'फ्लैग अंकल' ने पिता से थामी थी देशभक्ति की मशाल, अब बेटा बढ़ा रहा विरासत; PM मोदी ने दिया था 'नाम'
सदर बाजार में 'फ्लैग अंकल' अब्दुल गफ्फार के परिवार की तीन पीढ़ियां देशभक्ति की मशाल थामे हुए हैं। दादा अब्दुल रहमान से शुरू हुई तिरंगा बनाने की यह विर ...और पढ़ें
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सदर बाजार में स्थित अपनी दुकान में बना तिरंगा दिखाते अब्दुल मालिक। जागरण
HighLights
'फ्लैग अंकल' के परिवार की देशभक्ति की विरासत जारी।
सदर बाजार में तीन पीढ़ियों से बन रहे तिरंगे।
स्वतंत्रता दिवस के लिए 25-30 लाख तिरंगे की आपूर्ति।
शशि ठाकुर, नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते ही सदर बाजार देशभक्ति के रंगों में सराबोर हो जाता है। यहां दूर-दूर से लोग तिरंगा खरीदने के लिए आते हैं। इसी बाजार की संकरी गलियों में 'फ्लैग अंकल' की दुकान भी है, जिसकी नींव केवल ईंट-गारे से नहीं, बल्कि देशभक्ति के जज्बे से रखी गई थी।
29 दिसंबर 2025 को 81 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह चुके अब्दुल गफ्फार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'हर घर तिरंगा अभियान' के दौरान 'फ्लैग अंकल' के नाम से पुकारा था।
अब परिवार की तीसरी पीढ़ी
उन्होंने अपने पिता अब्दुल रहमान से इसकी प्रेरणा ली थी। अब परिवार की तीसरी पीढ़ी यानी अब्दुल गफ्तार के बेटे अब्दुल मालिक देशभक्ति की इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
दुकान के संचालक अब्दुल मालिक ने बताया कि उनके दादा अब्दुल रहमान ने आजादी से पहले तिरंगा बनाने का काम शुरू किया था। उस समय लोग खादी का कपड़ा खूब पहनते थे। दादा बंगाल से खादी का कपड़ा मंगाते थे।
बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले सेनानी उनकी दुकान से तिरंगा और खादी के कपड़े लेने के लिए आते थे। उनके निधन के बाद अब्दुल मालिक के पिता अब्दुल गफ्फार इस मशाल को लेकर आगे बढ़े।
अब्दुल मलिक काम को बढ़ा रहा आगे
1962 में जब चीन के साथ युद्ध शुरू हुआ तो पूरे देश में देशभक्ति का एक अलग ही जज्बा पैदा हुआ था। इसी जज्बे से प्रेरित होकर उन्होंने तिरंगा बनाने के काम को एक मिशन का रूप दिया। इससे उनकी शोहरत भी काफी बढ़ी। अब्दुल गफ्तार के गुजर जाने के बाद अब्दुल मलिक इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं।
मालिक ने बताया कि आपातकाल का दौर रहा हो या कारगिल युद्ध, अन्ना आंदोलन की ज्वाला हो या हर घर तिरंगा अभियान, ऐसे हर मौके पर देशभक्ति की अनुगूंज सदर बाजार के इस प्रांगण में सुनाई दी।
इस बार स्वतंत्रता संग्राम की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर अब तक 25-30 लाख तिरंगे की आपूर्ति वे कर चुके हैं। सदर बाजार में कुछ और दुकानों में भी तिरंगा बनाने का काम होता है। तिरंगा बनाने का काम करने वाले अन्य व्यापारी राजेश गुप्ता और इरशाद खान कहते हैं कि अगस्त का यह पखवाड़ा व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावना का उत्सव है।
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इस दौरान दुकानों के डिस्प्ले में तिरंगे, देशभक्ति के बैज, कलाई के रिबन और गाड़ियों के डैशबोर्ड फ्लैग ही छाए रहते हैं। उन्होंने बताया कि इन बड़ी संख्या में लोग इन सामग्री को खरीदने के लिए आ रहे हैं।