भारत को मिली नंबर-3 की स्वतंत्रता, भारतीय टीम ने श्रीलंका के विरुद्ध पहले दिन बनाए 288 रन
देवदत्त पडिक्कल पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट टीम में जगह बनाने की रेस में सबसे आगे थे लेकिन उनके आईपीएल में चोटिल होने के कारण करुण नायर के साथ साई सुदर्शन को मौका मिला गया।

भारतीय टीम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण गाल। समय सबसे बड़ा बलवान होता है... देवदत्त पडिक्कल पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट टीम में जगह बनाने की रेस में सबसे आगे थे लेकिन उनके आईपीएल में चोटिल होने के कारण करुण नायर के साथ साई सुदर्शन को मौका मिला गया।
इस बार साई सुदर्शन के चोटिल होने के कारण पडिक्कल श्रीलंका के विरुद्ध तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे स्वतंत्रता दिवस पर अपने करियर का पहला शतक मार दिया। वह स्वतंत्रता दिवस पर करियर का पहला टेस्ट शतक मारने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने।
इसी के साथ उन्होंने भारत के नंबर तीन बल्लेबाज के 20 टेस्ट मैचों के शतक मारने के इंतजार का भी प्रभावशाली तरीके से अंत किया। जब पडिक्कल ने अपना शतक पूरा किया तो दूसरे छोर पर कप्तान शुभमन गिल थे, जो इससे पहले नंबर तीन पर भारत के आखिरी शतकवीर थे। एक बड़े स्कोर की ओर बढ़ते दिख रहे यशस्वी जायसवाल 32 पर रन आउट हुए। वहीं केएल राहुल 77 रन पर बांह में ऐंठन के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए। भारत ने पहले दिन दो विकेट पर 288 रन बनाए।
टॉस जीतना महत्वपूर्ण
गिल ने कप्तान के तौर पर नौ टेस्ट में सिर्फ अपना तीसरा टॉस जीता। शुरुआत में श्रीलंकाई गेंदबाजों को नई गेंद से न कोई स्विंग मिली न सीम जिसका फायदा भारतीय बल्लेबाजों ने उठाया। दिन की शुरुआत में श्रीलंका के पास भारतीय बल्लेबाजों को आउट करने का एक ही तरीका था और यशस्वी जायसवाल उसी तरीके से आउट हुए।
राहुल ने पदार्पण कर रहे ऑफ स्पिनर केशर नुवांथा की गेंद को डीप मिड ऑन पर मारा और एक आसान सिंगल के लिए दौड़े। नुवांथा ने गेंद पकड़ने के लिए डाइव लगाई तो यशस्वी गिर गए। जायसवाल उठे और दौड़ पड़े लेकिन एक कदम बाद ही रुक गए। राहुल और यशस्वी दोनों ही एक साथ गेंदबाजी छोर पर आ गए। तीन साल बाद टीम में वापसी करने वाले विकेटकीपर निरोशन डिकवेला ने क्रिकेट भावना को साइड में रखते हुए यशस्वी को रन आउट कर दिया।
देवदत्त की वापसी
इससे पहले देवदत्त नवंबर 2024 में पर्थ की खतरनाक पिच पर खेले थे, जहां पर वह एक पारी में 23 गेंदों पर बिना खाता खोले आउट हुए और दूसरी पारी में 25 रन बनाए। इसके बाद उन्हें टेस्ट में वापसी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। साई की पैर की चोट ने उन्हें मोका दिया और उन्होंने गाल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में अपने पैरों का इस्तेमाल बेहतरीन तरीके से किया।
पडिक्कल के पास साई सुदर्शन के उलट क्रीज के अंदर से शॉट लगाने के ज्यादा आक्रामक विकल्प थे। उन्होंने श्रीलंकाई स्पिनरों को लय में आने से रोकने के लिए बीच-बीच में बड़े शाट भी खेले और स्वीप भी किया। उन्होंने आराम से 178 गेंदें खेलीं जिसमें 12 चौके और एक छक्का लगाया।
पडिक्कल की बल्लेबाजी वाकई दर्शनीय थी और उन्होंने नंबर तीन पर अपना दावा मजबूत कर दिया है। पडिक्कल की कर्नाटक टीम के साथी राहुल ने भी किंग ऑफ गाल कहे जाने वाले प्रभात जयसूर्या पर सीधा छक्का मारा। दोनों के बीच 150 रनों की साझेदारी हुई। भारतीय बल्लेबाज श्रीलंकाई स्पिनरों के विरुद्ध विशेष रणनीति बनाकर आए थे जिसका फायदा भी मिला।
चायकाल से पहले राहुल को हाथ में ऐंठन महसूस हुई। चायकाल के बाद राहुल ने फिर से खेलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बल्ला ठीक से पकड़ने में भी दिक्कत हो रही थी। उनके रिटायर्ड हर्ट होने के बाद कप्तान गिल उतरे।
उन्होंने जयसूर्या पर आक्रमण करने की योजना बनाई लेकिन फ्लाइट गेंद पर फंस गए और 16 रन पर डीप मिड आफ पर आउट हो गए। यह दिन का एकमात्र विकेट था जो किसी श्रीलंकाई गेंदबाज के खाते में आया। इसके बाद देवदत्त और रिषभ पंत ने कोई विकेट गिरने नहीं दिया।
स्पिनरों को मदद
पहले दिन कुछ गेंदों को स्पिन होते हुए देखा गया। अगर भारतीय बल्लेबाज दूसरे दिन बल्लेबाजी करते हैं और 500 से ज्यादा का स्कोर खड़ा कर लेते हैं तो आखिरी तीन दिन स्पिनरों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। ऐसे में भारतीय स्पिनरों के पास आखिरी तीन दिन में श्रीलंका के 20 विकेट चटकाने का भरपूर मौका होगा।

