दिल्ली में बनेंगे 20 लाख फ्लैट और मेट्रो स्टेशनों के पास TOD जोन, वर्टिकल डेवलपमेंट को लेकर DDA की बड़ी तैयारी
दिल्ली के सुनियोजित विकास के लिए 'मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047' को डीडीए बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। यह योजना ...और पढ़ें

लोकनिवास में डीडीए की बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते एलजी टी एस संधू। सौजन्य : लोकनिवास
HighLights
मास्टर प्लान 2047 को डीडीए बोर्ड ने दी मंजूरी
20 लाख नए फ्लैट बनाने का लक्ष्य, एफएआर में सुधार
लैंड पूलिंग, वर्टिकल ग्रोथ, यमुना पुनर्जीवन पर जोर
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी के सुनियोजित विकास के लिए बहुप्रतीक्षित ''मास्टर प्लान'' को लेकर जारी लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। बुधवार को एलजी व डीडीए अध्यक्ष टीएस संधु की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में ''मास्टर प्लान फार दिल्ली-2047'' को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई।
डीडीए अब इस अंतिम प्रस्ताव को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेजेगा, जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
इससे पहले डीडीए ने 28 फरवरी 2023 को ''मास्टर प्लान-2041'' को मंजूरी देकर केंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन कई समय-सीमाएं बीत जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसके क्षितिज वर्ष को बढ़ाकर 2047 करने पर विचार किया, ताकि इसे प्रधानमंत्री के ''विकसित भारत 2047'' के राष्ट्रीय विजन से पूरी तरह जोड़ा जा सके।
लैंड पूलिंग नीति के तहत 20 लाख नए फ्लैट बनाने का लक्ष्य
दिल्ली के भविष्य के विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए ''मास्टर प्लान 2047'' के तहत राजधानी में रिहाइश और बुनियादी ढांचे का बड़ा रोडमैप तैयार किया गया है। वर्ष 2047 तक दिल्ली की अनुमानित आबादी और उसकी रिहायशी जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 20 लाख नए फ्लैटों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में भी सुधार किया गया है। एफएआर 200 तक तो रखा ही जा सकता है, निर्धारित शुल्क का भुगतान कर इसे बढ़ाया भी जा सकेगा।
यमुना को बांटा जाएगा दो जोन में
मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में यमुना के पुनर्जीवन से जुड़ी विस्तृत योजना भी शामिल रहेगी। सबसे खास बात यह कि यमुना को दो जोन में बांटा जाएगा। एक जोन खाली रहेगा जबकि दूसरे जोन में मनोरंजक और आनंददायक गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी।
कम आबादी वाले क्षेत्रों में बन सकेंगे छोटे फार्म हाउस
मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट के अनुसार कम आबादी वाले क्षेत्रों में अब एक एकड़ क्षेत्र में फार्म हाउस बनाए जा सकेंगे। इसके लिए बिना किसी परेशानी अनुमति मिल जाएगी। यूईआर दो के आसपास 250 मीटर के दायरे में हाइराइज बिल्डिंग बन सकेंगी।
मास्टर प्लान 2047 के कुछ अन्य प्रमुख बिंदु
- लैंड पूलिंग नीति पर फोकस : बाहरी और ग्रामीण दिल्ली के क्षेत्रों (जैसे नरेला, नजफगढ़, बवाना आदि) में ''लैंड पूलिंग पॉलिसी'' को तेजी से लागू किया जाएगा। इसके तहत भू-स्वामियों की जमीनों को एक साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट विकसित होंगे।
- ऊंची इमारतें (वर्टिकल ग्रोथ) : दिल्ली में जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए अब क्षैतिज के बजाय वर्टिकल विकास यानी ऊंची इमारतों के निर्माण पर जोर दिया जाएगा, ताकि कम जमीन पर अधिक मकान बनाए जा सकें।
- जहां झुग्गी, वहीं मकान और अनधिकृत कालोनियां : मास्टर प्लान में अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ ''इन-सिटू'' पुनर्वास योजना के जरिए झुग्गी-झोपड़ियों की जगह पक्के मकान देने का प्रविधान शामिल है।
- ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) : मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख परिवहन गलियारों के आसपास उच्च घनत्व वाले रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र (टीओडी जोन) बनाए जाएंगे, ताकि लोगों को उनके कार्यस्थल और सार्वजनिक परिवहन के पास ही आवास उपलब्ध हो सके।
- स्मार्ट और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर : नए मकानों के साथ-साथ मजबूत सीवरेज नेटवर्क, ड्रेनेज सिस्टम, 24 घंटे बिजली-पानी की आपूर्ति और प्रदूषण नियंत्रण के लिए हरित क्षेत्र विकसित करने का पूरा खाका खींचा गया है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दिल्ली के लिए पहला मास्टर प्लान 1962 में दिल्ली विकास अधिनियम, 1957 के तहत लागू किया गया था। इसके बाद 2001 और 2021 के मास्टर प्लान जारी किए गए। ये योजनाएं 20 वर्षों की संभावित अवधि के लिए तैयार की गई थीं और राष्ट्रीय राजधानी के नियोजित विकास के लिए एक ढांचा प्रदान करती थीं।
