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    IIT दिल्ली-AIIMS की उपलब्धि: दो मिनट में सुनने की जांच करने वाली स्वदेशी डिवाइस तैयार, बाजार में उतारने की तैयारी

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 06:40 AM (IST)

    आईआईटी दिल्ली और एम्स दिल्ली ने मिलकर एक स्वदेशी पोर्टेबल हियरिंग स्क्रीनिंग डिवाइस विकसित की है, जो सिर्फ दो मिनट में सुनने की क्षमता की जांच कर सकती ...और पढ़ें

    आईआईटी दिल्ली और एम्स दिल्ली ने मिलकर एक स्वदेशी पोर्टेबल हियरिंग स्क्रीनिंग डिवाइस विकसित की। (AI Generated Image)

    आईआईटी दिल्ली और एम्स दिल्ली ने मिलकर एक स्वदेशी पोर्टेबल हियरिंग स्क्रीनिंग डिवाइस विकसित की। (AI Generated Image)

    HighLights

    1. आईआईटी-एम्स ने बनाई स्वदेशी पोर्टेबल हियरिंग स्क्रीनिंग डिवाइस।

    2. यह डिवाइस दो मिनट में सुनने की क्षमता की जांच करती है।

    3. ग्रामीण क्षेत्रों और सीमित संसाधनों में उपयोग के लिए उपयुक्त।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कम सुनने की समस्या की शुरुआती पहचान अब पहले से कहीं अधिक आसान और सस्ती हो सकेगी। आइआइटी दिल्ली और एम्स दिल्ली ने मिलकर एक स्वदेशी पोर्टेबल हियरिंग स्क्रीनिंग डिवाइस विकसित की है। यह उपकरण महज दो मिनट में व्यक्ति की सुनने की क्षमता की शुरुआती जांच कर सकता है।

    खास बात यह है कि इसकी जांच के लिए साउंडप्रूफ कमरे की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे इसे ग्रामीण क्षेत्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और संसाधन सीमित अस्पतालों में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आईआईटी दिल्ली ने कदम बढ़ा दिए

    अब इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आईआईटी दिल्ली ने कदम बढ़ा दिए हैं। संस्थान की फाउंडेशन फार इनोवेशन एंड टेक्नोलाजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) ने इस डिवाइस के लाइसेंसिंग और व्यावसायीकरण के लिए उद्योगों, स्टार्टअप और चिकित्सा उपकरण निर्माताओं से एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किए हैं।

    इस डिवाइस में उन्नत नाइज रिजेक्शन एल्गोरिद्म का उपयोग किया गया है, जिससे सामान्य शोर वाले वातावरण में भी सटीक जांच संभव है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है, क्योंकि पारंपरिक हियरिंग टेस्ट के लिए अक्सर साउंडप्रूफ कमरे की जरूरत पड़ती है।

    60 से अधिक मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल किया गया

    शोधकर्ताओं के अनुसार, इस डिवाइस का 60 से अधिक मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल किया गया। परीक्षण के दौरान इसकी तुलना बाजार में उपलब्ध उपकरणों से की गई, जिसमें इस स्वदेशी तकनीक ने 97 प्रतिशत से अधिक संवेदनशीलता के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। इससे उम्मीद है कि यह सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों, अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों में बड़े पैमाने पर उपयोगी साबित होगी।

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    एफआइटीटी के अनुसार, चयनित उद्योग साझेदार डिवाइस के निर्माण, नियामकीय स्वीकृतियां, बाजार में उपलब्धता और बिक्री के बाद सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। तकनीक हस्तांतरण पांच वर्ष के गैर-विशिष्ट लाइसेंस के आधार पर होगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

    तकनीक हस्तांतरण शुल्क के साथ बिक्री पर तीन प्रतिशत रायल्टी देनी होगी

    इसके लिए तकनीक हस्तांतरण शुल्क के साथ बिक्री पर तीन प्रतिशत रायल्टी देनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती देने के साथ आयातित चिकित्सा उपकरणों पर निर्भरता कम करेगी और देश में सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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