध्य दिल्ली के क्षेत्र में लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है। समस्या दूर करने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से बात की थी। उसके बाद लगभग 50 क्यूसेक अधिक पानी मिल रहा है। इसके बावजूद समस्या दूर नहीं हो रही है।
1002 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) पेयजल उपलब्धता का लक्ष्य
समर एक्शन प्लान में 1002 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) पेयजल उपलब्धता का लक्ष्य रखा गया था। इसकी तुलना में लगभग 900 एमजीडी पानी मिल रहा है। इसका मुख्य कारण वजीराबाद व चंद्रावल डब्ल्यूटीपी की क्षमता से लगभग 25 प्रतिशत कम पानी मिलना है। इन दोनों संयंत्रों की कुल क्षमता 230 एमजीडी से अधिक है।
दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा से लगभग मुनक नहर के माध्यम से 927 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। दिल्ली के हैदरपुर से नहर का पानी इन दोनों संयंत्रों तक लाकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन, समस्या दूर करने के लिए वजीराबाद जलाशय का जलस्तर बढ़ना आवश्यक है।
इसका सामान्य स्तर 674.5 फीट होना चाहिए। इसकी तुलना में यह 669 फीट से भी कम है। इसका जलस्तर बढ़ाने के लिए यमुना में अधिक पानी छोड़ना होगा।
हथनी कुंड से नदी में मात्र 352 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा
हथनी कुंड से नदी में मात्र 352 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। साउथ एशिया नेटवर्क आन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल (सैंड्रप) के सहसंयोजक बीएस रावत का कहना है कि दिल्ली में जल आपूर्ति की समस्या हल करने के लिए यमुना में प्रवाह बढ़ाना होगा। इसके लिए 352 क्यूसेक पानी पर्याप्त नहीं है। इसमें अधिकांश पानी वाष्पीकरण के कारण बर्बाद हो जाता है। इस कारण नदी सूखी हुई है।
