Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पर्यटन-शिक्षा और आईटी बने नई ताकत, 25 साल में कैसी बदली उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था?

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 12:14 PM (IST)

    उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने 25 वर्षों में औद्योगिक विकास से पर्यटन, शिक्षा और आईटी की ओर रुख किया है। ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने राज्य गठन के 25 वर्षों में अपनी दिशा बदली है। शुरुआती वर्षों में औद्योगिक विकास और सिडकुल के जरिये निवेश व रोजगार बढ़ा, लेकिन अब पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आइटी और डिजिटल सेवाएं विकास के प्रमुख आधार बन गई हैं।

    अगले 25 वर्षों में तकनीक, स्थानीय उद्यमिता और हरित अर्थव्यवस्था राज्य की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह बात दून विश्वविद्यालय के प्रबंधन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. एचसी पुरोहित ने कही।

    ‘उत्तराखंड आर्थिक @25 और भविष्य की संभावनाएं’ विषय पर आयोजित आभासी व्याख्यान में उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 से 2010 के बीच औद्योगिक विस्तार और सिडकुल की स्थापना ने राज्य की अर्थव्यवस्था को गति दी। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन का विस्तार हुआ। वर्ष 2020 के बाद स्टार्टअप, आइटी, डिजिटल सेवाओं और हरित अर्थव्यवस्था को विकास के नए अवसरों के रूप में देखा जाने लगा।

    पर्यटन में हुए विस्तार को रेखांकित करते हुए प्रो. पुरोहित ने कहा कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड में करीब 1.11 करोड़ घरेलू पर्यटक आए थे, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर लगभग 5.46 करोड़ हो गई।

    उन्होंने कहा कि चारधाम के साथ वन्यजीव, साहसिक और प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देकर इसे स्थानीय रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की जरूरत है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में आय के नए साधन विकसित हो सकते हैं।

    शिक्षा को भी बदलती अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि 25 वर्षों में स्मार्ट कक्षाओं, आइसीटी और डिजिटल शिक्षा के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, बहुविषयक शिक्षा और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट जैसी व्यवस्थाएं आई हैं। अब शिक्षा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, शोध और उद्योग की जरूरतों से जोड़ना जरूरी है।

    पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उन्होंने बागवानी, जैविक खेती, स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर जोर दिया। महिला शिक्षा और आर्थिक भागीदारी को भी विकास के लिए अहम बताया।

    उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है। पर्यटन, आइटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्थानीय उद्यमिता को साथ लेकर चलना अगले 25 वर्षों के लिए टिकाऊ आर्थिक मॉडल तैयार कर सकता है।व्याख्यान का आयोजन श्री त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान की ओर से किया गया।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में जाम फ्री होगी चारधाम यात्रा, धामी सरकार का बड़ा कदम; यात्रा मार्गों पर तैयार होगा मजबूत पार्किंग नेटवर्क