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सत्य निकेतन में हादसे के बगल वाली इमारत को गिराने का काम शुरू, दो दिन में MCD ने ध्वस्त किए 24 अवैध निर्माण

Published: Tue, 08 Sep 2026 09:38 PM (IST)

सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी ने दिल्ली में पीजी का सर्वे शुरू किया है। पहले दिन 1120 पीजी में से 52 खस्ताहाल मिले, जिनमें 20,431 छात्र रहते हैं।

सत्य निकेतन में हादसे वाली जगह के बगल वाली इमारत को गिराने का काम शुरू।

सत्य निकेतन में हादसे वाली जगह के बगल वाली इमारत को गिराने का काम शुरू।

HighLights

  1. सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी ने पीजी सर्वे शुरू किया।

  2. पहले दिन 1120 पीजी में से 52 खस्ताहाल मिले।

  3. अवैध निर्माणों पर एमसीडी की कार्रवाई तेज, 24 ध्वस्त।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई इमारत हादसे के बाद नगर निगम एक्शन मोड में आ गया है। हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर सतर्क हुई MCD ने बगल वाली इमारत को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एमसीडी के कमिश्नर संजीव खिरवार ने बताया था कि उस बिल्डिंग को गिराने का काम अगले एक या दो दिन में कर लिया जाएगा।

दो दिन में अकेले एमसीडी ने 24 अवैध निर्माण को अलग-अलग इलाकों में गिराया है। जबकि सात संपत्तियों को सील किया गया है। 35 संपत्तियों को अवैध निर्माण पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और छह को सीलिंग के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है। 27 अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।

वहीं, हादसे के बाद निशाने पर आए नगर निगम ने अब राजधानी में चल रहे सभी पीजी का सर्वे शुरू कर दिया है। पहले ही दिन एमसीडी की टीम को 52 पीजी खस्ताहाल हालत में मिले हैं। जबकि शेष पीजी की स्थिति देखने में सही मिली। फिलहाल जो पीजी सर्वे में शामिल किए जा रहे हैं, उनमें कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

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जर्जर हालत वाली इमारत को खाली कराया जाएगा

सिर्फ जिनकी हालत ठीक नहीं है या खस्ताहाल हैं, उन्हें मरम्मत कराने की सलाह दी जा रही है। कोई इमारत जर्जर स्थिति में मिलती है और उसे खाली कराया जाएगा।

कार्रवाई का निर्णय आगे लिया जाएगा ताकि एकदम से छात्रों के सामने छत का संकट न आए जाए। क्योंकि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि इन खाली कराए गए इमारतों में बच्चों को दूसरे सरकारी पीजी में स्थानांतरित किया जा सके। ऐसा करने से पीजी का किराया भी बढ़ जाएगा, जिससे छात्रों को ही असुविधा होगी।

चूंकि हाईकोर्ट ने दिल्ली में चल रहे पीजी की जानकारी मांगी है। इसलिए एमसीडी की टीम 12 जोन में सर्वे कर रही है। उन इलाकों में विशेषतौर पर जाकर सर्वे किए जा रहे हैं जो बड़े शैक्षणिक संस्थानों के नजदीक बसे हैं। - वरिष्ठ अधिकारी, एमसीडी

पहले दिन 1120 पीजी मिले हैं। इनमें 20,431 छात्र रह रहे हैं। सबसे ज्यादा 450 पीजी एमसीडी को सिविल लाइंस जोन में मिले हैं। इसी जोन में मुखर्जी नगर जैसा इलाका है, जो कि डीयू के नार्थ कैंपस के सबसे नजदीक है।

इसके साथ ही मुनिरिका से लेकर लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, राजेंद्र नगर, करोल बाग जैसे इलाकों में भी पीजी की जानकारी मिली है। अधिकारी ने आगे बताया कि फिलहाल सिर्फ इमारत की स्थिति का सर्वे हो रहा है। ढांचागत सुरक्षा और अग्मिश्मन से अनापत्ति प्रमाण पत्र की जांच के लिए अलग से सर्वे किया जाएगा।

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छोटे-छोटे कमरों में बेतरतीब तरीके से रह रहे हैं छात्र

एमसीडी की टीम को कई पीजी खराब स्थिति में मिले हैं। इनमें छोटे-छोटे कमरों में दो से तीन छात्र रह रहे हैं। मुखर्जी नगर, करोल बाग और ओल्ड राजेंद्र नगर में ज्यादातरर पीजी की यही हालत है। कई स्थानों पर पीजी के प्रवेश द्वार पर गंदगी हैं। मकड़ी के जाले लगे हुए हैं और कूड़ा तक सीढ़ियों के नीचे पड़ा हुआ।

कहीं पानी जमा होने से मच्छर पनपने का खतरा तक फैला हुआ है। इतना ही नहीं बिजली के मीटर तक प्रवेश द्वार पर लगे हुए हैं। ऐसे में आग लगने की स्थिति में इससे स्थिति और खतरनाक हो सकती है। एमसीडी की टीम को निरीक्षण के दौरान कमरों की दीवारों का प्लास्टर उखड़ा हुआ मिला, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है।

पीजी में बनी रसोई की हालत भी चिंताजनक मिली

पीजी में बनी रसोई की हालत भी चिंताजनक पाई गई। रसोई में गंदगी के साथ खाद्य सामग्री अस्वच्छ तरीके से रखी गई थी। कुछ इमारतें खतरनाक श्रेणी में पाईं गईं, जिन्हें निगम ने चिह्नित कर लिया है। नगर निगम के उपायुक्त अज़हरुद्दीन काजी ने कहा कि मानकों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई तय है। अवैध रूप से संचालित पीजी को सील करने और खतरनाक इमारतों को खाली कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी

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