दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मालाबार गोल्ड के खाते डी-फ्रीज करते हुए कहा-खाते फ्रीज करना व्यापार की आजादी पर हमला
दिल्ली हाईकोर्ट ने मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के फ्रीज किए गए बैंक खातों को तुरंत डी-फ्रीज करने का आदेश दिया ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। किसी भी व्यक्ति या कंपनी को आरोपित या संदिग्ध बनाए बिना उसके बैंक खाते को ब्लैंकेट तरीके से फ्रीज करना मनमाना है और यह जीविका के अधिकार व व्यापार करने की स्वतंत्रता के खिलाफ है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी करते हुए एसबीआई और एचडीएफसी बैंक में फ्रीज किए गए मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के खातों को तुरंत डी-फ्रीज करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि बिना किसी संलिप्तता के बैंक खाते फ्रीज करना निर्दोष संस्था के रोजमर्रा के कामकाज को ठप कर देता है, जिससे व्यापारिक साख को नुकसान और भारी आर्थिक क्षति होती है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है।
मामला गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले आइ4सी (इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर) से जुड़ा है। मालाबार गोल्ड की याचिका के मुताबिक, उसके एक ग्राहक के खिलाफ साइबर ठगी की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस के निर्देश पर कंपनी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए। मार्च 2025 तक करीब 80 लाख रुपये होल्ड कर लिए गए, जबकि कंपनी के खिलाफ न तो कोई शिकायत थी और न ही किसी तरह की मिलीभगत साबित हुई।
कोर्ट ने कहा कि बिना कारण बताए खातों को अनिश्चित काल तक फ्रीज रखना गलत है। इससे कर्मचारियों की सैलरी और रोजमर्रा के खर्च तक नहीं दिए जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जांच एजेंसियों के पास कंपनी की संलिप्तता का कोई ठोस सुबूत है, तो वे कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन बिना आधार कारोबार को ठप करना स्वीकार्य नहीं है।
मालाबार गोल्ड ने बताया कि उसने केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक कंपनी को सोने के बार और काइन बेचे थे। बाद में खरीदार के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज हुई, लेकिन इसके बावजूद मालाबार के खाते फ्रीज कर दिए गए।
