RBI MPC Meeting 2026: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, ₹50 लाख के Home Loan पर कितनी महंगी हो जाएगी EMI?
RBI MPC Meeting LIVE: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की दरें तय करने वाली समिति ने रेपो रेट बढ़ाने का सिलसिला शुरू करते हुए दर को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.25% से 5.50% कर दिया।

RBI MPC Meeting Live
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। RBI MPC Meeting Live: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की दरें तय करने वाली समिति ने रेपो रेट बढ़ाने का सिलसिला शुरू करते हुए दर को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.25% से 5.50% कर दिया। यह बढ़ोतरी 3 साल बाद हुई है। इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट में बढ़ोतरी हुई थी।
भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 5 अक्टूबर को शुरू हुई थी और आज यह फैसलों की घोषणा के साथ समाप्त होगी।
| RBI MPC का फैसला | विवरण |
| रेपो रेट | 25 bps बढ़ाकर 5.50% किया |
| पिछला रेपो रेट | 5.25% |
| पिछली बार रेट में बढ़ोतरी | फरवरी 2023 |
| पॉलिसी का रुख | 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदला |
| पिछला रुख | 'न्यूट्रल' |
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि MPC ने वेस्ट एशिया में तनाव और महंगाई की चिंताओं के बीच रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.5% करने के पक्ष में वोट किया है।
उन्होंने कहा, "बदलते मैक्रो-इकोनॉमिक और फाइनेंशियल हालात, घटनाक्रम और भविष्य के अनुमानों का विस्तार से आकलन करने के बाद, MPC ने सर्वसम्मति से LAF के तहत पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50% करने का फैसला किया। इसके परिणामस्वरूप, SDF रेट को एडजस्ट करके 5.25% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को 5.75% कर दिया गया है।"
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मजबूत विकास और बढ़ती कीमतों के दबाव को दर्शाता है GDP का अनुमान
कोटक महिंद्रा एएमसी (डेट) के सीआईओ दीपक अग्रवाल के अनुसार, आरबीआई की एमपीसी (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया है, जो कि बाजार की उम्मीदों के मुताबिक है क्योंकि अब महंगाई दर कम नहीं रही है। नीतिगत रुख को 'तटस्थ' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया गया है, जिससे यह कड़ा संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है और आगे भी सख्ती जारी रह सकती है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया गया है, जबकि जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है, जो मजबूत विकास और बढ़ती कीमतों के दबाव को दर्शाता है। इस घोषणा के बाद बॉन्ड बाजार में मंदी का रुख रहा और जी-सिक (G-Sec) यील्ड 5-6 बेसिस पॉइंट बढ़कर लगभग 7.25% पर कारोबार कर रही है।
अब नया लोन लेने से सोचेंगे ग्राहक!
ईजीपे (एमजे डिजिटल सर्विसेज) के को-फाउंडर और सीईओ शम्स तबरेज के अनुसार, रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से कर्ज महंगा होगा और लोग नया लोन लेने से पहले सोचेंगे। उधारकर्ताओं को केवल ईएमआई नहीं, बल्कि लोन की कुल लागत और अवधि के साथ अपनी चुकाने की क्षमता पर भी ध्यान देना चाहिए।
यह बात पर्सनल लोन और डिजिटल क्रेडिट पर विशेष रूप से लागू होती है, जहां आसानी से मिलने वाले कर्ज के कारण कई बार लोग बिना सोचे-समझें कर्ज ले लेते हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल वित्तीय पहुंच तेजी से बढ़ रही है, इसलिए वहां समझदारी से कर्ज लेना, अपनी जेब के हिसाब से जरूरत तय करना और आपातकालीन स्थिति के लिए बचत करना बेहद जरूरी है। यह रेट हाइक सिर्फ महंगे कर्ज का संकेत नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन अपनाने की एक सीख भी है।
त्योहारी सीजन में डेवलपर्स दे सकते हैं ऑफर
श्यामल ग्रुप-धोलेरा एसआईआर के डायरेक्टर हार्दिक शाह के अनुसार, रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से डेवलपर फाइनेंसिंग और प्रोजेक्ट की लागत प्रभावित होगी। मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर ईएमआई का बोझ बढ़ेगा, जबकि नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में सावधानी बरती जाएगी।
त्योहारी सीजन में बाजार को लुभाने के लिए डेवलपर्स आकर्षक पेमेंट प्लान, सबवेंशन और छूट दे सकते हैं। मिड-सेगमेंट के उन डेवलपर्स की प्रोजेक्ट विजिबिलिटी पर ज्यादा असर पड़ेगा जिन पर कर्ज अधिक है। मांग तो बनी रहेगी, लेकिन निकट भविष्य में बिक्री की रफ्तार मुख्य तौर पर जॉब सिक्योरिटी और स्टॉक क्लियरेंस पर निर्भर करेगी।
घर खरीदार होंगे प्रभावित!
