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जुलाई में भारत ने खरीदा दबाकर कच्चा तेल, होर्मुज बंद होने पर भी नहीं थमी रफ्तार! तेल का बिल का आंकड़ा देख चौंक जाएंगे

Published: Wed, 19 Aug 2026 06:24 PM (IST)

जुलाई में भारत का कच्चा तेल आयात 9% बढ़कर 21.41 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, जबकि तेल का बिल 41% ...और पढ़ें

जुलाई में तेल आयात मार्च के बाद उच्चतम स्तर पर पहुंचा (AI Image)

जुलाई में तेल आयात मार्च के बाद उच्चतम स्तर पर पहुंचा (AI Image)

HighLights

  1. जुलाई में भारत का कच्चा तेल आयात 9% बढ़ा।

  2. तेल का बिल 41% बढ़कर 13.7 अरब डॉलर हुआ।

  3. पश्चिम एशिया तनाव से तेल कीमतें बढ़ीं, खपत भी बढ़ी।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के आयातक देशों में शामिल है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद से दुनिया के कई देशों में क्रूड की सप्लाई प्रभावित होने से ऊर्जा संकट गहराता गया। इस बीच भारत ने मुश्किल भरे रास्ते में भी तेल की खरीदी कम करने की बजाय बढ़ा दी। बुधवार को तेल आयात का सरकारी आंकड़ा भी सामने आया है, जिससे पता चलता है कि जुलाई में भारत का कच्चा तेल (Crude Oil) आयात पिछले महीने की तुलना में 9% से अधिक बढ़कर 21.41 मिलियन मीट्रिक टन हो गया। हालांकि तेल के बिल में भी बहुत ही अधिक और चौंकाने वाली बढ़ोतरी देखने को मिली है।

पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर कच्चे तेल का आयात पिछले साल जुलाई में 18.89 मिलियन टन से 13% अधिक रहा। कच्चे तेल उत्पादों का आयात जून की तुलना में जुलाई में लगभग 2% घटकर 2.53 मिलियन टन रह गया और एक साल पहले की तुलना में 40% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं पेट्रोलियम उत्पादों का एक्सपोर्ट वार्षिक आधार पर 8% से अधिक बढ़कर 5.03 मिलियन टन हो गया।

जुलाई में बढ़ी ईंधन की खपत

आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में जुलाई में ईंधन की खपत पिछले महीने की तुलना में लगभग 3% बढ़कर 19.92 मिलियन मीट्रिक टन हो गई, जो मार्च के बाद से उच्चतम स्तर है। जुलाई में LPG का आयात जून महीने के 1.02 मिलियन टन से घटकर 870,000 मीट्रिक टन रह गया, जबकि ईंधन तेल का आयात महीने-दर-महीने बढ़कर 233,000 मीट्रिक टन हो गया, हालांकि ये पिछले साल जुलाई में 530,000 मीट्रिक टन से कम था। इसके अलावा जेट ईंधन का निर्यात पिछले साल जुलाई में 0.65 मिलियन टन से 32% से अधिक गिरकर 0.44 मिलियन टन रह गया।

तेल बिल में आया जबरदस्त उछाल

मार्च के बाद सबसे उच्च स्तर पर तेल का आयात हुआ है। हालांकि ये बिल अधिक मात्रा में इंपोर्ट करने की वजह से नहीं बढ़ा, बल्कि इसका मामला कुछ और ही है। अप्रैल-जुलाई में भारत ने 81.9 मिलियन टन कच्चा तेल खरीदा, जबकि पिछले साल इसी दौरान 81.5 मिलियन टन खरीदा था। सिर्फ जुलाई की ही बात करें तो आयात का बिल 41% बढ़कर 13.7 अरब डॉलर हो गया।

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तेल की कीमत में भारी उछाल का कारण पश्चिम एशिया का में चल रहे तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की टेंशन है। इस साल अप्रैल में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 114.48 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो अप्रैल 2025 में सिर्फ 67.7 डॉलर थी. जुलाई में भी औसत कीमत 82.04 डॉलर रही, जो पिछले साल के 70.9 डॉलर से कहीं ज्यादा है। बता दें कि दुनिया के कई देशों में तेल पहुंचाने वाला ये रास्ता बेहद अहम है, यहां बढ़ रहे तनाव को