पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी स्कूल भवन निर्माण में 25 पेड़ों की बाधा, सात साल से अटका काम
पूर्वी दिल्ली के गांधी को-एड सीनियर सेकेंडरी स्कूल का भवन निर्माण सात साल से 25 पेड़ों के कारण अटका है, जिससे हजारों छात्र सीलमपुर के एक स्कूल में भीड ...और पढ़ें

ब्रह्मपुरी रोड स्थित गांधी को-एड सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 25 पेड़ हट नहीं सके हैं।
HighLights
ब्रह्मपुरी स्कूल भवन निर्माण 7 साल से 25 पेड़ों के कारण रुका।
4000 छात्र सीलमपुर के स्कूल में भीड़भाड़ में पढ़ने को मजबूर।
बिल्डर अवैध रूप से पेड़ काट रहे, स्कूल के नहीं हट रहे।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। सात वर्ष के लंबे इंतजार के बाद भी ब्रह्मपुरी रोड स्थित गांधी को-एड सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 25 पेड़ हट नहीं सके हैं। पेड़ों की वजह से स्कूल भवन का निर्माण अटका हुआ है। कोई विभाग यह बताने को तैयार नहीं है कि अभी पेड़ को हटने में कितना समय लगेगा। स्कूल का भवन बन भी पाएगा या नहीं। स्कूल का यह मुद्दा कई बार दिल्ली विधानसभा में उठ चुका है। सरकारी विभाग शिक्षा को लेकर कितने गंभीर है, इस स्कूल की स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आंखे राह ताक रही है कि कब पेड़ हटेंगे और स्कूल का भवन बनेगा। फिर से इस स्कूल के भवन में बच्चे शिक्षा हासिल करेंगे। सात वर्ष पहले शिक्षा विभाग ने गांधी हरिजन स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सीलमपुर स्थित राजकीय सर्वाेदय विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया था।
इस स्कूल के करीब चार हजार विद्यार्थी सीलमपुर के स्कूल में पढ़ रहे हैं। राजकीय विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या दोगुनी चल रही है। आरोप है कि ठीक तरह से विद्यार्थी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि बैठने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं है। गांधी हरिजन स्कूल के भवन का निर्माण पीडब्ल्यूडी को करना है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूल में नीम, जामुन समेत कई प्रकार के 25 पेड़ हैं। इन पेड़ों का स्थानांतरित करने के लिए वन विभाग को फाइल भेजी हुई है। उन फाइल पर कोई फैसला नहीं हो सका है।
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सीलमपुर के विधायक चौधरी जुबैर अहमद ने कहा कि पीडब्ल्यूडी ने पहले जो नक्शा बनाया था, उसके अनुसार 60 से अधिक कमरे बनने थे। पेड़ों की वजह से दूसरा नक्शा बनाया गया है। उस नक्शे के हिसाब से 52 कमरे बिना पेड़ काटे बन सकते हैं। विधायक ने दावा कि वह स्कूल भवन के निर्माण को लेकर शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मिलेंगे।
वन विभाग की नाक के नीचे बिल्डिर धड़ल्ले से काट रहे हैं पेड़
स्कूल के भवन बनने में बाधा बन रहे पेड़ों को हटाने के लिए सरकारी रूप से अनुमति नहीं मिल रही है। उधर वन विभाग की नाक के नीचे बिल्डिर धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई करके मकान बना रहे हैं। आरोप है कि बिल्डिर वन विभाग, निगम व प्रशासन के अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके रातों रात पुराने पेड़ों को कटवा रहे हैं।
इसके लिए वह मोटी रिश्वत खर्च कर रहे हैं। पिछले सप्ताह पांचवा पुश्ता स्थित एक प्लाट में जामुन का पेड़ काटा गया था। पेड़ कटने के बाद यहां वन विभाग की टीम पहुंची, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह से मयूर विहार, खजूरी, आनंद विहार में पेड़ों की कटाई का काम चल रहा है।
स्थानीय लोगों का सवाल यह है कि बिल्डिर रकम देकर सरकारी विभागों के साथ मिलकर चोरी छिपे पेड़ काट सकते हैं। लेकिन स्कूल के भवन में सात वर्षों से बाधा बने पेड़ एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं हो सकते।