फोर्टीएशिया रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर शिव गर्ग के अनुसार, रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी (अब 5.50%) से घर खरीदार प्रभावित होंगे। सस्ते और मिड-सेगमेंट के घरों पर ईएमआई का दबाव बढ़ेगा, जिससे त्योहारी सीजन में बिक्री सुस्त रह सकती है, हालांकि लग्जरी हाउसिंग इससे अछूती रहेगी।
ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने के संकेत से खरीदार नई बुकिंग की जगह रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी को प्राथमिकता देंगे। जब तक मांग नहीं बढ़ती, नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग टल सकती है। मांग घटने से कीमतों में सुधार (करेक्शन) की गुंजाइश है और अब बाजार पूरी तरह खरीदारों के पक्ष में रहेगा।
रुपये की वैल्यू कम आंकी गई है, RBI रुपये में स्थिरता बनाए रखेगा: RBI गवर्नर मल्होत्रा
कई अनुमानों के अनुसार रुपये की वैल्यू "कम आंकी गई" हो सकती है, यह बताते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को भरोसा दिलाया कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया यह सुनिश्चित करेगा कि करेंसी "स्थिर" हो और इसे इसकी "सही वैल्यू" तक पहुंचने में मदद करेगा।
डॉलर के मुकाबले लोकल करेंसी के अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुँचने के दिन पत्रकारों से बात करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि हालांकि शॉर्ट टर्म में मार्केट "अतार्किक" हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में वे अपनी सही वैल्यू दिखाते हैं।
AI एसेट की ज्यादा वैल्यूएशन से ग्लोबल रिस्क है: RBI गवर्नर
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े एसेट की बहुत ज़्यादा वैल्यूएशन से ग्लोबल इकोनॉमी के आउटलुक पर बुरा असर पड़ने का खतरा है, लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा होने वाले साइबर जोखिम सेंट्रल बैंकों के लिए ज़्यादा बड़ी चिंता का विषय हैं।
गवर्नर ने पॉलिसी के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ANI के एक सवाल के जवाब में ये बातें कहीं। इससे पहले RBI ने ग्लोबल इकोनॉमी के लिए अहम जोखिमों में AI से जुड़े एसेट की बहुत ज्यादा वैल्यूएशन का जिक्र किया था।
मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के दौरान अपनी शुरुआती बातों में कहा था, "पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव का कोई समाधान न निकल पाने के कारण ग्लोबल आउटलुक पर काफ़ी जोखिम बने हुए हैं। इनमें ग्लोबल फाइनेंशियल हालात का और सख्त होना, AI से जुड़े एसेट की बहुत ज़्यादा वैल्यूएशन का जारी रहना और ज्यादा पब्लिक डेट (सरकारी कर्ज) शामिल हैं।"
UPI MDR पर क्या बोले RBI गवर्नर मल्होत्रा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि MDR पर पहले ही फैसला लिया जा चुका है। अभी तक हमें UPI वॉल्यूम में कोई कमी नहीं दिख रही है, और मुझे व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि छोटी सी फीस का वॉल्यूम पर कोई बड़ा असर पड़ेगा।
नीति का रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। टाटा एसेट मैनेजमेंट के फिक्स्ड इनकम के डिप्टी हेड अमित सोमानी के अनुसार, इस नीति का रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया गया है, जो आगे और दरों में बढ़ोतरी का संकेत देता है।
महंगाई (CPI Inflation): मानसून में कमी और कच्चे तेल व कमोडिटी की कीमतों में लगातार तेजी के कारण वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई अनुमान को 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया गया है। आने वाली तिमाहियों में महंगाई दर 5.8% के उच्च दायरे के आसपास बनी रह सकती है।
