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बढ़ गई EMI की टेंशन? इन 4 स्मार्ट तरीकों से कम करें लोन का बोझ, बचेगा लाखों का भारी-भरकम ब्याज!

Published: Thu, 08 Oct 2026 07:32 AM (IST)

आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% कर दिया है, जिससे होम, कार और पर्सनल लोन ...और पढ़ें

बढ़ गई EMI की टेंशन? इन 4 स्मार्ट तरीकों से कम करें लोन का बोझ, बचेगा लाखों का भारी-भरकम ब्याज

बढ़ गई EMI की टेंशन? इन 4 स्मार्ट तरीकों से कम करें लोन का बोझ, बचेगा लाखों का भारी-भरकम ब्याज

HighLights

  1. EMI की रकम थोड़ी बढ़ाकर लोन अवधि तय रखें।

  2. हर साल 5% अतिरिक्त प्री-पेमेंट से ब्याज बचाएं।

  3. होम लोन ओवरड्राफ्ट से ब्याज दर कम करें।

  4. बेहतर सिबिल स्कोर पर लोन दूसरे बैंक में ट्रांसफर करें।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आरबीआई ने बुधवार 7 अक्टूबर को रेपो रेट (Repo Rate Hike) में 0.25% (25 bps) का इजाफा करके इसे 5.5% कर दिया। इस बढ़ोतरी के बाद अब होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे (Loan Interest Hike) होंगे। ऐसे में अगर आप भी अपनी जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करना चाहते हैं, तो ये खबर आपके लिए है। इस खबर में आपको बताएंगे कि कैसे आप कर्ज के बोझ से बच सकते हैं।

कैसे कम हो सकती है EMI?

आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाने के बाद जाहिर सी बात है कि ईएमआई में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे जेब पर एक्सट्रा खर्च बढ़ेगा। ऐसे में आप नीचे दिए गए 4 तरीकों से ईएमआई कम कर सकते हैं:

1. EMI की रकम में थोड़ी सी बढ़ोतरी करें

जब भी रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंक अक्सर ग्राहकों की मंथली ईएमआई उतरी ही रखते हुए लोन का टेन्योर 1 से 2 साल बढ़ा देते हैं। ये तरीका कर्जदार के लिए सबसे महंगा साबित होता है। ऐसे में आप बैंक से लोन अवधि बढ़वाने के बजाय, अपनी मंथील EMI की रकम को थोड़ा बढ़ा सकते हैं। इससे आपका लोन तय समय पर खत्म होगा और आप लाखों का ब्याज देने से बच जाएंगे।

2. प्री-पेमेंट का ऑप्शन करेगा मदद

अगर आपके पास फेस्टिव बोनस, पीपीएफ या किसी और तरह की एक्स्ट्रा सेविंग्स मौजूद हैं, तो उसका इस्तेमाल लोन का मूलधन चुकाने के लिए किया जा सकता है। हर साल अपने कुल लोन बैलेंस का सिर्फ 5% एक्स्ट्रा प्री-पेमेंट करने से ब्याज दर में हुई 0.25% की बढ़ोतरी का असर पूरी तरह खत्म हो जाता है। इससे 20 साल का लोन 13 से 14 साल में ही चुकता हो सकता है और भारी-भरकम ब्याज की बचत होती है।

3. होम लोन ओवरड्राफ्ट का करें इस्तेमाल

अगर आप अपने इमरजेंसी फंड या कैश को सुरक्षित रखते हुए ब्याज कम करना चाहते हैं, तो अपने मौजूदा होम लोन को ओवरड्राफ्ट खाते में बदलवा सकते हैं। इसमें लोन से जुड़ा एक करेंट या सेविंग अकाउंट खुल जाता है, जिसमें आप अपनी अतिरिक्त रकम (जैसे 5 से 8 लाख रुपये) कुछ महीनों के लिए रख सकते हैं। बैंक कुल बकाए में से इस जमा रकम को घटाकर बाकी बचे बैलेंस पर ही ब्याज वसूलता है। सबसे अच्छी बात ये है कि जरूरत पड़ने पर आप इस पैसे को कभी भी निकाल सकते हैं।

4. बैंक ट्रांसफर और स्प्रेड नेगोशिएशन

अगर लोन लेने के बाद आपका सिबिल स्कोर सुधरकर 780 या 800 प्वाइंट से ऊपर पहुंच गया है और आपकी इनकम भी बढ़ गई है, तो आपके पास मोलभाव करने का बढ़िया मौके होता है। आप अपने बैंक से अपना स्प्रेड (ब्याज दर का अंतर) घटाने की मांग करें। अगर बैंक राजी न हो, तो कम ब्याज दर देने वाले दूसरे बैंक में अपना लोन ट्रांसफर करवा सकते हैं। बड़े लोन अमाउंट पर 0.25% से 0.50% की ये बचत आपको लाखों का फायदा दे सकती है।

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