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    दिल्ली में जलभराव से निजात के लिए आरडब्ल्यूए ने सरकार को सौंपा एकीकृत ड्रेनेज प्लान का प्रस्ताव

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 06:47 AM (IST)

    दिल्ली आरडब्ल्यूएज ज्वाइंट फ्रंट ने राजधानी में जलभराव और सड़कों की बदहाली जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इसमें ड्रे ...और पढ़ें

    एकीकृत ड्रेनेज प्लान व साझा योजना से जलभराव की दिक्कतें दूर करने का प्रस्ताव।

    एकीकृत ड्रेनेज प्लान व साझा योजना से जलभराव की दिक्कतें दूर करने का प्रस्ताव।

    HighLights

    1. ड्रेनेज मास्टर प्लान और दिल्ली ड्रेन अथॉरिटी का सुझाव।

    2. मानसून से पहले सड़क, सीवर, ड्रेनेज कार्य पूरे हों।

    3. खोदाई के बाद सड़कों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की मांग।

    शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। बदइंतजामी के चलते वर्षा के बाद जलभराव, सड़कें धंसना और टूटे फुटपाथ जैसी समस्याएं आम हैं, जिससे कई बार लोगों की जान पर भी बन आती है। राजधानी में ऐसी चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए दिल्ली आरडब्ल्यूएज ज्वाइंट फ्रंट ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है।

    इसमें ड्रेनेज मास्टर प्लान और नालों के रखरखाव व निगरानी के लिए दिल्ली ड्रेन अथारिटी गठित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही मानसून से पहले समन्वित योजना बनाकर सड़क, सीवर, ड्रेनेज और सफाई से जुड़े कार्य पूरे करने की मांग उठाई है। शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए मानसून में संयुक्त कंट्रोल रूम बनाने की बात भी रखी है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित उपराज्यपाल, एमसीडी महापौर व कमिश्नर को यह प्रस्ताव भेजा गया है।आरडब्ल्यूए फ्रंट का कहना है कि वर्षा के दौरान सबसे अधिक परेशानी उन सड़कों पर होती है, जहां पाइपलाइन, सीवर, गैस, केबल या अन्य कार्यों की खोदाई के बाद ठीक से मरम्मत नहीं की जाती।

    आरडब्ल्यूए ने सुझाव दिया है कि नगर निगम, जल बोर्ड, आइजीएल, एमटीएनएल व अन्य एजेंसियां हर साल फरवरी-मार्च में मिलकर योजना बनाए और सड़क खोदाई का वार्षिक कैलेंडर तैयार करें। इसके बाद अप्रैल तक सभी कार्य एक साथ पूरे कर लिए जाएं। खोदाई के बाद सड़क और फुटपाथ को पहले जैसी स्थिति में बहाल करने की संबंधित एजेंसी की कानूनी जिम्मेदारी तय हो और लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की जाए।

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    एकीकृत ड्रेनेज प्लान बने, मानकों के अनुसार हो कार्य

    आरडब्ल्यूए फ्रंट ने सुझाया है कि दिल्ली के लिए एकीकृत ड्रेनेज मास्टर प्लान जल्द तैयार किया जाए। मानसून से पहले सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई कराई जाए और जल निकासी व्यवस्था का आडिट हो। कालोनियों की सड़कों की समयबद्ध कारपेटिंग हो और गड्ढों की मरम्मत सीआरआरआई के मानकों के अनुसार हो।

    सड़कों व फुटपाथों से अतिक्रमण हटाकर पैदल यात्रियों के लिए रास्ते सुरक्षित किए जाएं, ताकि वर्षा के दौरान जलभराव और आवागमन की परेशानी कम हो सके। इसके साथ ही हर वार्ड में स्थानीय स्तर पर ड्रेनेज और सड़क सुधार की योजना तैयार कर उसे समयबद्ध तरीके से लागू करने की भी मांग की गई है।

    लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय हो बेहद जरूरी

    आरडब्ल्यूए फ्रंट के महासचिव पंकज अग्रवाल का कहना है कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी मानसून में नागरिकों की परेशानी बढ़ाती है। इसलिए ड्रेनेज, सड़क, सीवर और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए साझा कार्ययोजना तैयार हो, एकीकृत मास्टर प्लान बनाकर समय पर काम पूरा हो और लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय हो बेहद जरूरी है। इसे लेकर सरकार को विस्तृत सुझाव भेजे गए हैं।

    प्रस्ताव के मुख्य बिंदु

    -सभी विभागों की संयुक्त मानसून कार्ययोजना बने।
    -संवेदनशील जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर स्थायी समाधान हो।
    -सड़क, सीवर, गैस,व टेलीकाम एजेंसियां मिलकर एक बार में खोदाई करें।
    -खोदाई के बाद समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से हो मरम्मत कार्य।
    -ड्रेन और सीवरेज के लिए बने एकीकृत मास्टर प्लान।
    -सभी बड़े-छोटे नालों की समय पर हो डी-सिल्टिंग।
    -मानसून से पहले टूटी सड़कों व फुटपाथों की हो मरम्मत।

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