दिल्ली में 'यमदूत' बनीं जर्जर इमारतें, भवन हादसों में लगातार बढ़ रहा मौत का आंकड़ा
राजधानी दिल्ली में भवन गिरने से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है, जो खराब बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।

राजधानी में भवन हादसों में लगातार बढ़ रहा मौत का आंकड़ा। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
दिल्ली में भवन गिरने से होने वाली मौतें बढ़ीं।
अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही मुख्य कारण।
वोट बैंक की राजनीति भी जिम्मेदार, सुरक्षा अनदेखी।
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। सत्य निकेतन की घटना राजधानी सहित देश के अन्य शहरों की बदहाल बुनियादी संरचना और भ्रष्ट, लापरवाह प्रशासनिक व्यवस्था का उदाहरण है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण और प्रशासन की घोर लापरवाही मानव जीवन पर भारी पड़ रही है।
बिना किसी सुरक्षा जांच के इमारतों में बेसमेंट खोदना, पिलरों को कमजोर करना, नगर-निगमों द्वारा जर्जर इमारतों को समय पर खाली न कराना, बिल्डर-प्रशासन के भ्रष्ट गठजोड़ और वोट बैंक की राजनीति मासूम लोगों की जिंदगी दांव पर लगा रहा है।
2020 से 2024 के बीच देशभर कुल 7,874 लोगों की जान गई
एनसीआरबी की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया (एडीएसआई) रिपोर्ट के अनुसार देश में भवन ढहने के कारण प्रत्येक वर्ष सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। वर्ष 2020 से 2024 के बीच देशभर कुल 7,874 लोगों की जान चली गई। इसमें सबसे चिंताजनक स्थिति देश की राजधानी में इस तरह की घटनाओं में मौत के आंकड़ों का बढ़ना है।
पिछले कुछ वर्षों में देश में मकान ढहने से मरने वालों की संख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन देश की देश की राजधानी में यह बढ़ रही है। वर्ष 2020 में भवन ढहने से देश में 1514 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2024 में यह संख्या कम होकर 1479 दर्ज हुई। वहीं, दिल्ली में यह 25 से बढ़कर 42 हो गई है।
2024-2025 में 413 घटनाएं हुईं जिनमें 32 लोगों की जान गई
फायर सर्विस के अनुसार वर्ष 2024 -2025 में 413 घटनाएं हुईं जिनमें 32 लोगों की जान गई है। मुंबई में प्रत्येक वर्ष भवन गिरने से कई लोगों की जान चली जाती है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2024 में यहां 12 लोगों की मौत हुई थी। यानी दिल्ली की तुलना में यहां इस तरह के कम हादसे होते हैं।
एडीएसआई के आंकड़ों के अनुसार देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 में इस तरह की घटनाओं में सबसे अधिक 223 मौत हुई है। इसके बाद महाराष्ट्र में 220 लोगों की जान गई। दिल्ली 12 वें नंबर पर है, लेकिन प्रति 10 लाख में मौत की संख्या के हिसाब से वर्ष 2022, 2023 और 2024 में तीसरे नंबर पर है।
दिल्ली की इस स्थिति के लिए वोट बैंक की राजनीति भी जिम्मेदार
दिल्ली की इस स्थिति के लिए वोट बैंक की राजनीति भी जिम्मेदार है। अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई की जगह उन्हें संरक्षण दिया जाता है। इन घटनाओं से अवैध निर्माण को कानून वैध करने की प्रक्रिया पर भी प्रश्न खड़े होते हैं। अदालती चेतावनी को भी नजरअंदाज किया जाता है।
वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे लेकर चेतावनी देने के साथ ही वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया था। इसके बावजूद अवैध और असुरक्षित भवनों के विरुद्ध कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। राजधानी में सस्ते आवास की कमी के कारण छात्र, प्रवासी और गरीब परिवार इन असुरक्षित भवनों में रहने को मजबूर होते हैं।

