IPL 2026 से पहले MS Dhoni को बड़ी राहत, BCCI के एथिक्स ऑफिसर ने इन आरोपों से बरी किया
BCCI के एथिक्स ऑफिसर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ हितों के टकराव संबंधी प्रावधानों के कथित उल्लंघन के संबंध में दायर शिकायत क ...और पढ़ें
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IPL 2026 में नजर आएंगे धोनी।
HighLights
IPL 2026 की तैयारी में जुटे एमएस धोनी
28 मार्च से शुरू होगी इंडियन प्रीमियर लीग
चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा हैं धोनी
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के एथिक्स ऑफिसर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ हितों के टकराव संबंधी प्रावधानों के कथित उल्लंघन के संबंध में दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। फैसले में कहा गया है कि धोनी के इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में भाग लेने के संबंध में हितों के टकराव का कोई मामला साबित नहीं हुआ है। धोनी IPL में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हैं।
2017 में हुआ था समझौता
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि धोनी को मेसर्स आरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खोली गई क्रिकेट अकादमियों का मालिक माना जा सकता है, लेकिन यह समझौता 2017 में हुआ था, जो कि BCCI के हितों के टकराव संबंधी नियमों के सितंबर 2018 में लागू होने से पहले का समय था।
ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं
एथिक्स ऑफिसर ने पाया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह दर्शाता हो कि धोनी की खिलाड़ी के रूप में भागीदारी ने उन्हें "संस्थागत नियंत्रण या निर्णय लेने के अधिकार" की स्थिति में रखा था। इसके अलावा फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि अकादमी के स्वामित्व के संबंध में "पक्षपात, भेदभाव या तरजीही व्यवहार" का कोई उदाहरण सिद्ध नहीं हुआ।
सबूतों का अभाव
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि ऐसे सबूतों के अभाव में BCCI नियमों के तहत "केवल IPL खिलाड़ी के रूप में बने रहना, बिना प्रशासनिक भागीदारी के, हितों के टकराव की परिभाषा को पूरा नहीं कर सकता।" फरवरी 2024 में शिकायतकर्ता द्वारा दायर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि धोनी एक "वर्तमान खिलाड़ी" होने के नाते, साथ ही साथ "क्रिकेट अकादमी के ओनर" भी थे, जिससे नियम 38(4)(क) और नियम 38(4)(घ) का उल्लंघन हुआ।
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धोनी पर लगे थे ये आरोप
शिकायतकर्ता ने धोनी पर 2018 में नियमों में संशोधन के बाद नियम 38(2) और 38(5) के तहत अनिवार्य प्रकटीकरण दायित्वों को पूरा न करने का भी आरोप लगाया। हालांकि, एथिक्स ऑफिसर ने पाया कि अतिरिक्त प्रस्तुतियां व्यक्तिगत शिकायत और नियम 38 के दायरे से बाहर के आरोपों को दर्शाती हैं।
आदेश में कहा गया, "शिकायतकर्ता इस न्यायिक मंच पर किसी तीसरे पक्ष का पक्ष नहीं ले सकता। इससे भी बढ़कर शिकायतकर्ता का व्यक्तिगत हित है क्योंकि प्रतिवादी ने उसे नुकसान पहुंचाया है।"
समझौता 2017 में हुआ था
आदेश में आगे कहा गया, "एमएस धोनी को मेसर्स आरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खोली गई क्रिकेट अकादमियों का मालिक माना जा सकता है। हालांकि, समझौता 2017 में हुआ था, जबकि नियम सितंबर 2018 में लागू हुए थे। तथ्यों के आधार पर उस समय हितों का टकराव साबित नहीं हुआ है जब एमएस धोनी कप्तान/खिलाड़ी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।"
आदेश में कहा गया है कि उनके द्वारा पक्षपात का कोई आरोप नहीं है। इसलिए नियम 34(3) और 34(5) के तहत मौजूदा हित का खुलासा न करना महत्वहीन है। आदेश में कहा गया है, "शिकायतकर्ता और प्रतिवादी के बीच व्यावसायिक विवाद के साथ-साथ प्रतिवादी और मेसर्स आरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बीच विवाद का परिणाम है, जिसका पक्ष शिकायतकर्ता ने लिया है। यह विवाद 2020 की अवधि के संदर्भ में विलंबित है। शिकायतकर्ता ने प्रतिवादी के आईपीएल में खेलने के संबंध में हितों के टकराव का कोई मामला स्थापित नहीं किया है।" आदेश में आगे कहा गया है, "उपरोक्त चर्चा और निष्कर्षों के मद्देनजर, शिकायत खारिज की जाती है।"