दिल्ली की अर्थव्यवस्था बढ़ी, लेकिन देश से पिछड़ी रफ्तार; 10 साल में राष्ट्रीय GDP में हिस्सेदारी 4% से घटकर 3.67%
दिल्ली की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, लेकिन 2024-25 में इसकी रफ्तार राष्ट्रीय औसत से धीमी रही, जिससे राष्ट्रीय जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी घटी है। कैग की ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से धीमी।
राष्ट्रीय जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी 4% से घटकर 3.67%।
बढ़ती सब्सिडी से पूंजीगत निवेश में भारी गिरावट दर्ज।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली की अर्थव्यवस्था आकार में लगातार बढ़ रही है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था की तुलना में 2024-25 में इसकी रफ्तार धीमी रही है।
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2024-25 की वित्त संबंधी रिपोर्ट में दिल्ली के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) और राष्ट्रीय जीडीपी में उसके योगदान में पिछले एक दशक के दौरान गिरावट की ओर संकेत किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 में दिल्ली का जीएसडीपी 12.15 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 9.17 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद राष्ट्रीय जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी 2015-16 के चार प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 3.67 प्रतिशत रही।
प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की रफ्तार सुस्त, राजस्व खर्च का बढ़ा दबाव
कैग ने इसे दिल्ली की आर्थिक वृद्धि के देश की तुलना में थोड़ा धीमा रहने का संकेत माना है। रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में दिल्ली की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी से 177.07 प्रतिशत अधिक थी, लेकिन 2024-25 में यह अंतर घटकर 135.34 प्रतिशत रह गया।
2015-25 के दौरान दिल्ली की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 6.39 प्रतिशत रही, जबकि देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी की वृद्धि दर 8.14 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार की वित्तीय स्थिति में राजस्व प्राप्तियों में 9.57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें जीएसटी समेत कर संग्रह की अहम भूमिका रही। हालांकि गैर-कर राजस्व में 11.04 प्रतिशत की गिरावट आई और केंद्र से मिलने वाले अनुदान में भी कमी हुई। कैग ने राजस्व खर्च के बढ़ते दबाव को लेकर भी चिंता जताई है।
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पूंजीगत निवेश पर भी दिखाई दिया असर
2015-25 के दौरान सब्सिडी में 3,222 करोड़ रुपये यानी 172.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसमें बिजली सब्सिडी का हिस्सा प्रमुख रहा, जो 2,033 करोड़ रुपये यानी 128.83 प्रतिशत बढ़ी। इसका असर पूंजीगत निवेश पर भी दिखाई दिया।
2023-24 में 6,855 करोड़ रुपये रहा पूंजीगत खर्च 2024-25 में घटकर 3,695 करोड़ रुपये रह गया। सड़कों, पुलों और सड़क परिवहन पर कम खर्च को इसके प्रमुख कारणों में गिनाया गया है।
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