AIIMS समेत दिल्ली के अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टरों की कमी, बढ़ा ड्यूटी का बोझ और मरीजों को जोखिम
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सहित दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टरों की भारी कमी है। संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार ...और पढ़ें

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सहित दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टरों की भारी कमी है।
HighLights
एम्स सहित दिल्ली के अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टरों की भारी कमी।
डॉक्टर 24-48 घंटे लगातार ड्यूटी कर रहे, थकान-तनाव बढ़ा।
संसदीय समिति ने ड्यूटी घंटे विनियमन नीति की सिफारिश की।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली समेत राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टर्स की कमी और अत्यधिक कार्यभार गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
संसदीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति की हालिया 172वीं रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जूनियर और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों को अक्सर 24 से 36 घंटे और कई मामलों में 36 से 48 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है।
समिति ने स्पष्ट कहा है कि इतनी लंबी निरंतर ड्यूटी से डॉक्टर में थकान, मानसिक तनाव और निर्णय क्षमता में कमी आती है, जिससे क्लिनिकल त्रुटियों का खतरा बढ़ जाता है, जिसका मरीजों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। अकेले एम्स में ही 700 से अधिक रेजीडेंट डॉक्टर की कमी बनी हुई है।
इस बात को एम्स प्रबंधन ने भी स्वीकार किया है, उसका कहना है कि रेजीडेंट डॉक्टर की कमी हर कहीं हैं और एम्स भी इससे अछूता नहीं है।
फैकल्टी में भी पदों की कमी पर चिंता
संसदीय समिति की रिपोर्ट में एम्स में रेजीडेंट डॉक्टरों की कमी के साथ ही फैकल्टी के पदों की कमी को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। कहा है कि इस कमी के कारण डॉक्टर को लंबी और लगातार शिफ्ट करनी पड़ रही है, इमरजेंसी, आइसीयू और ओपीडी सेवाओं पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है, साथ ही बढ़ रहा है छोटी-छोटी क्लिनिकल गलतियों का जोखिम। जो गंभीर रूप लेता जा रहा है।
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में जोर देकर कहा है कि यदि ड्यूटी घंटों को तत्काल नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति और खतरनाक हो सकती है। इस संदर्भ में केंद्र सरकार को ‘क्लिनिकल ड्यूटी घंटे विनियमन नीति’ तुरंत लागू करने की सिफारिश की गई है, जिसमें अनिवार्य विश्राम अवधि, मानिटर्ड ड्यूटी रोस्टर और सख्त निगरानी व्यवस्था शामिल हो।
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समिति ने सिविल एविएशन जैसे सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा है कि जहां थकान नियंत्रण के कड़े नियम लागू हैं, वहीं मरीजों की जान से जुड़े चिकित्सा क्षेत्र में भी ऐसी ही सख्ती जरूरी है। इससे थकान से होने वाली चिकित्सकीय त्रुटियों को रोका जा सकेगा और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टरों की रिक्तियां
दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में रेजीडेंट डॉक्टरों की भारी कमी
| अस्पताल का नाम | रिक्त पद |
|---|---|
| एम्स (AIIMS) | 700+ |
| सफदरजंग अस्पताल | 476 |
| लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज | 268 |
| डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल | 199 |
| लोक नायक अस्पताल | 242 |
| गुरु तेग बहादुर अस्पताल | 205 |
| बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल | 178 |
| दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल | 162 |
| बुराड़ी अस्पताल | 122 |
| दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों में कुल रिक्तियां | 848 |
नोट: दिल्ली सरकार ने इन रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस बाबत् पूछे जाने पर एम्स जनसंपर्क कायार्लय ने रेजीडेंट डॉक्टर की कमी की बात को स्वीकार करते हुए कहाकि यह स्थिति हर कहीं बनी हुई है। कहाकि नई भर्तियों से कमी दूर करने की कोशिश हो रही है।