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तांबा 45% हुआ महंगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां लगा रहीं एल्युमिनियम, अब मोबाइल, फैन-एसी-फ्रिज के बढ़ेंगे दाम?

Published: Tue, 08 Sep 2026 06:38 PM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 07:10 PM (IST)

Copper price hike: पिछले एक साल में तांबे की कीमतों में 45% की भारी बढ़ोतरी के कारण इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां अब ...और पढ़ें

तांबे की बढ़ती कीमतों से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर असर, कंपनियां एल्युमिनियम की ओर

तांबे की बढ़ती कीमतों से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर असर, कंपनियां एल्युमिनियम की ओर

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| पिछले एक साल में तांबे की कीमतों में 45% का भारी उछाल (copper price hike) आया है। इस बेतहाशा महंगाई ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। आलम यह है कि कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट्स में महंगे तांबे की जगह सस्ते एल्युमिनियम (aluminium price) का इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। एक्सिस कैपिटल (Axis Capital) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती डिमांड ने तांबे की किल्लत बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर अब आम आदमी की जेब और गैजेट्स की क्वालिटी पर पड़ रहा है।

एआई ने कैसे बढ़ा दी तांबे की कीमत?

लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर 2020 के बाद से ही तांबे के भाव लगातार चढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अहम आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 60 दिनों में ही तांबे के दाम 8% और पिछले 30 दिनों में 2% बढ़े हैं। रोजाना के आधार पर भी इसमें 1% की तेजी दर्ज की गई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बूम है।

दरअसल, डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग के भारी-भरकम हार्डवेयर में वायरिंग और कंपोनेंट्स के लिए तांबे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। अब एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग के बीच इसी तांबे को लेकर होड़ मच गई है। सप्लाई टाइट होने से तांबे की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं।"

कंपनियों के लिए तारणहार बना एल्युमिनियम

तांबे की इस रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट्स की डिजाइन बदल रही हैं। एक्सिस कैपिटल की रिपोर्ट बताती है कि फ्रिज और एयर कंडीशनर (AC) जैसे कंज्यूमर ड्युरेबल्स में अब तांबे की जगह एल्युमिनियम को तरजीह दी जा रही है।

हालांकि, ऐसा नहीं है कि एल्युमिनियम के दाम नहीं बढ़े हैं। साल-दर-साल के आधार पर एल्युमिनियम भी 28% महंगा हुआ है, जबकि कॉपर 45% महंगा हुआ है। लेकिन हाल के दिनों में इसमें भारी उतार-चढ़ाव दिखा है।"

पिछले 60 दिनों में एल्युमिनियम 7% और 30 दिनों में 3% चढ़ा, लेकिन अगर पिछले 90 दिनों का ट्रेंड देखें तो इसकी कीमतों में 10% की बड़ी गिरावट आई है। इसी उठापटक और तांबे के मुकाबले सस्ता होने के कारण, मार्जिन बचाने में जुटी कंपनियों के लिए एल्युमिनियम सबसे आकर्षक और आसान विकल्प बन गया है।

आम ग्राहक पर असर: नए फोन छोड़ पुराने खरीद रहे लोग

मैन्युफैक्चरर्स तांबे की बढ़ती लागत का कुछ हिस्सा खुद उठा रहे हैं, लेकिन फिर भी फाइनल प्रोडक्ट के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। इसका सीधा असर रिटेल बाजार में ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न पर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में भारत के रिफर्बिश्ड यानी सेकंड-हैंड स्मार्टफोन मार्केट में सालाना आधार पर 13% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई है।

वहीं, इसी दौरान नए स्मार्टफोन्स की बिक्री लगभग 11% गिर गई। एंट्री और मिड-रेंज सेगमेंट में महंगे होते नए फोन्स ने बजट ग्राहकों को सेकंड-हैंड मार्केट की तरफ धकेल दिया है।

लोकल मैन्युफैक्चरिंग और नए खिलाड़ियों की एंट्री

महंगे इम्पोर्ट और इनपुट कॉस्ट को कंट्रोल करने के लिए भारतीय कंपनियां कंपोनेंट्स की लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर तेजी से फोकस कर रही हैं। पैसिफिक साइबर मैन्युफैक्चर टेक्नोलॉजी जैसी ईएमएस (EMS) कंपनी ने दमन में अपनी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA) कैपेसिटी का विस्तार किया है।

