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    एसडीएम को मेडिकल प्रमाण पत्र की वैधता तय करने का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 02:30 AM (GMT+05:30)

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति पाने के आरोपित शिक्षक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण चलाने के आदेश पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने एसडीएम के आदेश पर रोक लगाई।

    2. विकलांगता प्रमाण पत्र की जांच मेडिकल बोर्ड का अधिकार।

    3. एसडीएम को वैधता तय करने का कोई अधिकार नहीं।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति पाने के आरोपित शिक्षक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण चलाने के आदेश पर रोक लगा दी है।

    सिंगल बेंच ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि विकलांगता प्रमाण पत्र की वैधता की जांच और प्रमाणिकता का अधिकार केवल चिकित्सा बोर्ड को है, जबकि एसडीएम को इस मामले में कोई अधिकार नहीं है।

    न्यायाधीश ने क्या कहा?

    जस्टिस एके प्रसाद ने कहा कि राजस्व अधिकारी के पास जिला चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी प्रमाण पत्रों की वैधता का निर्णय करने का न तो अधिकार है और न ही चिकित्सा विशेषज्ञता।

    क्या है मामला?

    महासमुंद जिले के सहायक शिक्षक लखन बिहारी पटेल को 2010 में विकलांग श्रेणी में नियुक्त किया गया था, मेडिकल बोर्ड ने उन्हें 45.4 प्रतिशत श्रवण बाधित प्रमाणित किया था। आरोपित के भाई ने दिसंबर 2017 में पारिवारिक भूमि विवाद के चलते विकलांगता प्रमाण पत्र में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।

    इस शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने एसडीएम (राजस्व) को जांच का निर्देश दिया। एसडीएम ने 13 अगस्त 2020 को एक आदेश पारित किया, जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा धोखाधड़ी से प्रमाण पत्र प्राप्त करने का दावा किया गया और आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसडीएम के दृष्टिकोण में कई कानूनी खामियां पाईं और कहा कि राजस्व अधिकारी विकलांगता का सत्यापन करने में सक्षम नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि समय के साथ विकलांगता में बदलाव और स्थिति में सुधार, पूर्व में हुई जालसाजी का प्रमाण नहीं है।

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