अनिल अंबानी और उनकी कंपनी को केनरा बैंक ने दिया बड़ा झटका, घोषित किया 'विलफुल डिफॉल्टर'; लगा ये आरोप
अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को केनरा बैंक ने 'विलफुल डिफॉल्टर' घोषित किया है। बैंक ने फंड के ...और पढ़ें

केनरा बैंक ने अनिल अंबानी, RCOM को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया।
HighLights
केनरा बैंक ने अनिल अंबानी, RCOM को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया।
बैंक ने फंड के दुरुपयोग और डायवर्जन का आरोप लगाया।
RCOM ने दिवाला प्रक्रिया के तहत सुरक्षा का दावा किया।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत के दिग्गज अरबपति मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी को फिरसे बड़ा झटका लगा है। अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केनरा बैंक ने अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस की सहायक कंपनी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) को 'विलफुल डिफॉल्टर' घोषित कर दिया है।
विलफुल डिफॉल्टर का मतलब है यह होता है कि वह व्यक्ति या कंपनी जिसके पास लोन चुकाने हेतु संपत्ति या पैसा है लेकिन वह जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर केनरा बैंक ने किस मामले में अनिल अंबानी और उनकी कंपनी को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है।
केनरा बैंक ने अनिल अंबानी और उनकी कंपनी को क्यों घोषित किया डिफॉल्टर
अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 8 सितंबर 2026 को इसकी जानकारी एक्सचेंज फाइलिंग में दी। फाइलिंग के अनुसार केनरा बैंक की 'विलफुल डिफॉल्टर रिव्यू कमेटी' ने 31 अगस्त 2026 को हुई अपनी बैठक में यह फैसला लिया। बैंक ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी ने बैंक से लिए गए फंड का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जिसके लिए कर्ज लिया गया था।
केनरा बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस ग्रुप की कंपनियों (RCOM, RTL और RITL) ने बैंकों से कुल 31,580 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। बैंक ने जांच में निम्नलिखित विसंगतियां पाईं:
बैंक का आरोप है कि इन निवेशों को तुरंत भुनाकर संबंधित और गैर-संबंधित पक्षों को भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, 'नेटिजन' (Netizen) नामक एक इकाई के साथ संदिग्ध लेनदेन के जरिए फंड को डायवर्ट करने की बात भी सामने आई है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस ने क्या कहा?
रिलायंस कम्युनिकेशंस ने स्पष्ट किया है कि RCOM और RTL दोनों वर्तमान में कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के अधीन हैं। कंपनी का कहना है कि यह मामला दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले की अवधि का है। लेनदारों की समिति (CoC) ने पहले ही समाधान योजनाओं को मंजूरी दे दी है, जो अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पास लंबित हैं। कंपनी को दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) की धारा 32A के तहत सुरक्षा प्राप्त है, जो समाधान योजना की मंजूरी के बाद पिछले अपराधों के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है।
कंपनी ने यह भी बताया कि वह इस घटनाक्रम के संबंध में कानूनी सलाह ले रही है। अनिल अंबानी ने 15 नवंबर 2019 से ही RCOM के चेयरमैन और निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।
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