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    दिल्ली-NCR में औद्योगिक प्रदूषण पर CAQM की सख्ती, उद्योगों के लिए कड़े PM उत्सर्जन मानक लागू करने की तैयारी

    Updated: Sat, 21 Feb 2026 01:51 PM (IST)

    CAQM ने दिल्ली-एनसीआर में औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रित करने हेतु नए कड़े मानक प्रस्तावित किए हैं। उद्योगों से PM उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 mg/Nm³ तय की ...और पढ़ें

    CAQM ने दिल्ली-एनसीआर उद्योगों के लिए नए मानक प्रस्तावित किए। फोटो: सांकेतिक

    CAQM ने दिल्ली-एनसीआर उद्योगों के लिए नए मानक प्रस्तावित किए। फोटो: सांकेतिक

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    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण को और सख्त करने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने नया वैधानिक निर्देश जारी किया है। आयोग ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 mg/Nm³ तय करने का प्रस्ताव रखा है।

    उद्योगों से निकलने वाले धुएं पर कड़ा नियंत्रण

    आयोग के अनुसार औद्योगिक चिमनियों (स्टैक) से निकलने वाला धुआं एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ाने का बड़ा कारण है। इससे न केवल सीधे पीएम स्तर बढ़ते हैं बल्कि सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर भी बनता है, जिससे क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

    सीपीसीबी की तकनीकी समिति और आईआईटी कानपुर के अध्ययन के आधार पर आयोग ने माना है कि 50 mg/Nm³ का उत्सर्जन मानक तकनीकी रूप से संभव और पर्यावरण के लिए जरूरी है। इससे उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषक कणों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

    किन उद्योगों पर लागू होंगे नियम

    नए मानक निम्न श्रेणी के उद्योगों पर लागू होंगे:

    • सीपीसीबी द्वारा चिह्नित 17 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग।
    • रेड कैटेगरी (मध्यम और बड़े) उद्योग।
    • फूड एवं फूड प्रोसेसिंग यूनिट।
    • बॉयलर या थर्मिक फ्लूड हीटर वाले उद्योग।
    • टेक्सटाइल उद्योग।
    • भट्ठी (फर्नेस) संचालित धातु उद्योग।

    हालांकि जिन उद्योगों पर पहले से 50 mg/Nm³ से कम उत्सर्जन सीमा लागू है, उन पर यह नया मानक लागू नहीं होगा।

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    लागू होने की समयसीमा

    • मध्यम और बड़े उद्योगों पर: 1 अगस्त 2026 से
    • अन्य उद्योगों पर: 1 अक्टूबर 2026 से

    राज्यों और प्रदूषण बोर्डों को निर्देश

    आयोग ने दिल्ली सरकार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों तथा संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समयसीमा में नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही उद्योगों और हितधारकों को जागरूक करने के लिए व्यापक सूचना एवं जनजागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है।

    प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम

    सीएक्यूएम का मानना है कि नए उत्सर्जन मानक लागू होने से औद्योगिक प्रदूषण में कमी आएगी और दिल्ली-एनसीआर की समग्र वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को सीधे स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।

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