तांबे की कीमतों में लगी आग, टूटे सारे रिकॉर्ड! जानिए भारत पर क्या होगा इसका सीधा असर
सोमवार को वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका के बाहर आपूर्ति ...और पढ़ें

तांबे की कीमतों में जोरदार उछाल
HighLights
तांबे की कीमतें $14,533 प्रति मीट्रिक टन के रिकॉर्ड पर।
अमेरिका के बाहर आपूर्ति में कमी की आशंका से खरीदारी बढ़ी।
भारत में विनिर्माण लागत और व्यापार घाटे में वृद्धि की चिंता।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार को कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। इसकी वजह अमेरिका के बाहर सप्लाई में कमी की आशंका के चलते खरीदारी में बढ़ोतरी और डॉलर के कमजोर होने से बाजार में बना पॉजिटिव माहौल रहा।
रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रेडर्स के मुताबिक सोमवार को अमेरिका में छुट्टी होने के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहा और बाजार का ध्यान मुख्य रूप से कॉपर और जिंक पर रहा।
कितनी पहुंच गई कीमत?
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर बेंचमार्क कॉपर की कीमत $14,533 प्रति मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जिसने जनवरी में बने $14,527.50 के पिछले ऑल-टाइम हाई को पीछे छोड़ दिया। बाद में इसकी बढ़त थोड़ी कम होकर $14,518 हो गई, जो 0.7% अधिक रही।
मगर अब सुबह इंटरनेशनल मार्केट में कॉपर का रेट 1.17 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 14,539.65 डॉलर पर दिख रहा है।
इंपोर्ट टैरिफ के बाद बदले हालात
पिछले साल फरवरी में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार इंपोर्ट टैरिफ लगाने की बात कही थी, तब से ट्रेडर और प्रोड्यूसर अमेरिका में बड़ी मात्रा में कॉपर भेज रहे हैं। अभी Comex कॉपर स्टॉक रिकॉर्ड 766,795 शॉर्ट टन या 695,624 मीट्रिक टन पर है।
टैरिफ पर अनिश्चितता बरकरार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जानकारों के मुताबिक टैरिफ को लेकर क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन जब तक अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक कीमतें ऊंची बनी रहेंगी क्योंकि मटीरियल की सप्लाई अमेरिका की ओर होती रहेगी।
लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स की तुलना में शॉर्ट टर्म के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ज्यादा प्रीमियम (यानी बैकवर्डेशन) की वजह से कुछ कॉपर वापस LME में आ रहा है।
डिलीवरी के लिए तय मेटल को दिखाने वाले कैंसल्ड वारंट 51% पर रहे, जिससे अनुमान लगता है कि अगले कुछ हफ्तों में LME सिस्टम से 1,21,000 टन से अधिक कॉपर बाहर जा सकता है। अगस्त के बीच में, तीन महीने के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले कैश कॉपर का प्रीमियम $430 प्रति टन से ऊपर चला गया, जो 2021 के बाद से इसका सबसे ऊंचा स्तर रहा। शुक्रवार को यह लगभग $74 पर बंद हुआ।
भारत पर असर
तांबे की बढ़ती कीमतों से मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ जाती है, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का बजट बढ़ जाता है। भारत अपनी रिफाइंड कॉपर की ज्यादातर जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसका मतलब है कि ग्लोबल लेवल पर कीमतों के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने (जैसे कि घरेलू बाजार में फ्यूचर्स का भाव 1,379 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर जाना) से देश का व्यापार घाटा और बढ़ जाता है।
