छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास, जग्गी हत्याकांड में हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रामअवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सीबीआई की अपील स्व ...और पढ़ें

अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा व एक हजार रुपये का जुर्माना

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डिजिटल डेस्क. नई दिल्ली। एनसीपी के नेता स्व रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा व जस्टिस अरविंद वर्मा की डिवीजन बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई की अपील स्वीकार करने के साथ ही हत्याकांड के प्रमुख आरोपित पूर्व मुख्यमंत्री स्व अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा व एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
जुर्माने की राशि न पटाने पर छह महीने अतिरिक्त कठोर कारावास का आदेश दिया है। अमित जोगी को हाई कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
अलग-अलग दायर की थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई और स्व जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अलग-अलग याचिका दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को निर्देशित किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जग्गी हत्याकांड की फाइल रिओपन कर सुनवाई की जा रही है।
याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया है। सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से निवेदन किया कि राज्य ने 31 मई 2007 को आवेदन पेशकर निचली अदालत द्वारा पारित मुख्य आरोपित अमित जोगी को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी।
2007 के फैसले को दी थी चुनौती
उक्त आवेदन को इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 18 अगस्त 2011 को इस आधार पर खारिज कर दिया था। सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामले में राज्य द्वारा दायर अपील की अनुमति के लिए आवेदन स्वीकार्य नहीं है।
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सीबीआई ने याचिका दायर कर 31 मई 2007 के फैसले और आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की समन्वय पीठ ने 12 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा विलंब के आधार पर इसे खारिज कर दिया था। इसके अतिरिक्त अमित ऐश्वर्या जोगी की बरी होने को चुनौती देने के लिए पुनरीक्षण याचिका को आपराधिक अपील में परिवर्तित करने की मांग करते हुए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिका को भी 19 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था।
सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
18 अगस्त 2011, 12 सितंबर .2011 और 19 सितंबर 2011 के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छह नवंबर 2025 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में याचिका दायर करने में हुई देरी को क्षमा कर दिया है।