विकास दर (GDP Outlook): मजबूत पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों और सरकार द्वारा बुनियादी ढांचा (infrastructure) पर लगातार जोर दिए जाने के चलते वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है।
तरलता (Liquidity): बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता बनाए रखने के लिए कोई भी नया विनियामक उपाय नहीं घोषित किया गया है, जिससे अल्पकालिक दरें स्थिर रहने की उम्मीद है।
फिक्स्ड इनकम और यील्ड: 3 से 6 महीने के CD रेट्स 6.60%-7.00% और 1-वर्षीय CD रेट्स 7.50%-7.75% के आसपास रहने की संभावना है। वहीं, 10-वर्षीय G-sec यील्ड 7.20%-7.40% के दायरे में रहने का अनुमान है।
आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने का कमर्शियल रियल एस्टेट और रिटेल मार्केट पर असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया गया है। इस कदम से मॉल्स और कमर्शियल प्रॉपर्टी मार्केट पर नया असर पड़ सकता है। टीआरजी ग्रुप के प्रबंध निदेशक, पवन शर्मा का मानना है कि इससे लोन महंगे होंगे और नए प्रोजेक्ट्स के लिए फैसले सोच-समझकर लेने होंगे। ब्याज दरें बढ़ने से भले ही फंडिंग महंगी हो, लेकिन मजबूत कमर्शियल एसेट्स की मांग बनी रहेगी। निवेशकों के लिए यह समय सही और क्वालिटी प्रॉपर्टी चुनने का है, क्योंकि सही प्लानिंग और स्पष्ट कैश फ्लो से इस सेक्टर में लगातार विकास संभव है।
आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने से आवासीय रियल एस्टेट पर असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया गया है। इससे घर खरीदने वाले लोग अब थोड़े सतर्क हो सकते हैं। हालांकि, प्रीमियम फार्महाउस और प्लॉट सेगमेंट पर इसका असर कुछ अलग तरीके से पड़ सकता है।
नेहलिया डेवलपर्स के संस्थापक और सीईओ, अशोक नेहलिया का कहना है कि इस तरह की प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोग सिर्फ मंथली लोन के बारे में नहीं सोचते। वे बेहतर लाइफस्टाइल, प्राइवेसी और खुली जगह की तलाश में रहते हैं। कई लोग इसे लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखते हैं।
ब्याज दरें बढ़ने के बावजूद शहर से दूर बड़े और शांत घरों की मांग कम नहीं हुई है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे भरोसेमंद डेवलपर्स और साफ-सुथरे प्रोजेक्ट्स पर ही ध्यान दें। कुल मिलाकर, लंबी अवधि में यह सेगमेंट मजबूत बना रहेगा।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी रिपोर्ट में GDP से लेकर महंगाई तक पर क्या-क्या?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके स्टाफ का अनुमान है कि FY28 में वास्तविक GDP ग्रोथ 7% रहेगी। रिपोर्ट में कमजोर रुपये और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई के जोखिमों पर भी प्रकाश डाला गया है।
RBI के अनुमानों के अनुसार, बेसलाइन से रुपये में 5% की गिरावट हेडलाइन महंगाई में 40 बेसिस प्वाइंट जोड़ देगी। इसी तरह, अगर कच्चे तेल की कीमतें बेसलाइन अनुमान से 10% अधिक रहती हैं, तो हेडलाइन महंगाई 50 बेसिस पॉइंट बढ़ जाएगी।
RBI ने FY27 के लिए $/INR एक्सचेंज रेट के अपने अनुमान को भी पहले के 94 से बदलकर 95 कर दिया है।
रिपोर्ट के ये अनुमान ऐसे समय में आए हैं जब केंद्रीय बैंक महंगाई के आउटलुक पर बाहरी कीमतों और करेंसी के झटकों के असर का आकलन कर रहा है, साथ ही FY28 में वास्तविक आर्थिक विकास के मजबूत बने रहने का अनुमान भी लगा रहा है।
अल नीनो और कमजोर मॉनसून को लेकर RBI गवर्नर ने चिंता जताई
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आने वाले रबी सीजन को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि कमजोर मॉनसून और तेज अल नीनो का फसलों पर असर पड़ सकता है।
RBI MPC अक्टूबर 2026 की मुख्य घोषणाएं
- रेपो रेट 25 bps बढ़ाकर 5.5% किया गया
