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छत्तीसगढ़: झीरम घाटी हत्याकांड मामले में मुख्य माओवादी आरोपियों की सूची से बाहर, जांच पर उठे सवाल

Published: Sun, 06 Sep 2026 10:15 PM (IST)

छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी हमले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि मुख्य योजनाकार बताए गए ...और पढ़ें

झीरम घाटी हत्याकांड (सोशल मीडिया)

झीरम घाटी हत्याकांड (सोशल मीडिया)

HighLights

  1. झीरम घाटी हमले के मुख्य माओवादी आरोपितों की सूची से बाहर।

  2. NIA की जांच पर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल।

  3. आत्मसमर्पित माओवादियों से पूछताछ न होने पर प्रश्नचिह्न।

डिजिटल डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में हुए 13 वर्ष पुराने सबसे बड़े माओवादी हमले की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। हमले के मुख्य योजनाकार बताए गए तिमिरी तिरुपति उर्फ देवजी और प्रमुख कमांडर बारसे सुक्का उर्फ देवा एनआइए की वांछित सूची में शामिल रहे, लेकिन न्यायालय में इन पर मुकदमा नहीं चला।

11 आरोपियों माओवादियों के विरुद्ध सुनवाई हुई, जिनमें से एक की मृत्यु हो चुकी है। देवजी और देवा सहित कुछ वांछित माओवादी बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, फिर भी झीरम मामले में उनसे पूछताछ नहीं की गई। कांग्रेस ने इसे एनआईए की जांच की बड़ी कमी बताते हुए उच्च न्यायालय जाने के संकेत दिए हैं।

एनआईए ने वर्ष 2013 में झीरम हत्याकांड की जांच के दौरान 23 दिसंबर 2023 को प्रकाशित इश्तहार में 19 वांछित माओवादियों के नाम, फोटो और अन्य जानकारी दी गई थी। इसमें देवजी का नाम सबसे ऊपर था, जबकि बारसे सुक्का उर्फ देवा की जानकारी भी फोटो सहित दी गई थी। एनआइए ने उनकी गिरफ्तारी अथवा सूचना देने पर इनाम घोषित किया था।

ऐसे में आत्मसमर्पण के बाद भी इनसे पूछताछ न होने पर प्रश्न उठ रहे हैं।बैठक में तय हुआ था हमले का स्थानजांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, फरवरी 2013 में बीजापुर के पिड़िया में हुई बैठक में हमले की योजना बनी थी। मूल योजना मिनपा क्षेत्र में हमले की थी, जिसे बाद में दरभा क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद माओवादियों की सशस्त्र टुकड़ियों को दरभा भेजा गया। देवा दरभा डिवीजन कमेटी का सचिव रह चुका था और बाद में बटालियन-एक का कमांडर बना।

उसकी अगुआई में दरभा में हमला हुआ। इसी दौरान सुरेंद्र व अन्य माओवादियों ने कांग्रेस नेता नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेसी नेता महेंद्र कर्मा व पुलिस जवानों सहित 32 की हत्या कर दी थी।

छह न्यायिक जांच आयोगों में पांच की रिपोर्ट सरकार के पासराज्य में बड़ी माओवादी घटनाओं की जांच के लिए गठित छह न्यायिक जांच आयोगों में से पांच की रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है। झीरम घाटी जांच आयोग ने छह अक्टूबर 2021 को तत्कालीन राज्यपाल अनुसुईया उइके को 4,184 पृष्ठों की रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट 10 खंडों में है।

इसके अलावा सारकेगुड़ा, ताड़मेटला, एड़समेटा, श्यामगिरी और मदनवाड़ा कांड की न्यायिक जांच रिपोर्ट भी सरकार के पास है।कांग्रेस ने की नार्को जांच की मांगझीरम मामले के एनआइए के फैसले को कांग्रेस ने अधूरा न्याय बताया है। कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, गृह मंत्री ननकी राम कंवर, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी नक्सल और संदिग्ध आत्मसमर्पित माओवादियों की नार्को जांच की मांग की है।

वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को ध्यान भटकाने की राजनीति बताया है।झीरम का प्रमाण था तो एनआइए को क्यों नहीं दिया : सायपूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम कांड मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की जांच पर उठाए गए प्रश्नों का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा जवाब दिया है।

उन्होंने कहा कि यदि भूपेश बघेल के पास झीरम घाटी कांड से संबंधित कोई साक्ष्य था, तो उन्हें उसे एनआइए को सौंपना चाहिए था। भूपेश बघेल हमेशा यही कहते रहे हैं कि झीरम का प्रमाण उनकी जेब में हैं, फिर जांच एजेंसी को क्यों नहीं दिया।