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    एनसीआर में धूल प्रदूषण पर लगाम: CAQM ने निर्माण कचरा प्रबंधन के लिए जारी किए कड़े नियम

    Updated: Sat, 21 Feb 2026 08:52 AM (IST)

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में धूल प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए सीएक्यूएम ने निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरे के प्रबंधन हेतु कड़े निर्देश जारी किए है ...और पढ़ें

    एनसीआर में धूल प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए सीएक्यूएम ने निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरे के प्रबंधन हेतु कड़े निर्देश जारी किए हैं। एआई जनरेटेड

    एनसीआर में धूल प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए सीएक्यूएम ने निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरे के प्रबंधन हेतु कड़े निर्देश जारी किए हैं। एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. नए नियम 1 अप्रैल 2026 से होंगे प्रभावी।

    2. प्रत्येक 5 किमी ग्रिड में कचरा संग्रहण केंद्र अनिवार्य।

    3. मलबे के परिवहन की जीपीएस ट्रैकिंग होगी।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ''वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग'' (CAQM) ने बड़ा कदम उठाया है। सीएक्यूएम नेनिर्माण और ध्वस्तीकरण कचरे के प्रबंधन के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य निर्माण और ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) परियोजनाओं से उड़ने वाली धूल को रोकना और मलबे के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।

    एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम

    यह निर्देश नए अधिसूचित पर्यावरण (निर्माण और ध्वस्तीकरण) अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2025 के अनुरूप हैं, जो एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे। आयोग ने पाया कि बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद, मलबे के रखरखाव और परिवहन में लापरवाही बरती जा रही है। इस कारण हवा में पीएम 10 और पीएम 2.5 का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ रहा है।

    नगर निकायों और प्रोजेक्ट बिल्डरों के लिए मुख्य दिशा-निर्देश

    आयोग ने दिल्ली और एनसीआर के नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को निम्नलिखित कड़े आदेश दिए हैं:-

    • संग्रहण केंद्रों की स्थापना : प्रत्येक पांच किमी x 5 किमी के ग्रिड क्षेत्र में कम से कम एक कचरा संग्रहण केंद्र होना अनिवार्य है।
    • नक्शा पास होने से पहले घोषणा : 200 वर्ग मीटर या उससे अधिक के प्लाट पर निर्माण या ध्वस्तीकरण करने से पहले बिल्डर को मलबे की अनुमानित मात्रा की घोषणा करनी होगी।
    • कचरा जमा करने की रसीद अनिवार्य : निर्माण शुरू करने से पहले बिल्डर को यह साबित करना होगा कि उन्होंने पुराना मलबा निर्धारित केंद्र पर जमा कर दिया है।
    • प्रमाण पत्र पर रोक : जब तक बिल्डर मलबे के सही निपटान की रसीद नहीं दिखाएगा, तब तक अधिकारी उसे ''पूर्णता प्रमाण पत्र'' (सीसी) या ''कब्जा प्रमाण पत्र'' जारी नहीं करेंगे।

    तकनीक का होगा इस्तेमाल

    एनसीआर की राज्य सरकारों और दिल्ली सरकार को एक एकीकृत ''वेब पोर्टल'' बनाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, मलबे के परिवहन की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकिंग और संग्रहण केंद्रों की जियो-टैगिंग की जाएगी ताकि कचरे को अवैध रूप से खुले में न फेंका जा सके।

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्माण स्थलों पर धूल शमन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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