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    दिल्ली में 60 पार होंगे प्रदूषण निगरानी स्टेशन, लेकिन क्या सिर्फ आंकड़े जुटाने से साफ होगी राजधानी की हवा?

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 05:40 AM (IST)

    दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति राजधानी में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों का विस्तार कर रही है, जिसका लक्ष्य 60 स्टेशन स्थापित करना है। हालांकि, विशेषज ...और पढ़ें

    दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति राजधानी में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों का विस्तार कर रही है। इमेज एआई

    दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति राजधानी में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों का विस्तार कर रही है। इमेज एआई

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के सटीक आंकड़े जुटाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) अपने निगरानी नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। वर्तमान में यहां पर 47 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) काम कर रहे हैं, जिनमें से 31 डीपीसीसी और 16 सीपीसीबी व आईएमडी जैसी अन्य एजेंसियों द्वारा संचालित हैं।

    छह नए निगरानी स्टेशन पिछले साल ही शुरू किए गए थे। 10 नए स्टेशनों का टेंडर मई में निकाला गया था लेकिन सफल न हुआ। अब 13 नए निगरानी स्टेशनों के लिए टेंडर निकाला गया है। इसके बाद इनकी संख्या 60 पार कर जाएगी। सरकार का लक्ष्य 25 वर्ग किमी के दायरे में कम से कम एक स्टेशन स्थापित करना है।

    हालांकि, पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल स्टेशनों की संख्या बढ़ाने और आंकड़े इकट्ठा करने से फेफड़ों में जाता धुआं कम नहीं होगा। सरकार और डीपीसीसी के पास यह जानकारी पहले से उपलब्ध है कि प्रदूषण कहां, कितना, क्यों और कैसे फैल रहा है। अब आवश्यकता केवल डेटा एकत्र करने की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कड़े नियमों, व्यावहारिक नीतियों और सख्त कार्रवाई की है।

    उनका कहना है कि नए स्टेशन और तकनीक केवल राह दिखा सकते हैं। जब तक इन आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण धूल और वाहनों के प्रदूषण पर सीधी कार्रवाई नहीं होगी, दिल्ली वालों को साफ हवा मिलना मुश्किल है।

    हाइपर-लोकल डेटा, उन्नत तकनीक और निगरानी में हो सुधार

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पूर्व अपर निदेशक डा एस के त्यागी के अनुसार, मौजूदा निगरानी नेटवर्क में व्यापक सुधार की जरूरत है। डेटा की विश्वसनीयता के लिए उपकरणों का नियमित अंशांकन (कैलिब्रेशन) और थर्ड-पार्टी डेटा आडिट भी अनिवार्य है। साथ ही, औद्योगिक हाटस्पाट की पहचान के लिए कम लागत वाले सेंसर आधारित सिस्टम से रीयल-टाइम हेल्थ एडवाइजरी दी जानी चाहिए।

    सटीक पूर्वानुमान और जमीनी क्रियान्वयन

    इंडियन पल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आइपीसीए) की उप निदेशक डा राधा गोयल का कहना है कि निगरानी स्टेशन केवल प्रदूषण के ट्रेंड को मापते हैं। जबकि प्रदूषण की जमीनी हकीकत, कचरा और बायोमास जलाने के मौसमी और क्षेत्रीय एपिसोड, जो सर्दियों के दौरान प्रदूषण को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, के कारण नियंत्रण उपायों की समय सीमा और प्रभावशीलता का कोई खास फायदा नहीं होता। इसलिए निगरानी स्टेशन बढ़ाने से बेहतर सटीक पूर्वानुमान और जमीनी क्रियान्वयन जरूरी है।

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    क्या कहता है नया टेंडर

    तकनीकी रूप से, नए 10-वर्षीय अनुबंध वाले स्वचालित केंद्रों में सीपीसीबी और अमेरिकी ईपीए मानकों के मल्टी-प्रदूषक एनालाइजर लगेंगे। ये पीएम 2.5, पीएम 10, सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, ओजोन, अमोनिया और बीटेक्स की वास्तविक समय में जांच करेंगे। इस हाइपर-लोकल डेटा से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) को पूरी दिल्ली में एक समान लागू करने के बजाय हाटस्पाट के हिसाब से लक्षित रूप से लागू किया जा सकेगा।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हर 25 किमी के दायरे में एक निगरानी स्टेशन होना चाहिए। दिल्ली की परिधि लगभग 1500 वर्ग किमी है।यानी कुल 60 निगरानी स्टेशन होने चाहिए। जल्द ही हम इस लक्ष्य को पूरा कर लेंगे। बेहतर निगरानी के साथ प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी बेहतर ढंग से काम हो सकेगा।

    -संदीप मिश्रा, सदस्य सचिव, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति

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