दिल्ली में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों का बदलेगा प्रबंधन ढांचा, अभिभावकों की भूमिका होगी मजबूत
दिल्ली सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के नए एसएमसी दिशानिर्देशों के तहत राजधानी के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में प्रबंधन ढांचे को बदलने की तैयारी कर ...और पढ़ें

अभिभावकों की भूमिका सरकारी और निजी स्कूलों में बढ़ेगी। फाइल फोटो
HighLights
अभिभावकों की भूमिका सरकारी और निजी स्कूलों में बढ़ेगी।
फीस, सुरक्षा और शिकायतों पर अभिभावकों की आवाज मजबूत।
डिजिटल निगरानी और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर।
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। राजधानी के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में अब अभिभावकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सकती है। दिल्ली सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी विद्यालय प्रबंंधन समिति (एसएमसी) दिशानिर्देश 2026 के बाद दिल्ली सरकार सभी सरकारी और निजी स्कूलों का स्कूल प्रबंधन का ढांचा बदलने की तैयारी कर रही है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि इसी शैक्षणिक सत्र से राजधानी में नए एसएमी ढांचे को लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। ऐसा होने पर पहली बार दिल्ली के निजी स्कूलों में भी अभिभावकों को संस्थागत स्तर पर भागीदारी मिल सकती है। दिल्ली में वर्तमान में लगभग 1,030 सरकारी और करीब 1,700 निजी स्कूल हैं। सरकारी स्कूलों में एसएमसी पहले से लागू है, लेकिन नई गाइडलाइंस के बाद इसके दायरे और अधिकारों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
अब तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एसएमसी मुख्य रूप से आधारभूत सुविधाओं, बच्चों की उपस्थिति, मिड-डे मील और स्कूल डेवलपमेंट प्लान तक सीमित मानी जाती रही है। कई स्कूलों में समितियां सक्रिय रहीं, लेकिन कई जगह यह व्यवस्था केवल औपचारिक बैठकों तक सिमट गई।
केंद्र सरकार की ओर से जारी एसएमसी गाइडलाइंस में स्कूल गवर्नेंस, डिजिटल मानिटरिंग, बच्चों की सुरक्षा, एंटी-बुलिंग निगरानी, सार्वजनिक स्कूल रिपोर्ट कार्ड और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। उसके तहत बाल वाटिका से 12वीं तक एकीकृत निगरानी व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है।
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फीस, सुरक्षा और शिकायतों पर बढ़ेगी अभिभावकों की भूमिका
राजधानी में पिछले कुछ वर्षों में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि, सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी स्कूलों में एसएमसी लागू होती है तो इन मुद्दों पर अभिभावकों की सामूहिक आवाज मजबूत हो सकती है।
रोहिणी स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या ने कहा यदि अभिभावकों की सहभागिता रचनात्मक तरीके से बढ़ाई जाती है तो पारदर्शिता बढ़ सकती है। लेकिन प्रबंधन स्वायत्तता भी बनी रहनी चाहिए।
पूर्वी दिल्ली के एक निजी स्कूल संचालक का कहना है कि दिल्ली के कुछ निजी स्कूलों में पीटीए पहले से है, लेकिन एसएमसी उससे कहीं ज्यादा औपचारिक संरचना बन सकती है।
शाहदरा के एक सरकारी स्कूल प्रधानाचार्य ने कहा कि दिल्ली में सरकारी स्कूलों में एसएमसी कई वर्षों से है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावशीलता हर स्कूल में अलग रही।
नई गाइडलाइंस जवाबदेही बढ़ा सकती हैं। जामा मस्जिद स्थित सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य ने नई दिशा-निर्देश में पहली बार डिजिटल निगरानी और सुरक्षा लेखा-परीक्षा जैसे व्यावहारिक तंत्र शामिल किए गए हैं। इससे कमेटियां ज्यादा सक्रिय हो सकती हैं।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों की मौजूदा एसएमसी व्यवस्था मुख्य रूप से स्कूल स्तर की निगरानी और सामुदायिक जुड़ाव तक सीमित थी। नई केंद्रीय गाइडलाइंस इसे डाटा-आधारित शासन माडल में बदलने की कोशिश करती दिखाई देती हैं।
नई व्यवस्था में स्कूल रिपोर्ट कार्ड को सार्वजनिक करने, नियमित स्कूल आडिट, बाल संरक्षण निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग पर जोर दिया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजधानी के स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ सकती हैं।
दिल्ली सरकार की मौजूदा एसएमसी
- केंद्र सरकारी की नई एसएमसी
- मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों तक सीमित
- निजी स्कूलों तक विस्तार की तैयारी
- फोकस हाजिरी और बुनियादी सुविधाएं
- गवर्नेंस और लर्निंग आउटकम्स पर जोर
- अधिकतर मैनुअल प्रक्रिया
- डिजिटल मानिटरिंग और ट्रैकिंंग
- सीमित माता-पिता की भागीदारी
- अभिभावकों की संस्थागत भूमिका
- बैठकों की औपचारिक व्यवस्था
- नियमित समीक्षा और सार्वजनिक जवाबदेही
- सुरक्षा पर सीमित फोकस
- सुरक्षा आडिट और एंटी-बुलिंग निगरानी
- चेयरमैन स्कूल का प्रधानाचार्य
- चेयरमैन अभिभावक, प्रधानाचार्य सदस्य सचिव
ये बदलेगा
- निजी स्कूलों में अभिभावकों की भूमिका बढ़ेगी।
- फीस और सुविधाओं पर जवाबदेही मजबूत होगी।
- स्कूल सुरक्षा की निगरानी बढ़ेगी।
- शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक संरचित होगी।
- स्कूल प्रशासन में सामुदायिक भागीदारी बढ़ सकती है।
- वाट्सएप और गूगल मीट के जरिए वर्चुअल/हाइब्रिड एसएमसी बैठकों की व्यवस्था
- एसएमसी के कामकाज की सालाना प्रदर्शन निगरानी
- बैठक, उपस्थिति, फैसले और फंड उपयोग का रिकार्ड अनिवार्य
- अभिभावक फीडबैक बाक्स की शिकायतों पर मासिक चर्चा
- खंड शिक्षा अधिकारी करेगा विवादों का निपटारा
- कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए रेमेडियल कक्षाओं पर जोर
- स्कूलों में भावनात्मक सुरक्षा और बच्चे की गरिमा सुनिश्चित करने का प्रविधान
- बाल उत्पीड़न विरोधी और बाल संरक्षण प्रणालियों की निगरानी
- अभिभावक-शिक्षक-समुदाय की सहभागिता बढ़ाने पर फोकस
- स्कूलों को सामुदायिक शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी
- पर्यावरण अनुकूल और आपदा-सुरक्षित विद्यालय योजना का प्रविधान
- स्कूल विकास योजना में भविष्य का विस्तार और जनसंख्या के रुझान शामिल होंगे
- डिजिटल निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी
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