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चीन-चिली और ट्रंप... अब कॉपर के साथ कौन कर रहा 'खेल', क्या अगला नया गोल्ड बनने की राह पर निकल पड़ा तांबा?

Published: Tue, 08 Sep 2026 01:19 PM (IST)

Copper Pricce Todat: लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, भारत में भी इसके ...और पढ़ें

तांबा बना नया सोना ट्रंप, चीन और चिली के खेल से रिकॉर्ड ऊंचाई पर

तांबा बना नया सोना ट्रंप, चीन और चिली के खेल से रिकॉर्ड ऊंचाई पर

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| जहां सोना और चांदी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, तो वहीं कमोडिटी मार्केट में कॉपर ने गदर मचा रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और अपने ऐतिहासिक लेवल (Copper record high) पर पहुंच गई हैं।

LME पर बेंचमार्क तीन महीने का वायदा 0.8% उछलकर 14,533 डॉलर प्रति टन पर ट्रेड कर रहा है। इसने जनवरी में बने अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पिछले सिर्फ एक साल में ही कॉपर 17% महंगा हो चुका है।

भारत में कहां पहुंचे कॉपर के ताजा रेट?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सितंबर डिलीवरी वाला कॉपर 1.03% यानी 14.25 रुपए उछलकर 1400 रुपए प्रति किलोग्राम (copper prices today) पर कारोबार कर रहा है। मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान इसका हाई लेवल 1403.50 रुपए और लो लेवल 1388.85 रुपए (copper rates today) रहा। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 1386.70 रुपए पर बंद हुआ था। 13 मई 2026 को कॉपर ने 1473 रुपए का हाई लेवल बनाया था। तब से अब तक इसमें 73 रुपए प्रति किलोग्राम की गिरावट आ चुकी है।

आखिर क्यों आसमान छू रहे हैं दाम?

इस भयंकर उछाल के पीछे शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म, दोनों तरह के फैक्टर काम कर रहे हैं।

  • ट्रंप के टैरिफ का डर: बाजार में यह डर बैठ गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप रिफाइंड मेटल के आयात पर भारी टैरिफ लगा सकते हैं। इस डर से न्यूयॉर्क के कोमेक्स पर कॉपर फ्यूचर तगड़े प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। आर्बिट्राज का मुनाफा कमाने के चक्कर में व्यापारी दुनिया भर का कॉपर अमेरिका भेज रहे हैं।
  • LME पर भारी शॉर्टेज: अमेरिका में हो रही इस डंपिंग के कारण LME के वैश्विक गोदामों में कॉपर का स्टॉक खतरनाक स्तर तक गिर गया है। हालात ये हैं कि बाजार बैकवर्डेशन में चला गया है। यानी हाजिर कीमतें फ्यूचर प्राइसेज से काफी ज्यादा हो गई हैं। यह साफ इशारा है कि डिमांड के मुकाबले सप्लाई बहुत कम है।
  • बढ़ती फ्यूचर डिमांड: दुनिया भर में डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ग्रिड्स का जाल बिछ रहा है, जिसमें कॉपर की भारी डिमांड है। लेकिन दुनिया की पुरानी खदानें इस रफ्तार से कॉपर नहीं निकाल पा रही हैं।

चिली की खदानों ने बढ़ाई टेंशन

दुनिया के एक-चौथाई कॉपर का उत्पादन अकेले चिली करता है, लेकिन वहां हालत बेहद खराब है। इतनी ऊंची कीमतों के बावजूद अगस्त में चिली का कॉपर निर्यात (Chile copper exports) पिछले एक साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। केंद्रीय बैंक के डेटा के मुताबिक, अगस्त में एक्सपोर्ट $4.62 बिलियन रहा, जो जुलाई के मुकाबले 14% और पिछले साल से 3.2% कम है।

इसकी मुख्य वजह भयंकर मौसम रहा। भारी बारिश, बर्फबारी, तेज हवाओं और समुद्री तूफानों के कारण चिली की खदानों से लेकर बंदरगाहों तक का काम महीनों तक ठप पड़ा रहा।

चिली के कॉपर कमीशन की चेतावनी

कोचील्को की चेतावनी: चिली के स्टेट कॉपर कमीशन (Cochilco) ने कहा है कि चिली को नए स्मेल्टर यानी तांबा पिघलाने वाले प्लांट लगाने से पहले अपने मौजूदा प्लांट्स की हालत सुधारनी चाहिए। फिलहाल चिली के स्मेल्टर अपनी क्षमता का सिर्फ 60% ही काम कर रहे हैं। आयोग ने चेताया कि,

"चिली अपना दो-तिहाई कच्चा माल सीधे चीन भेजता है, जिससे वह चीनी नीतियों पर हद से ज्यादा निर्भर हो गया है। खदानों में देरी और नए स्मेल्टर खुलने से कच्चे माल की होड़ बढ़ेगी, जिससे स्मेल्टर का प्रॉफिट मार्जिन पहले ही जीरो या नेगेटिव में चला गया है।"

माइनिंग कंपनियों की चांदी: कॉपर की इस आग ने बड़ी माइनिंग कंपनियों की झोलियां भर दी हैं। रियो टिंटो (Rio Tinto), बीएचपी (BHP), ग्लेनकोर और जिजिन माइनिंग जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने लेटेस्ट अर्निंग रिपोर्ट्स में छप्पर फाड़ प्रॉफिट दर्ज किया है।

इतनी ज्यादा कीमतों के कारण खरीदार कॉपर के सस्ते विकल्प तलाश सकते हैं, लेकिन महंगे कर्ज और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद कॉपर की चमक फीकी नहीं पड़ रही है। फिलहाल डिमांड साइड से ऐसा कोई दबाव नहीं दिख रहा है जो कॉपर की इस रिकॉर्ड-तोड़ उड़ान को रोक सके।

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