आपके खेत का चावल भी बिक सकता है विदेशी बाजारों में, इंपोर्ट के लिए जरूरी रजिस्ट्रेशन और मार्केटिंग का पूरा प्रोसेस
छोटे किसान भी अपने खेत का चावल विदेशी बाजारों में निर्यात कर सकते हैं, जिसके लिए IEC और APEDA जैसे ...और पढ़ें
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चावल एक्सपोर्ट करने का पूरा प्रोसेस (AI Image)
HighLights
चावल निर्यात के लिए IEC और APEDA रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।
अंतर्राष्ट्रीय खरीदार ढूंढने के लिए व्यापार मेलों का उपयोग करें।
छोटे किसान FPO या निर्यात कंपनियों से जुड़कर लाभ उठाएं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत खाद्यान्न उत्पादन के लिहाज से दुनिया के शीर्ष देशों में गिना जाता है। चावल के उत्पादन और निर्यात में हम दुनिया के नंबर वन हैं। भारतीय चावल की मांग सऊदी अरब, UAE, ईरान, इराक, अफ्रीकी देशों और यूरोप तक फैली हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई छोटा किसान भी अपने खेत में पैदा हुए चावल को विदेश भेज सकता है? इसका जवाब है- हां, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी रजिस्ट्रेशन, गुणवत्ता मानकों और सही मार्केटिंग रणनीति की जरूरत होती है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अधिकांश छोटे किसान सीधे निर्यात नहीं करते, बल्कि किसान उत्पादक संगठन (FPO), राइस मिल, प्रोसेसर या एक्सपोर्टर्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाते हैं। हालांकि अगर आप खुद से निर्यात करना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
IEC और APEDA रजिस्ट्रेशन
किसी भी एग्री और एग्री प्रोसेस्ड उत्पाद के निर्यात के लिए सबसे पहले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड (IEC) प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके बाद कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) का e-RCMC रजिस्ट्रेशन लेना होता है। APEDA के अनुसार, कृषि उत्पादों के निर्यातकों के लिए IEC और RCMC बुनियादी प्रक्रिया है।
जरूरी डाक्यूमेंट्स
अगर आप चावल का निर्यात करना चाहते हैं तो इसके लिए फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े दस्तावेज रखने होते हैं। बासमती और गैर-बासमती चावल के निर्यात के लिए APEDA द्वारा जारी Registration-cum-Allocation Certificate (RCAC) भी जरूरी होता है।
विदेश में कैसे मिलेंग खरीदार?
एक्सपोर्ट कारोबार की सबसे बड़ी चुनौती खरीदार ढूंढना है। आपके अपने कॉन्टैक्ट नहीं हैं तो ग्राहक ढूंढना मुश्किल होगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, बायर्स-सप्लायर्स मीटिंग्स, B2B पोर्टल्स, भारतीय दूतावासों, फॉरेन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसके अलावा बहुभाषी वेबसाइट, प्रोडक्ट्स कैटलॉग, क्वालिटी सर्टिफिकेशंस और कॉम्पटीटिव प्राइसिंग भी नए ऑर्डर हासिल करने में मदद करते हैं।
छोटे किसान क्या करें?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे किसानों के लिए सीधे निर्यात की बजाय FPO या एक्सपोर्ट कंपनियों से जुड़ना अधिक अच्छा ऑपशन है। किसान समूह बनाकर एक जैसी गुणवत्ता वाला चावल बड़ी मात्रा में उपलब्ध करा सकते हैं। इससे एक्सपोर्टर्स को नियमित आपूर्ति मिलती है और किसानों को स्थानीय मंडियों की तुलना में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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किन बातों का रखें ध्यान
स्थानीय बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सबसे बड़ा अंतर क्वालिटी का है। यहां केवल प्रोडक्शन पर्याप्त नहीं है बल्कि नमी का स्तर, टूटे दानों का प्रतिशत, कीटनाशक अवशेष (MRL), पैकेजिंग और ट्रेसबिलिटी जैसे मानकों का पालन करना जरूरी होता है। कई देशों के लिए अलग-अलग गुणवत्ता और परीक्षण संबंधी नियम लागू हैं, जिनका पालन किए बिना निर्यात संभव नहीं है।