कंपनी ने 2026 तक 30 लाख PCBA यूनिट्स बनाने का टारगेट रखा है, जबकि उसकी सालाना क्षमता 50 लाख यूनिट्स की हो चुकी है। यह कंपनी एसी, फ्रिज और स्मार्ट प्रोजेक्टर के लिए कंट्रोल बोर्ड सप्लाई करती है।

सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां ही नहीं, बल्कि दूसरे सेक्टर्स के दिग्गज भी इस मौके का फायदा उठा रहे हैं। देश की बड़ी सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट (UltraTech Cement) ने 19.05 करोड़ डॉलर (करीब 1800 करोड़ रुपए) का निवेश करके वायर्स और केबल्स बिजनेस में एंट्री मार ली है। कच्चे माल की चुनौती के बावजूद कंपनियां वायरिंग की भारी डिमांड पर बड़ा दांव लगा रही हैं।

पीवीसी सेक्टर में राहत, सेमीकंडक्टर में अभी लंबा सफर

जहां कॉपर की महंगाई इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का मार्जिन खा रही है, वहीं प्लास्टिक पाइप (PVC) बनाने वाली कंपनियों के लिए दूसरी तिमाही में अच्छे दिन आने की उम्मीद है। पीवीसी रेजिन की कीमतें निचले स्तर से रिकवर हो रही हैं, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और सिंचाई सेक्टर की डिमांड के दम पर इन कंपनियों की कमाई बढ़ने का अनुमान है।

भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगाना चाहता है, लेकिन रिपोर्ट मानती है कि ग्लोबल लेवल पर पहुंचने में भारत को अभी कई दशक लग सकते हैं। इसके लिए सिर्फ फैक्ट्रियां लगाना काफी नहीं है, बल्कि मजबूत सप्लाई चेन, आरएंडडी (R&D) और भारी पूंजी की जरूरत होगी।

दूसरी तरफ, दक्षिण कोरिया ने एआई डिमांड के दम पर नया कीर्तिमान रच दिया है। अगस्त में दक्षिण कोरिया का सेमीकंडक्टर निर्यात 209% उछलकर 46.65 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह देश के कुल 98.25 अरब डॉलर के निर्यात का 47.5% हिस्सा है।

इन कंपनियों के मुनाफे में दिखेगा बंपर उछाल

तमाम चुनौतियों के बावजूद कुछ कंपनियों के शेयर और मुनाफे में तगड़ी ग्रोथ का अनुमान है। एक्सिस की वैल्यूएशन मैट्रिक्स के अनुसार:

  • डिक्सन टेक्नोलॉजीज: FY26 से FY28 के बीच EPS में 46% CAGR ग्रोथ की उम्मीद।
  • एम्बर एंटरप्राइजेज: इसी अवधि में सबसे ज्यादा 97% ग्रोथ का अनुमान।
  • केन टेक्नोलॉजी और सिरमा: क्रमशः 30% और 41% की मजबूत ग्रोथ की संभावना।
  • वोल्टास और आदित्य इन्फोटेक: कंज्यूमर ड्युरेबल्स में वोल्टास 82% और आदित्य इन्फोटेक 69% की दर से बढ़ सकती है।
  • आदित्य विजन: रिपोर्ट ने इसे Add से अपग्रेड कर Buy रेटिंग दी है और 723 रुपए का टारगेट प्राइस रखा है। इसका कारण अंडरपेनिट्रेटेड मार्केट में विस्तार और बेहतर कैश जनरेशन है।

साफ शब्दों में कहें तो तांबा अब इतना महंगा हो चुका है कि कंपनियों के लिए बिना प्रोडक्ट डिजाइन बदले मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है। एल्युमिनियम एक बेहतरीन जुगाड़ साबित हो रहा है। लेकिन यह 'सस्ता विकल्प' कितने दिन चलेगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्लोबल मार्केट में तांबे के दाम आने वाले समय में क्या करवट लेते हैं।

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