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दिल्ली में बदला इन्फ्लुएंजा वायरस का पैटर्न, इस साल H1N1 सबसे ज्यादा प्रभावी

Published: Sat, 22 Aug 2026 07:59 PM (IST)

दिल्ली में इस साल मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस का पैटर्न बदल गया है, जिसमें H1N1 वायरस H3N2 की जगह प्रमुख हो ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. दिल्ली में इस साल H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस प्रमुख।

  2. 20 अगस्त तक 1,777 H1N1 मामले दर्ज हुए।

  3. शुरुआती 48 घंटे में उपचार H1N1 के लिए महत्वपूर्ण।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में इस वर्ष मौसमी इन्फ्लुएंजा के वायरस का पैटर्न बदल गया है। पिछले वर्ष जहां एच3एन2 प्रमुख था, वहीं इस साल एच1एन1 तेजी से प्रभावी हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग के 20 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में इस वर्ष इन्फ्लुएंजा-ए के 2,392 मामले सामने आए हैं। इनमें 1,777 मामले एच1एन1 के हैं। इसके मुकाबले एच3 के 138 और एच1 के 37 मामले मिले हैं।

इस तरह एच1एन1 के मामले एच3 से करीब 13 गुना अधिक हैं। दिल्ली में 20 अगस्त को ही इन्फ्लुएंजा के 159 नए मामले सामने आए। इनमें इन्फ्लुएंजा-ए के 155 मामले थे। एक दिन में सामने आए मामलों में 114 एच1एन1 के थे।

यानी उस दिन सामने आए कुल इन्फ्लुएंजा मामलों में एच1एन1 के मामले करीब 72 प्रतिशत थे। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग लगातार इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस (आइएलआइ) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (एसएआरआइ) के मामलों की निगरानी कर रहा है।

इन्फ्लुएंजा-ए में एच1एन1 की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी

आंकड़ों के अनुसार, इन्फ्लुएंजा-ए के 2,392 मामलों में एच1एन1 के करीब 74 प्रतिशत है। एच3 के 138, एच1 के 37 और अन्य प्रकार के 440 हैं। इन्फ्लुएंजा-बी के 210 मामले हैं। 200 विक्टोरिया और 10 अन्य प्रकार के हैं।

इन्फ्लुएंजा-ए और बी को मिलाकर इस वर्ष अब तक इन्फ्लुएंजा के कुल 2,602 मामले दर्ज हो चुके हैं। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मौसमी इन्फ्लुएंजा का प्रभाव जनवरी से मार्च और दूसरा मानसून के बाद बढ़ता है।

आरंभिक 48 घंटे उपचार के लिए अहम

विशेषज्ञों के अनुसार एच1एन1 मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है। इसकी बढ़ोतरी को महामारी संकट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है।

लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने और बचाव के उपायों का पालन करने चाहिए। एम्स मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. नवल विक्रम की सलाह है कि एच1एन1 के लक्षण दिखाई देने पर आरंभिक स्तर पर ही उपचार शुरू करना अधिक प्रभावी रहता है।

बीमारी की शुरुआत के 48 घंटे के भीतर एंटीवायरल दवा देने से संक्रमण को नियंत्रित करने और इसके गंभीर रूप लेने का खतरा कम किया जा सकता है। मरीज देर से अस्पताल पहुंचता है तो भी उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए, विशेषकर जब बुखार लगातार बना हो, सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर शिकायतें हों।

स्पष्ट किया कि सामान्य वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं किया जाता, इन्हें बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका या पुष्टि होने पर डाक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

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