MS Dhoni को आर्मी रैंक देने पर हिचकिचा रहे थे अधिकारी; बोले- मुझे शक था पर माही ने यूं बदली राय
MS Dhoni को भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का पद देने के फैसले पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया शुरुआत में सहमत नहीं थे। ...और पढ़ें
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MS Dhoni को आर्मी रैंक देने के फैसले से सहमत नहीं थे विनोद भाटिया
विनोद भाटिया ने अनसुना किस्सा बताया
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एमएस धोनी, एक ऐसा नाम, जिन्हें न सिर्फ भारत के सबसे सफल कप्तान, बल्कि एक सच्चा देशभक्त भी माना जाता है। अपने इंटरनेशनल करियर के दौरान धोनी ने कई बार देश को खुद से ऊपर रखा। उनकी कुर्बानी की कहानियां कई पूर्व साथी खिलाड़ी भी बता चुके हैं।
हाल ही में धोनी को लेकर एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है। आर्मी के रिटायर्ड अधिकारी विनोद भाटिया ने बताया कि शुरुआत में वो धोनी को आर्मी रैंक देने के फैसले से सहमत नहीं थे , लेकिन बाद में माही ने उनका नजरिया ही बदल दिया था।
Dhoni को आर्मी रैंक देने के फैसले से सहमत नहीं थे अधिकारी
दरअसल, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (Vinod Bhatia) ने एक पॉडकास्ट में बताया कि शुरुआत में वो धोनी MS Dhoni Honorary rank of Lieutant Colonel in Indian Territorial Army 2011) को ये सम्मान देने के पक्ष में नहीं थे। उन्हें लगता था कि बिना कठिन ट्रेनिंग के किसी आम नागरिक को पैराट्रूपर का सम्मान देना सही नहीं है।
उन्होंने बताया, "मरून बेरेट बहुत प्रतिष्ठित है, इसके लिए महीनों की कड़ी ट्रेनिंग और मुश्किल चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।"
भाटिया ने कहा, "उस समय हमारे चीफ जनरल वीके सिंह थे। उन्होंने फैसला लिया कि उस वक्त भारतीय टीम के कप्तान एमएस धोनी को मानद रैंक दी जाए। मैं थोड़ा हिचकिचा रहा था। मैरून बेरेट बहुत सम्मानजनक होती है। इसे पाने के लिए छह महीने की बेहद कठिन ट्रेनिंग करनी पड़ती है। इसमें सिर्फ 20 प्रतिशत लोग ही सफल होते हैं। ऐसे में बिना ट्रेनिंग के यह सम्मान देना सही नहीं लगा।"
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हालांकि बाद में धोनी ने अपने जज्बे से सबका दिल जीत लिया। भाटिया ने बताया कि धोनी ने सिर्फ नाम के लिए यह रैंक नहीं ली, बल्कि फौजी की जिम्मेदारी भी निभाई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सेना के साथ समय बिताया और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) तक गए।
भाटिया ने आगे कहा,
एमएस धोनी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है। मुझे उन पर गर्व है। लोग उन्हें कैप्टन कूल कहते हैं, लेकिन उनके अंदर जबरदस्त जुनून था। उन्होंने खुद माना था कि उन्हें ऊंचाई से डर लगता है, फिर भी उन्होंने पैराशूट जंप किया। उन्होंने सभी जंप पूरे किए और हमेशा वर्दी की इज्जत रखी। वह चलते भी सैनिक की तरह थे और उनका व्यवहार भी वैसा ही था। मुझे महसूस हुआ कि वह दिल से सच्चे सैनिक हैं।
विनोद भाटिया
The story behind how MS Dhoni earned the Maroon Beret 🇮🇳 🪖.
— MAHIYANK™ (@Mahiyank_78) April 21, 2026
"He went and Served in J&K with our soldiers , He went to the Border" pic.twitter.com/GXMM3cdeHX
गौरतलब है कि धोनी को 2011 में भारतीय प्रादेशिक सेना की 106 पैरा टीए बटालियन में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई थी। बाद में 2015 में उन्होंने पैराट्रूपर ट्रेनिंग पूरी कर प्रतिष्ठित ‘मरून बेरेट’ हासिल किया।
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