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बकाया वेतन मांगने पर पूर्व कर्मचारी पर करवाया कुत्ते से हमला, कोर्ट ने माना दोषी; चेहरे और गले पर बुरी तरह से काटा

Updated: Wed, 28 Jan 2026 09:27 PM (IST)

मालवीय नगर में 2020 के एक मामले में, साकेत कोर्ट ने एक महिला को बकाया वेतन मांगने पर अपनी पूर्व कर्मचारी पर कुत्ते से हमला करवाने के लिए दोषी ठहराया ह ...और पढ़ें

बकाया वेतन मांगने पर कुत्ते से हमला करवाने के आरोप में कोर्ट ने माना गैर इरादतन हत्या का दोषी। प्रतीकात्मक तस्वीर

बकाया वेतन मांगने पर कुत्ते से हमला करवाने के आरोप में कोर्ट ने माना गैर इरादतन हत्या का दोषी। प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बकाया वेतन मांगने पर एक कर्मचारी पर उसकी मालकिन ने कुत्ते से हमला करवा दिया। साल 2020 के इस निर्दयी मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपित महिला को लापरवाही एवं गैर इरादतन हत्या के प्रयास के लिए दोषी करार दिया है।

धारा 509 के आरोपों से कर दिया बरी 

मालवीय नगर में वर्ष 2020 में कुत्ते के काटने से जुड़े एक मामले में साकेत की सत्र अदालत ने एक महिला को लापरवाही व गैर इरादतन हत्या के प्रयास के लिए महिला दोषी करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समर विशाल ने आरोपित रजनी सिंह को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) और 289 (पशुओं के प्रति लापरवाही) के तहत दोषी पाया, जबकि धारा 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य) के आरोप से बरी कर दिया।

चेहरे और गर्दन पर काटा था कुत्ते ने 

महिला के पालतू कुत्ते ने उसकी एक पूर्व कर्मचारी पर हमला कर दिया था, जिससे पीड़ित के चेहरे और गर्दन पर गंभीर और जानलेवा चोटें आई थीं। कोर्ट सजा की अवधि पर 31 जनवरी को जिरह सुनेगी। अदालत ने कहा कि कुत्ते के काटने से शिकायतकर्ता को गंभीर और जानलेवा चोटें आना, पीड़ित के निर्विवाद बयान और चिकित्सा साक्ष्यों से निःसंदेह सिद्ध हुई है। 11 जून, 2020 को शिकायतकर्ता सपना अपना बकाया वेतन लेने के लिए मालवीय नगर स्थित रजनी सिंह के आवास पर गई थी।

नहीं की कोई आर्थिक मदद

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि सपना द्वारा अनुचित मांग को ठुकराए जाने के बाद, रजनी सिंह ने जानबूझकर उसके पालतू कुत्ते को कमरे में छोड़ दिया था। इस पर कुत्ते ने हमला और पीड़िता का चेहरा स्थायी रूप से विकृत हो गया और उसके दो दांत टूट गए। पीड़िता को टीका लगवाना पड़ा, लेकिन अनुरोध करने पर भी रजनी सिंह ने चिकित्सा खर्चों में आर्थिक सहायता देने से इन्कार कर दिया था।

'दूसरे गवाहों के मुकरने से किसी की गवाही नहीं होती अविश्वसनीय'

अभियोजन पक्ष के बयान को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता का बयान स्पष्ट, तर्कसंगत और सुसंगत था और चिकित्सा साक्ष्यों द्वारा इसकी पुष्टि की गई थी। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता का बयान अधिक विश्वसनीय है, क्योंकि घटनास्थल पर उसकी उपस्थिति स्वाभाविक है और उसकी चोटें सत्यता को बयां करती हैं। 

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी एकमात्र गवाह का बयान केवल इसलिए अविश्वसनीय नहीं हो जाता क्योंकि अन्य गवाह मुकर गए हैं या अभियोजन पक्ष के बयान का समर्थन नहीं करते हैं।

अदालत ने कहा कि चिकित्सा बोर्ड ने पीड़िता के शरीर पर आठ चोटें पाईं, जिनमें दांतों में फ्रैक्चर और गर्दन पर एक गहरा घाव शामिल था। बोर्ड ने राय दी कि ये चोटें सामूहिक रूप से गंभीर और खतरनाक थीं और कुत्ते के हमले के अनुरूप थीं।

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