Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    साझा मंशा साबित होने पर हथियार इस्तेमाल जरूरी नहीं, कोर्ट ने हत्या के प्रयास के मामले में शख्स को दोषी ठहराया

    By Saurabh PandeyEdited By: Anup Tiwari
    Updated: Mon, 19 Jan 2026 08:35 PM (IST)

    कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2018 के एक लूट और हत्या के प्रयास मामले में सोना लाल उर्फ सोने लाल बैठा को दोषी ठहराया है। अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि सा ...और पढ़ें

    फाइल फोटो।

    फाइल फोटो।

    HighLights

    1. कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2018 लूट-हत्या प्रयास मामले में दोषी ठहराया।

    2. साझा मंशा पर हथियार उपयोग न करना भी अपराध सिद्ध।

    3. लूटे गए सामान की बरामदगी न होना केस कमजोर नहीं।

    जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट की एक अदालत ने वर्ष 2018 में प्रवासी कामगार से लूट और हत्या के प्रयास के मामले में एक आरोपित को दोषी करार दिया है।

    अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी अपराध में आरोपित की साझा मंशा साबित हो जाती है तो यह आवश्यक नहीं कि उसने स्वयं हथियार का इस्तेमाल किया हो।

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध कुमार सेठी की अदालत ने आरोपित सोना लाल उर्फ सोने लाल बैठा को हत्या का प्रयास और लूट के दौरान चोट पहुंचाने के आरोपों में दोषी ठहराया।

    यह भी पढ़ें- गणतंत्र दिवस समारोह में पार्किंग के लिए पहली बार होगा QR कोड सिस्टम, 22 जगहों पर 8000 वाहनों के लिए इंतजाम

    हथियार नहीं मिलना मामले को कमजोर नहीं करता

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लूटे गए सामान या वारदात में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी न होना अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दो लोगों की साझा मंशा के मामलों में यह साबित करना आवश्यक नहीं है कि आरोपित ने कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार किया हो।

    अभियोजन पक्ष द्वारा पेश साक्ष्य और परिस्थितियां यह दर्शाने के लिए पर्याप्त हैं कि आरोपित घटना में सक्रिय रूप से शामिल था। अभियोजन के अनुसार 20 जून 2018 को आरोपित अपने साथियों के साथ मिलकर आनंद विहार इलाके से पीड़ित मोहम्मद अफरोज को जबरन आटो रिक्शा में बैठाकर जीटीबी एन्क्लेव के एक सुनसान स्थान पर ले गया।

    अदालत ने मेडिकल साक्ष्यों का हवाला दिया

    वहां उससे नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान लूट लिया गया। लूट के दौरान अफरोज के पेट और गर्दन पर चाकू से वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    अदालत ने मेडिकल साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि पीड़ित के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर लगी चोटें सामान्य परिस्थितियों में जानलेवा हो सकती थीं, जिससे हत्या की मंशा स्पष्ट होती है।

    यह भी पढ़ें- 'आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस दिखाओ...', पोलैंड के विदेश मंत्री को जयशंकर की दो टूक

    खबरें और भी