- पॉलिसी का रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (सोच-समझकर सख्ती) किया गया
- FY27 के लिए रियल GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान
- FY27 के लिए CPI महंगाई दर 5.2% रहने का अनुमान
RBI के रेपो रेट बढ़ाने पर क्या बोले एक्सपर्ट?
हीरो फिनकॉर्प के MD और CEO, अभिमन्यु मुंजाल ने कहा: "RBI का रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाने का फ़ैसला बदलते मैक्रो-इकोनॉमिक हालात के हिसाब से एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता और ग्लोबल मॉनेटरी हालात के सख्त होने से महंगाई का दबाव बढ़ा है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती बनाए रखी है।"
ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा - "ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर कुछ समय के लिए रिटेल रियल एस्टेट पर पड़ सकता है। फाइनेंसिंग की ज़्यादा लागत और त्योहारों के दौरान कम खरीदारी की संभावना की वजह से डेवलपर्स और इन्वेस्टर्स ज्यादा सतर्क हो सकते हैं। जब तक डिमांड को लेकर ज्यादा स्पष्टता नहीं आती, तब तक कुछ नए मॉल प्रोजेक्ट्स को टाला जा सकता है।"
आनंद राठी ग्रुप के चीफ इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुजन हाजरा ने कहा- "हमारे आकलन के मुताबिक, RBI का 25-बेसिस-पॉइंट का इजाफा असाधारण हालात में लिया गया एक बहुत ही सोच-समझकर और सावधानी से लिया गया फैसला था। घरेलू ग्रोथ के मजबूत रहने से कदम उठाने की गुंजाइश बनी, जबकि खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें, कच्चे तेल की ऊंची ग्लोबल कीमतें, ग्लोबल और घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की गिरती कीमत ने सख्ती (टाइट मॉनेटरी पॉलिसी) की तरफ झुकाव को और मजबूत किया। इसका मतलब यह नहीं है कि आगे भी लगातार बढ़ोतरी होगी।"
RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया
7 अक्टूबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने FY27 के लिए अपनी रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।
साथ ही, दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए भी ग्रोथ के अनुमान बढ़ाए गए हैं। सेंट्रल बैंक ने Q2FY27 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत और Q3FY27 के लिए 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया। Q4FY27 के लिए अनुमान को 6.8 प्रतिशत पर ही बनाए रखा गया।
RBI MPC Meeting LIVE: महंगाई दर 4.4% रहने का अनुमान
RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए भारत की महंगाई दर 4.4% रहने का अनुमान लगाया है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "अगली तीन तिमाहियों (मौजूदा तिमाही सहित) में हेडलाइन CPI महंगाई दर औसतन लगभग 5.8% रहने की उम्मीद है, और इस फाइनेंशियल ईयर के लिए कोर महंगाई दर 4.4% रहने का अनुमान है।"
VIDEO | RBI MPC Meeting: Governor Sanjay Malhotra says, "The MPC also decided to change the stance to calibrated tightening by a majority of 4-2. I shall now briefly set out the rationale for these decisions. The MPC noted that the global context on account of geopolitical developments remains challenging. Nonetheless, the Indian economy has been strong and the economic momentum remains broad-based. Moreover, the economy is expected to remain resilient. It further observed, in light of the available data, that it is clear that inflation and its outlook are not as benign as they were last year. With headline CPI inflation expected to average almost 5.8 per cent in the next three quarters, including this, and core inflation projected at 4.4 per cent for this financial year." (Source: Third Party) (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
