अंबानी की Jio Credit पर बड़ा विदेशी दांव, ₹18268 करोड़ के भारी निवेश से बैंक ऑफ अमेरिका को मिलेगा 49.9% स्टेक
बैंक ऑफ अमेरिका जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की एनबीएफसी सब्सिडियरी जियो क्रेडिट लिमिटेड में ₹18,268 करोड़ का निवेश करेगा। इस समझौते के तहत BofA को जियो क्रेडिट में 49.9% तक की हिस्सेदारी मिलेगी, जिससे दोनों कंपनियां मिलकर डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार करेंगी।

बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में ₹18,268 करोड़ का निवेश करेगा।
HighLights
बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में ₹18,268 करोड़ का निवेश करेगा।
BofA को जियो क्रेडिट में 49.9% तक की हिस्सेदारी मिलेगी।
यह साझेदारी डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार करेगी।
नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की कंपनी से बड़ी खबर सामने आई है। यह खबर जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की NBFC (नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनी) लेंडिंग सब्सिडियरी, Jio Credit Limited को है। अंबानी की इस कंपनी में बैंक ऑफ अमेरिका भारी भरकम निवेश करने जा रहा है। कंपनी ने जानकारी दी कि जियो क्रेडिट लिमिटेड में बैंक ऑफ अमेरिका ₹18268.22 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।
Jio Financial Services Limited ने एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दि कि उसने और Bank of America Corporation (BofA) ने एक पक्का समझौता किया है। इसके तहत, BofA इक्विटी शेयरों और वारंट के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए JFSL की पूरी तरह से अपनी NBFC (नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनी) लेंडिंग सब्सिडियरी, Jio Credit Limited (JCL) में जॉइंट वेंचर पार्टनर के तौर पर 49.9% तक की हिस्सेदारी खरीदेगा।
JCL ने दो साल में हासिल किया ₹30,667 करोड़ AUM
मुकेश अंबानी की जियो फाइनेंशियल ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि यह वेंचर JFSL की डिजिटल पहुंच और भारतीय बाजार की जानकारी को BofA की ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस की विशेषज्ञता के साथ मिलाएगा। दोनों कंपनियों का एक ही मकसद है - बेहतरीन डिजिटल एक्सेस, इनोवेशन, क्रेडिट तक पहुंच और मजबूत रिस्क मैनेजमेंट के जरिए ग्राहकों की फाइनेंशियल जिंदगी को बेहतर बनाना।
JCL भारत की तेजी से बढ़ने वाली NBFCs में से एक है, जिसने काम शुरू करने के सिर्फ दो साल के अंदर, 30 जून 2026 तक ₹30,667 करोड़ (~$3.2 बिलियन USD) का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बनाया है।
कंपनी ने बताया कि यह डिजिटल-फर्स्ट लेंडर अपने अलग-अलग तरह के लेंडिंग प्रोडक्ट्स के जरिए पारंपरिक फाइनेंस और आधुनिक एक्सेसिबिलिटी के बीच की दूरी को कम करने पर ध्यान दे रहा है। साथ ही, इसकी योजना भारत में मौजूदा और नए प्रोडक्ट्स के जरिए लोन लेने के मौके देकर अपनी ग्रोथ को जिम्मेदारी से जारी रखने की है।
बैंक ऑफ अमेरिका को मिल सकती है इतनी हिस्सेदारी
₹18,268 करोड़ (~$1.9 बिलियन USD) तक का निवेश इक्विटी शेयरों और वारंट के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए किया जाएगा। इस ट्रांजैक्शन से शुरुआत में JCL में बैंक ऑफ अमेरिका को 26.5% इक्विटी हिस्सेदारी मिलेगी, जो वारंट के इस्तेमाल पर 49.9% तक बढ़ सकती है। यह ट्रांजैक्शन रेगुलेटरी और कानूनी मंजूरी पर निर्भर है।
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