महिला फैकल्टी के टॉयलेट पर नहीं लगेगा ताला, जामिया प्रशासन को दिल्ली हाई कोर्ट का स्पष्ट निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया को महिला फैकल्टी के शौचालयों पर ताला न लगाने और सभी को निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने जामिया प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए।
HighLights
महिला फैकल्टी शौचालयों पर ताला लगाने पर रोक।
जामिया प्रशासन को निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश।
एक सप्ताह में नई व्यवस्था लागू करने का आश्वासन।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया में महिला फैकल्टी सदस्यों के लिए शौचालय सुविधाओं को लेकर चल रहे विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने जामिया प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी महिला फैकल्टी सदस्यों के लिए शौचालय की सुविधा बिना किसी बाधा के सुनिश्चित की जाए और किसी भी व्यक्ति को उस पर ताला लगाने या चाबी अपने पास रखने की अनुमति नहीं होगी।
ताला-चाबी व्यवस्था के खिलाफ हाई कोर्ट का कड़ा रुख
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने सीनियर प्रोफेसर सुजाता ऐश्वर्या की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता प्रोफेसर, जो 'सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज' में कार्यरत हैं, ने आरोप लगाया था कि विभाग के शौचालय पर ताला लगाकर चाबी केवल चुनिंदा कर्मचारियों को ही दी जाती थी। अदालत ने इस प्रथा को खत्म करते हुए शौचालय की चाबी व्यवस्था पर पूरी तरह से रोक लगा दी।
जामिया प्रशासन की प्रतिबद्धता और नए नियम
सुनवाई के दौरान जामिया प्रशासन ने अदालत में एक आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत किया और अपनी योजना स्पष्ट की...
प्रत्येक इमारत में सुविधा: हर इमारत की पहली मंजिल पर मौजूद एक शौचालय विशेष रूप से महिला स्टाफ के लिए आरक्षित रहेगा।
दूसरी मंजिल का शौचालय: याचिकाकर्ता के विभाग की दूसरी मंजिल पर स्थित शौचालय को केवल महिला फैकल्टी सदस्यों और दिव्यांग महिलाओं के लिए तय किया गया है।
समय सीमा: प्रशासन ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि यह व्यवस्था एक सप्ताह के भीतर लागू कर दी जाएगी।
दिव्यांग पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था: जामिया ने भरोसा दिलाया है कि दिव्यांग पुरुष कर्मचारियों और छात्रों के लिए अलग से शौचालय का इंतजाम किया जाएगा।
मामले का निपटारा
इससे पहले याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी कि आरक्षित होने के बावजूद दूसरी मंजिल के शौचालय का इस्तेमाल पुरुष और महिला दोनों कर रहे थे। अदालत ने जामिया प्रशासन के उस बयान को ऑन-रिकॉर्ड दर्ज किया, जिसमें कहा गया है कि यह शौचालय केवल महिलाओं के लिए ही रहेगा। इन सभी आश्वासनों और व्यवस्थाओं को देखने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
