दिल्ली के सरकारी स्कूलों में खुलेंगे हेरिटेज क्लब, बच्चे सीखेंगे शहर की विरासत का पाठ
दिल्ली सरकार के स्कूलों में अब हेरिटेज क्लब बनाए जाएंगे ताकि नई पीढ़ी को शहर की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा सके।

नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए दिल्ली सरकार के स्कूलों में अब हेरिटेज क्लब बनाए जाएंगे। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
दिल्ली सरकार के स्कूलों में हेरिटेज क्लब बनेंगे।
बच्चों को शहर की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत से जोड़ेंगे।
पायलट प्रोजेक्ट में 60 स्कूलों में शुरुआत होगी।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए दिल्ली सरकार के स्कूलों में अब हेरिटेज क्लब बनाए जाएंगे। कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के दिल्ली अभिलेखागार ने इस योजना को मंजूरी दे दी है। योजना को गत 27 अगस्त को दिल्ली राजपत्र में अधिसूचित कर दिया गया है और यह योजना राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी हो गई है।
योजना के तहत शुरुआती चरण में दिल्ली के सभी 12 शैक्षणिक जिलों के 60 सरकारी स्कूलों में हेरिटेज क्लब स्थापित किए जाएंगे। इसे पायलट परियोजना के तौर पर शुरू किया जाएगा। इसके परिणामों के आधार पर बाद में इसे दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में लागू करने की योजना है। क्लब से जुड़े नोडल अधिकारियों और शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
घर और स्कूल में विरासत संरक्षण के लिए भी जागरूक किया जाएगा
हेरिटेज क्लब में विद्यार्थियों को दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों, स्मारकों, कला, संस्कृति और स्थानीय विरासत से जोड़ने के लिए कई गतिविधियां कराई जाएंगी। इनमें शिल्प कला सीखना, संग्रहालयों का भ्रमण, विरासत स्थलों की यात्राएं, प्रश्नोत्तरी, प्रदर्शनियां, संगोष्ठियां और कहानी सुनाने के सत्र शामिल हैं। बच्चों को घर और स्कूल में विरासत संरक्षण के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
इसके अलावा विरासत रेडियो कार्यक्रम, ग्रामीण विरासत शिक्षा और कौशल विकास, विरासत उत्सवों में बच्चों की भागीदारी तथा संस्कृति और विरासत पर आधारित फिल्मों के निर्माण जैसी गतिविधियां भी योजना का हिस्सा हैं। बच्चों को स्मारकों, संग्रहालयों और अभिलेखागार के निर्देशित भ्रमण भी कराए जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय विरासत दिवस के अवसर पर विरासत मेले का आयोजन
योजना के तहत हर साल 18 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय विरासत दिवस के अवसर पर विरासत मेले का आयोजन किया जाएगा। इसके आसपास पूरे सप्ताह प्रदर्शनियां, संगोष्ठियां और प्रश्नोत्तरी आयोजित होंगी। विद्यार्थियों को वृत्तचित्र, मॉडल, प्रदर्शनी और शोधपत्र तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल बच्चों को इतिहास की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें स्थानीय विरासत के संरक्षण में भागीदार बनाना है। इसके लिए स्थानीय समुदायों, बुजुर्गों, विरासत विशेषज्ञों, संग्रहालयों और अभिलेखागार के साथ भी सहयोग किया जाएगा।
योजना की निगरानी के लिए एक समिति गठित होगी, जिसमें दिल्ली अभिलेखागार, शिक्षा निदेशालय तथा कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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