'आतंकवाद पर दिखाओ जीरो टॉलरेंस...', पोलैंड के विदेश मंत्री को जयशंकर की दो टूक
जयशंकर ने पोलैंड के उप प्रधानमंत्री सिकोर्सकी से मुलाकात में यूक्रेन युद्ध पर भारत की आलोचना को अनुचित बताया। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी उ ...और पढ़ें

जयशंकर ने पोलैंड के दल के समक्ष सीमा पार आतंकवाद का मामला उठाया (फोटो: @DrSJaishankar)

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। यूक्रेन-रूस युद्ध के संबंध में यूरोपीय संघ के कई देश भारत की रूख की आलोचना करते हैं लेकिन इसमें पोलैंड सबसे ज्यादा आलोचना करता रहा है। पोलैंड के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री राडोस्लॉ सिकोर्सकी ने पिछले साल पाकिस्तान की यात्रा भी की थी और कश्मीर पर टिप्पणी भी की थी। माना जाता है कि उनकी यह यात्रा भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए किया गया था।
सिकोर्सकी अभी नई दिल्ली दौरे पर हैं और सोमवार को जब उनकी अपने अधिकारियों के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ आधिकारिक बैठक हुई तो भारतीय विदेश मंत्री ने अपनी बात खरी खरी उनके समक्ष रख दी। जयशंकर ने पहले यूक्रेन मामले में भारत पर लगाये गये आरोपों को अनुचित करार दिया साथ ही पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। साफ था कि भारत पोलैंड के साथ द्विपक्षीय संबंधों को लेकर गंभीर है और इसे आगे बढ़ाना चाहता है लेकिन अपने मूल हितों को लेकर वह हमेशा सतर्क रहता है।
द्विपक्षीय बैठक में बोले जयशंकर
द्विपक्षीय बैठक में जयशंकर ने कहा, 'हाल के महीनों में, न्यूयॉर्क (सितंबर) और पेरिस (जनवरी) में मैंने यूक्रेन संघर्ष और इसके प्रभावों पर अपनी राय स्पष्ट रूप से साझा की है। ऐसा करते हुए मैंने बार-बार यह भी रेखांकित किया है कि भारत पर चयनात्मक निशाना साधना दोनों ही तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है। मैं आज फिर से यही कह रहा हूं।'
यह टिप्पणी अमेरिका व यूरोपीय देशों द्वारा भारत की रूसी तेल खरीद पर लगाए गए टैरिफ और आलोचना के संदर्भ में आई है। जयशंकर ने पोलैंड के दल के समक्ष सीमा पार आतंकवाद का मामला उठाते हुए कहा कि, 'उप प्रधानमंत्री महोदय आप इस क्षेत्र के लिए अनजान नहीं है और आप इस क्षेत्र में सीमा पार आतंकवाद की समस्या को भी भली-भांति जानते हैं। पोलैंड को आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता दिखानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को ईंधन नहीं देना चाहिए।'
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पोलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य देश
पिछले वर्ष जब पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान स्थिति आतंकवादी संगठनों के ठिकानों पर ऑपरेशन सिंधु के तहत हमला किया था। उसके कुछ महीने बाद अक्टूबर, 2025 में पोलेंड के विदेश मंत्री ने इस्लामाबाद की यात्रा की जिसे पाकिस्तान सरकार ने कश्मीर मुद्दे पर अपने रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही स्वीकृति के तौर पर पेश किया। तब पाकिस्तान व पोलैंड की तरफ से जारी संयुक्त बयान में कश्मीर समस्या का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से और संयुक्त राष्ट्र के तहत कराने की बात कही गई थी।
पोलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य देश है, और भारत जल्द ही संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसकी घोषणा इसी महीने होने की संभावना है। पोलैंड के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा किया था, जिसमें 2024-28 का एक्शन प्लान और व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग की महत्वपूर्ण घोषणाएं शामिल थीं।