— Press Trust of India (@PTI_News) October 7, 2026
RBI MPC Meeting Live: महंगाई पर क्या बोले गवर्नर संजय मल्होत्रा
गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि एनर्जी की बढ़ती लागत और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें ग्लोबल महंगाई को बढ़ा रही हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सितंबर में वेस्ट एशिया में टकराव के फिर से बढ़ने और उसके कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सख्ती आने से ग्लोबल इकोनॉमिक माहौल खराब हुआ और फाइनेंशियल मार्केट में अस्थिरता बढ़ी।
उन्होंने कहा, "हालांकि ग्लोबल ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में इस साल इसके धीमे होने का अनुमान है। एनर्जी की बढ़ती लागत और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों के कारण ग्लोबल महंगाई तेजी से बढ़ने का अनुमान है, जिससे दुनिया भर के प्रमुख सेंट्रल बैंकों को मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती करनी पड़ रही है। ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता, एडवांस्ड इकोनॉमीज में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और डॉलर की मज़बूती ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट के माहौल को घबराहट और कमजोरी की स्थिति में रख रही है। ग्लोबल फाइनेंशियल हालात में और सख्ती, AI स्टॉक्स की सही वैल्यूएशन को लेकर अनिश्चितता और वेस्ट एशिया टकराव का कोई समाधान न निकल पाना बड़ी चुनौतियां हैं।"
रेपो रेट बढ़ने से बढ़ेगी EMI
रेपो रेट में बढ़ोतरी से अब होम लोन लेने वाले ग्राहकों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। अगर किसी ग्राहक ने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लिया है, तो उसकी EMI बढ़ जाएगी।
उदाहरण से समझें तो मान लीजिए किसी ने 25 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है। इस लोन की ब्याज दर 7.5% है। इस लोन की मासिक EMI करीब 36,950 रुपये बैठती है। 25 साल यानी 300 महीने की पूरी अवधि में ग्राहक को लगभग 60.85 लाख रुपये ब्याज के रूप में चुकाने होंगे।
लेकिन अब रेपो रेट में 25 bps की बढ़ोतरी के बाद बैंक भी होम लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है। इससे उस व्यक्ति पर भार बढ़ जाएगा।
25 bps बढ़ने से उसी होम लोने की ब्याज दर 7.75% हो सकती है जिसके चलते तो EMI बढ़कर लगभग 37,766 रुपये हो जाएगी। इसका मतलब है कि अगर लोन की अवधि में कोई बदलाव न हो, तो उधार लेने वाले को हर महीने लगभग 817 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे।
रेपो रेट पर क्या बोले RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि MPC ने वेस्ट एशिया में तनाव और महंगाई की चिंताओं के बीच रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.5% करने के पक्ष में वोट किया है।
उन्होंने कहा, "बदलते मैक्रो-इकोनॉमिक और फाइनेंशियल हालात, घटनाक्रम और भविष्य के अनुमानों का विस्तार से आकलन करने के बाद, MPC ने सर्वसम्मति से LAF के तहत पॉलिसी रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया। इसके परिणामस्वरूप, SDF रेट को एडजस्ट करके 5.25% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को 5.75% कर दिया गया है।"
3 साल बाद बढ़ा रेपो रेट, महंगा होगा होम लोन
RBI की मॉनेटिरी पॉलिसी बैठक में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला लिया गया है। यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद हुई है। रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 5.5% हो गया है। अब होम लोन महंगा होगा। क्योंकि बैंकों को केंद्रीय बैंक से महंगी दरों पर ब्याज मिलेगा, जिसका भार बैंक आम ग्राहकों पर डालेंगे।
रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी
RBI की मॉनेटिरी पॉलिसी की बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। RBI ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की है, जो बढ़कर 5.5% हो गया है।
RBI MPC Meeting Live: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा दे रहे हैं अपडेट
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक में लिए गए फैसलों का अडपेट दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी का अनुमान है, जिसके चलते दुनिया भर के प्रमुख सेंट्रल बैंक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त कर रहे हैं। SDF दर को एडजस्ट करके 5.25 प्रतिशत कर दिया गया है, और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेंज और बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत कर दिया गया है।
ब्याद दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई 5% के करीब है और दिसंबर तिमाही में इसके RBI की 2%-6% की टॉलरेंस रेंज (स्वीकार्य सीमा) के ऊपरी स्तर के करीब पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बुधवार के बाद और भी मॉनेटरी टाइटनिंग (मौद्रिक सख्ती) हो सकती है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, मजबूत अर्थव्यवस्था नीति-निर्माताओं को विकास दर पर बहुत ज्यादा असर डाले बिना कर्ज लेने की लागत बढ़ाने की गुंजाइश देती है।
RBI MPC मीटिंग के बीच बाजार गिरावट के साथ खुला
BSE सेंसेक्स 73,067.81 के पिछले क्लोजिंग लेवल के मुकाबले 72,965.38 पर खुला और सुबह 9:18 बजे 415.34 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 72,652.47 पर ट्रेड कर रहा था। NSE निफ्टी 50 मंगलवार के 22,776.10 के क्लोजिंग लेवल के मुकाबले 22,690.45 पर खुला और 155.40 अंक या 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,620.70 पर था।
अगस्त में RBI की पॉलिसी के बाद से निफ्टी में 7.5% की गिरावट
5 अगस्त को RBI की पिछली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद से शेयर बाजार पर काफी दबाव रहा है और इस दौरान निफ्टी 50 में लगभग 7.5% की गिरावट आई है।
इस गिरावट की वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और लगातार विदेशी फंड की निकासी रही है, जिससे RBI के नए पॉलिसी फैसले से पहले निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
ग्लोबल अस्थिरता और बढ़ती CPI बड़ी चिंताएं हैं
सेंट्रल बैंक की MPC की समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब आर्थिक नीति को जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और बढ़ती कीमतों के कारण नए दबावों का सामना करना पड़ रहा है। समिति के रुख को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में जियोपॉलिटिकल तनाव, बढ़ता कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और घरेलू खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव शामिल हैं।
वेस्ट एशिया में लंबे समय से चल रहा संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताएं पैदा कर रही हैं, जिनके माइक्रो-इकोनॉमिक नतीजे भी हैं - ये आम आदमी की जेब पर हर दिन बोझ डाल रही हैं। इसके अलावा, लगातार बनी हुई खाद्य महंगाई को लेकर चिंताओं ने रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी को अस्थिर बनाए रखा है।
RBI MPC Meeting: पहली तिमाही में 7.8% की बढ़ोतरी के बाद RBI के ग्रोथ आउटलुक पर नजर
पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में उम्मीद से ज़्यादा 7.8% की बढ़ोतरी के बाद, RBI का आर्थिक विकास का आकलन एक और अहम संकेत होगा। मनीकंट्रोल के पोल में ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% पर ही बनाए रखेगा।
