बिना इस्तेमाल ही जर्जर हो गए 24 हजार फ्लैट, JNNURM प्रोजेक्ट पर दिल्ली HC का सवाल- कौन है जिम्मेदार?
दिल्ली हाई कोर्ट ने जेएनएनयूआरएम के तहत बने फ्लैटों के रहने लायक न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ...और पढ़ें

फ्लैटों के जर्जर हो जाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई फटकार। फोटो: आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने JNNURM फ्लैटों की स्थिति पर नाराजगी जताई
2000 करोड़ खर्च के बावजूद फ्लैट रहने लायक नहीं
सार्वजनिक धन की बर्बादी पर अधिकारियों से जवाब मांगा
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (JNNURM) के तहत बने फ्लैटों की रहने लायक स्थिति न होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट पर दो हजार करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के कारण सार्वजनिक धन की बर्बादी हुई है, क्योंकि पहले बने मकान रहने लायक नहीं हैं और अब उन्हें विशेष मरम्मत की जरूरत है।
पीठ ने अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मकान बनने के बाद कब्जा न देने के लिए जिम्मेदार कौन है? पीठ ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डुसिब) को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर अधिकारी पहले से नहीं सोच सकते थे तो बनाया ही क्यों? क्या आप करदाताओं के 2,000 करोड़ की बर्बादी की अनुमति दे सकते हैं?
क्या अब फिर 2,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे?
पीठ ने यह भी कहा कि जेएनएनयूआरएम गरीबी दूर करने के लिए था। पीठ ने कहा कि दो हजार करोड़ रुपये की लागत से पहले 2008 से लेकर 2026 तक, घर बनाए गए और अधिकारी कह रहे हैं कि ये रहने लायक नहीं है। पीठ ने कहा कि अगर इन फ्लैटों की विशेष मरम्मत के लिए 2,000 करोड़ रुपये और चाहिए।
24,284 फ्लैटों की हालत पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने उक्त टिप्पणी डुसिब द्वारा एक याचिका पद दाखिल की गई स्थिति रिपोर्ट पर की। जिसमें कहा गया था कि जेएनएनयूआरएम के तहत बने 24,284 घरों की स्थिति अब रहने लायक नहीं है।
यह मामला एकल पीठ के निर्णय को चुनौती देने वाली रेस कोर्स इलाके में प्रधानमंत्री आवास के पास तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों की याचिका से जुड़ी हे।
निवासियों ने 11 मई के एकल पीठ के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा था कि उन्हें जगह खाली करने के बदले 45 किमी दूर सवदा घेवरा स्थानांतरित करने को कहा गया था।
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